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छत्तीसगढ़

  • दिल्ली के राजपथ पर छाया छत्तीसगढ़ के वाद्य यंत्रों का जादू, देश के लोगों ने राज्य की झांकी को सराहा

    दिल्ली के राजपथ पर छाया छत्तीसगढ़ के वाद्य यंत्रों का जादू, देश के लोगों ने राज्य की झांकी को सराहा

    रायपुर। देश के लोगों ने आज नई दिल्ली के राजपथ पर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक वाद्य यंत्रों पर आधारित निकली झांकी को न केवल बड़ी उत्सुकता के साथ देखा बल्कि इसकी उन्मुक्त कंठो से सराहना भी की। यह झांकी नेशनल मीडिया के साथ ही लोगों के दिलो-दिमाग में छा गई। गणतंत्र दिवस पर नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक वाद्य यंत्रों पर आधारित राज्य की झांकी देश भर के लोगों का आकर्षण का केन्द्र बनी वहीं यह सोशल मीडिया पर भी छायी रही। देश के विभिन्न हिस्सों से लगातार इसको सराहना मिल रही है।

    नेशनल मीडिया टाइम्स नाउ ने अपने ट्विटर हेण्डल में इसकी सराहना करते हुए लिखा है कि भारत की सांस्कृतिक विविधता आज पूरे वैभव के साथ राजपथ पर दिखी। हिन्दुस्तान टाईम्स ने लिखा कि झांकी में छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी नृत्य और संगीत परम्परा को प्रदर्शित किया गया। फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने अपने ट्विटर हेण्डल में लिखा कि छत्तीसगढ़ राज्य की झांकी में संगीत के विविध वाद्य यंत्रों को बहुत खूबसूरती से प्रदर्शित किया गया है। 

    गौरतलब है कि यह झांकी छत्तीसगढ़ जनसम्पर्क विभाग के द्वारा तैयार की गई है। इस झांकी के निर्माण के लिए पिछले दो माह से तैयारी की जा रही थी। कई प्रस्तावों पर विचार करने के बार इस झांकी का निर्णय लिया गया है। छत्तीसगढ़ की झांकी में छत्तीसगढ़ के लोक संगीत का वाद्य वैभव को प्रदर्शित किया गया है। छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में प्रयुक्त होने वाले लोक वाद्यों को उनके सांस्कृतिक परिवेश के साथ बडे़ ही खूबसूरत ढंग से इसे दिखाया गया है। प्रस्तुत झांकी में छत्तीसगढ़ के दक्षिण में स्थित बस्तर से लेकर उत्तर में स्थित सरगुजा तक विभिन्न अवसरों पर प्रयुक्त होने वाले लोक वाद्य शामिल किए गए हैं। इनके माध्यम से छत्तीसगढ़ के स्थानीय तीज त्योहारों तथा रीति रिवाजों में निहित सांस्कृतिक मूल्यों को भी रेखांकित किया गया है।

    झांकी के ठीक सामने वाले हिस्से में एक जनजाति महिला बैठी है जो बस्तर का प्रसिद्ध लोक वाद्य धनकुल बजा रही है। धनकुल वाद्य यंत्र, धनुष, सूप और मटके से बना होता है। जगार गीतों में इसे बजाया जाता है। झांकी के मध्य भाग में तुरही है। ये फूँक कर बजाया जाने वाला वाद्य यंत्र है, इसे मांगलिक कार्यों के दौरान बजाया जाता है। तुरही के ऊपर गौर नृत्य प्रस्तुत करते जनजाति हैं। झांकी के अंत में माँदर बजाता हुआ युवक है। झांकी में इनके अलावा अलगोजा, खंजेरी, नगाड़ा, टासक, बांस बाजा, नकदेवन, बाना, चिकारा, टुड़बुड़ी, डांहक, मिरदिन, मांडिया ढोल, गुजरी, सिंहबाजा या लोहाटी, टमरिया, घसिया ढोल, तम्बुरा को शामिल किया गया है।

