India Hydrogen Train: भारतवासियों के वर्षों का इंतजार आज अब खत्म हो जाएगा। दरअसल देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर आज सोमवार को रफ्तार भरेगी। इस ट्रेन के ट्रायल रन के बाद ही ट्रेन को आगे नियमित दौड़ाया जाएगा। जिसके बाद भारत भी नई तकनीक के साथ ग्रीन मोबिलिटी को अपनाने वाले चीन ,फ्रांस, जर्मनी जैसे खास देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा। बता दें हाइड्रोजन ट्रेन की खासियत यह है कि इसमें LED लाइट्स और बिजली बचाने वाली HOG तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।
पर्यावरण के लिए लाभदायक :
ऐसे में रेलवे स्टेशनों और जमीन पर सोलर प्लांट भी लगे हैं। और साथ ही कम बिजली खर्च करने वाले उपकरण की वजह से पेड़ भी लगा सकते हैं। वहीं पर्यावरण के लिए हाइड्रोजन ट्रेनें काफी फायदेमंद भी होती है। यह रेलवे विभाग के उस उस लक्ष्य को पूरा करने में कारगर साबित होगी, जिसके तहत उन्होंने 2030 तक खुद को 'नेट ज़ीरो कार्बन एमिटर' बनाना चाहते हैं। बता दें कि इनसे प्रदूषण बिल्कुल नहीं होता है। जो पर्यावरण के लिए लाभदायक होगा।
भारतीय रेलवे का खास प्रोजेक्ट :
ये ट्रेन चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) द्वारा पर्यावरण के अनुकूल निर्मित की गई है। इसका ट्रायल 89 किलोमीटर के इस रूट पर आज से शुरू हो रहा है। यह ट्रेन को 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने में भी सक्षम रहेगा। भारतीय रेलवे प्रोजेक्ट के तहत पहाड़ी और हेरिटेज रास्तों पर 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाना चाहता है। इस खास प्रोजेक्ट का नाम रेलवे ने 'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' है। 35 हाइड्रोजन ट्रेनों के लिए इस साल के बजट में 2800 करोड़ रखे गए हैं। साथ ही 600 करोड़ अलग से हेरिटेज रूट पर हाइड्रोजन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आवंटित किए गए हैं।
इतने यात्री कर सकेंगे सफर :
रेलवे के मुताबिक, इस ट्रेन में 8 कोच होंगे, और ये ट्रेन 110 किमी की रफ्तार से दौड़ेगी। वहीं ट्रेन में 2,638 यात्री सफर कर सकते हैं। इसके इंजन की शक्ति दुनिया में सबसे अधिक क्षमता वाली यानी 1200 एचपी होगी। इसके अलावा रेलवे ने एक DEMU ट्रेन को हाइड्रोजन से चलाने का प्रोजेक्ट भी शुरू किया है जो डीजल से चलेगी। इस प्रोजेक्ट से ट्रेन में हाइड्रोजन फ्यूल सेल लगाई जाएगी। जिसके लिए जमीनी स्तर पर जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार की जाएगी। फिलहाल इस पर अभी काम चल रहा है।