Chaitra Navratri 2025 : चैत्र नवरात्रि का आज दूसरा दिन है। इस दिन देवी भगवती के दूसरे स्वरुप ब्रह्मचारिणी मां की पूजा होती है। ब्रह्मांड को जन्म देने के कारण ही देवी का दूसरा स्वरुप ब्रह्मचारिणी कहलाया। देवी की यहीं आद्या शक्ति है। यहां ब्रह्म शब्द का रूप तपस्या है। ब्रह्मचारिणी अर्थात तप की चारिणी का कथा है कि सृष्टि उत्पत्ति के समय ब्रह्माजी ने मानष पुत्रों को जन्म दिया पर वे कालातीत होते रहे।
सृष्टि का किया विस्तार :
सृष्टि का विकास नहीं हो सका। अचंभित ब्रह्माजी ने सदाशिव से पूछा कि ऐसा क्यों हो रहा है। जिस पर शिवजी ने कहा कि देवी शक्ति के बिना यह असंभव है। सब देवता देवी की शरण में गए। इस पर ब्रह्मचारिणी ने सृष्टि का विस्तार किया है। इसी के बाद नारी शक्ति को मां का स्थान मिला है।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि और भोग :
ब्रह्म मुहूर्त में नवरात्रि के दूसरे दिन सुबह उठकर नहालें। इसके पश्चात स्वच्छ कपड़ें पहनकर गंगाजल से घर के मंदिर को स्वच्छ करें। माता का अभिषेक करें। अब लाल चंदन, अक्षत, सफ़ेद पुष्प और चुनरी माता को अर्पित करें। अब माता को उनका प्रिय भोग सफेद मिठाई, मिश्री, फल ,खीर आदि अर्पित करें। इसके बाद घी का दीपक प्रज्ज्वलित करें। फिर दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। साथ ही माता ब्रह्मचारिणी की आरती उतारें।
पूजा का शुभ मुहूर्त :
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है। पंचांग के अनुसार, सुबह 04:40 से 05:26 तक, ब्रह्म मुहूर्त है वहीं दोपहर 12:01 से दोपहर 12:50 तक अभिजित मुहूर्त है, और दोपहर 14:30 से दोपहर 15:19 तक विजय मुहूर्त है इसके अलावा सुबह 07:24 से सुबह 08:48 तक अमृत काल रहेगा।
माता का प्रिय रंग :
माता ब्रह्मचारिणी का प्रिय रंग सफेद है। इसलिए माता ब्रह्मचारिणी को पूजा में उनका प्रिय सफेद फूल अर्पित करें। बतादें मां हमेशा श्वेत वस्त्र ही धारण करती है। वहीं माता ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग सफेद मिठाई, फल, मिश्री या खीर अर्पित करें ।
मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र :
मां के इस रूप की आराधना का मंत्र है। दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमंडलू । देवि प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ।।
डिस्क्लेमर: ये जानकारी ज्योतिष मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि inh news नहीं करता है।