     

     

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  • मुख्यमंत्री ने मंगनार गौठान में स्व.सहायता समूहों के कार्यों को देखा, महिलाओं के साथ किया भोजन

    मुख्यमंत्री ने मंगनार गौठान में स्व.सहायता समूहों के कार्यों को देखा, महिलाओं के साथ किया भोजन

    रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज बस्तर जिले के बकावंड विकासखण्ड स्थित मंगनार गौठान का अवलोकन किया। उन्होंने वहां स्वसहायता समूहों द्वारा संचालित विभिन्न आजीविकामूलक गतिविधियों का अवलोकन किया और महिलाओं से उनके कार्यों के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने गौठान में सामुदायिक बाड़ी, मशरूम उत्पादन इकाई, नर्सरी, वर्मी कम्पोस्ट निर्माण, वेस्ट डिकम्पोस्ट उत्पादन इकाई, गोबर गमला एवं दीया निर्माण, केंचुआ खाद निर्माण, मधुमक्खी पालन, मछली पालन और कुक्कुट पालन गतिविधियों का जायजा लिया। उन्होंने गौठान में गोवर्धन पूजा की और वहां स्वसहायता समूहों की महिलाओं के साथ दोपहर का भोजन भी किया। मुख्यमंत्री के मंगनार गौठान पहुंचने पर पारंपरिक गेड़ी नृत्य और पगड़ी पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया।

    मुख्यमंत्री ने गौठान में उपस्थित जनप्रतिनिधियों, स्वसहायता समूहों की महिलाओं और ग्रामीणों से राज्य शासन की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की जानकारी ली। उन्होंने सार्वभौम सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस), बिजली बिल में 50 प्रतिशत की छूट, वनाधिकार पट्टा वितरण, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और उसके भुगतान, गोबर खरीदी तथा गांवों में गौठान निर्माण और संचालन के बारे में पूछा। उन्होंने स्थानीय किसानों से चर्चा के दौरान बताया कि राज्य सरकार आने वाले समय में कोदो-कुटकी की भी खरीदी समर्थन मूल्य पर करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन के दौर में भी प्रदेश में वनोपजों की अच्छी खरीदी हुई है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना और गौठानों में महिलाओं द्वारा विभिन्न प्रकार के स्वरोजगार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।

    बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष लखेश्वर बघेल ने मंगनार गौठान में लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि ग्रामीणों की आय बढ़ाने और गांवों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सरकार द्वारा कई नई पहल की गई हैं। छत्तीसगढ़ किसानों और पशुपालकों से गोबर खरीदने वाला देश का पहला राज्य है। वनांचलों में लोगों की आमदनी बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत और सामूहिक वनाधिकार पट्टा वितरित किए गए हैं। बस्तर के सांसद दीपक बैज ने अपने सम्बोधन में कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अलग-अलग क्षेत्रों की समस्याएं जानने लगातार भ्रमण कर विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों से मिल रहे हैं। इस दौरान वे अनेक विकास कार्यों की सौगात भी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर के एक-एक गरीब एवं आदिवासी परिवार के विकास से ही समूचे बस्तर का विकास होगा। तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवारों की आय बढ़ाने सरकार ने प्रति मानक बोरा संग्रहण दर ढाई हजार रूपए से बढ़ाकर चार हजार रूपए कर दी गई है। स्थानीय लोगों के हित में लोहण्डीगुड़ा में किसानों की जमीन लौटाने जैसा अभिनव कदम भी उठाया गया है।

    मुख्यमंत्री के मंगनार गौठान के अवलोकन के दौरान छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष चंदन कश्यप, चित्रकोट के विधायक राजमन बेंजाम, क्रेडा के अध्यक्ष मिथिलेश स्वर्णकार और छत्तीसगढ़ मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष एम.आर. निषाद, कलेक्टर रजत बंसल, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी इंद्रजीत चंद्रवाल सहित बड़ी संख्या में स्थानीय प्रतिनिधि मौजूद थे।

