Waqf Bill 2024: मुस्लिम समाज के लोगों ने रमजान के आखिरी शुक्रवार (28 मार्च) को अलविदा जुमे की नमाज़ अदा की। इस दौरान उन्होंने वक्फ संशोधन विधेयक 2024 का विरोध किया। एमपी, यूपी और तेलंगाना समेत पूरे देश में मुस्लिम समाज के लोगों ने काली पट्टी बांधकर जुमे की नमाज़ पढ़ी।
वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध:
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अपील पर भोपाल, होशंगाबाद और दिल्ली में भी मुस्लिम समुदाय ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड बिल पूरी तरह से गलत है। उलेमा ए दीन ने इसके खिलाफ काली पट्टी बांधकर विरोध जताने का आह्वान किया था। पुलिस ने सुरक्षा के लिए काफी बल तैनात किया था।
हैदराबाद में ओवैसी, श्रीनगर में अब्दुल्ला ने पढ़ी नमाज
हैदराबाद में AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के आह्वान का समर्थन किया। शुक्रवार को उन्होंने वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ अपनी बांह पर 'काली पट्टी' बांधकर नमाज अदा की। तो वहीं जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने श्रीनगर के हजरतबल दरगाह में रमजान के आखिरी शुक्रवार को जुमे की 'अलविदा नमाज' अदा की।
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने किया विरोध:
दिल्ली की जामा मस्जिद में रमजान के आखिरी शुक्रवार को अलविदा जुमे की नमाज़ अदा की गई। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने सरकार के रवैये का विरोध किया। उन्होंने कहा, "संविधान ने हमें अभिव्यक्ति की आज़ादी दी है, लेकिन पिछले 10 सालों में मौजूदा सरकार ने इस आज़ादी को दबाने की कोशिश की है। मैं संसद का सदस्य हूं, लेकिन मेरे खिलाफ झूठी FIR दर्ज की गई थी। सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिला, लेकिन मुझे बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा।"
भोपाल में भी काली पट्टी बांधकर पढ़ी गई नमाज :
भोपाल में भी मुस्लिम समुदाय के लोगों ने वक्फ संशोधन विधेयक 2024 का विरोध किया। उन्होंने जुमे की नमाज काली पट्टी बांधकर पढ़ी। उनका कहना था कि इस बिल से उन्हें अपनी संपत्तियां खोने का डर है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में किसी भी तरह की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इससे मस्जिदों, दरगाहों, मदरसों, कब्रिस्तानों और अन्य संस्थानों को खतरा हो सकता है।
BJP विधायक ने बताया मुस्लिम हितैषी :
भोपाल में बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने वक्फ संशोधन बिल को मुस्लिमों के लिए फायदेमंद बताया है। उन्होंने कहा कि वक्फ की जमीन से केवल कुछ परिवार ही लाभ उठा रहे हैं, जबकि लाखों मुसलमान पंक्चर की दुकान, हाथ ठेला और कबाड़ी का काम करके अपना गुज़ारा करते हैं। उन्हें शिक्षा, इलाज और घर के लिए बहुत मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इन गरीब मुसलमानों के बारे में सोचा है।