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  • मुख्यमंत्री ने कोण्डागांव में स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय का किया लोकार्पण

    मुख्यमंत्री ने कोण्डागांव में स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय का किया लोकार्पण

    रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज कोण्डागांव जिले के प्रवास के दौरान स्थानीय जामकोटपारा स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय का लोकार्पण किया। स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय का निर्माण 4 करोड़ 37 लाख रूपए की लागत से किया गया है। मुख्यमंत्री ने विद्यालय अवलोकन के दौरान शैक्षणिक और खेल-कूद गतिविधियों में भी हिस्सा लिया और स्कूल में बनाई गई रचनात्मक चित्रकारियों, रोचक क्लास रूम और अत्याधुनिक सुविधाओं की मुक्तकंठ से सराहना की।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विभिन्न क्लासरूम, वाचनालय, प्रयोगशाला सहित खेलकूद जोन, कला एवं संस्कृति, किड्स प्ले रूम सहित अलग-अलग कक्षों में जाकर विद्यार्थियों व शिक्षकों से चर्चा की। लोकार्पण करने के बाद वे सबसे पहले रसायन प्रयोगशाला देखने गए। जहां पर मुख्यमंत्री को कक्षा दसवीं के छात्र निखिल कुमार ने गुड़हल के फूल की रासायनिक अभिक्रिया के बारे में लैब परीक्षण करके अंग्रेजी में जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने छात्र को उसकी पढ़ाई के प्रति रूचि को देखते हुए शाबाशी दी।

    मुख्यमंत्री ने स्कूल अवलोकन के दौरान कक्षा 6वीं की छात्रा कुमारी निमिषा बैनर्जी से बड़ी ही आत्मीयता और सहजता के साथ उसकी पढ़ाई के संबंध में प्रश्न पूछे। पहले तो छात्रा ने थोड़ा संकोच किया, मुख्यमंत्री की समझाईश के बाद छात्रा ने बड़ी ही सहजता के साथ बताया कि वह पहले एक निजी स्कूल में अध्ययनरत थीं, अब यहां दाखिला लिया। दोनों स्कूलों में फर्क पूछे जाने पर निकिता ने बताया कि शासन द्वारा इंग्लिश मीडियम स्कूल स्थापित किए जाने से हम लोगों में विद्यालय के नवीन वातावरण से पढ़ाई में नया उत्साह आया है। यह निजी विद्यालयों की तुलना में हर दृष्टिकोण में बेहतर है।

    अंग्रेजी माध्यम स्कूल के लिए पालकों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया 

    मुख्यमंत्री विद्यालय अवलोकन के दौरान पालकों के बीच भी बैठे और उनसे अनौपचारिक संवाद किया। मुख्यमंत्री द्वारा स्कूल के बारे में पूछे जाने पर पालक दीपेश प्रधान, बशीर अली, सुरेश देव, अजीत, दीपिका पार्रीकर, जरीना खान ने बताया कि अंग्रेजी माध्यम स्कूल की परिकल्पना निजी विद्यालयों के बेहतर होने की कथित परम्परा को तोड़ने में यह कामयाब रहेगी। 

    मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने कैरम खेलकर बच्चों का उत्साह बढ़ाया

    विद्यालय अवलोकन के दौरान मुख्यमंत्री एवं अन्य मंत्रियों ने स्पोर्ट्स जोन में जाकर कैरम खेलकर बचपन की यादें ताजा की। मुख्यमंत्री के साथ जिले के प्रभारी मंत्री गुरू रूद्रकुमार, सांसद दीपक बैज और कोंडागांव विधायक मोहन मरकाम ने कैरम खेलकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया। इसके अलावा शतरंज एवं कम्प्यूटर लैब में जाकर विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया। संगीत कक्ष में जाकर प्रमिला जैन का हारमोनियम और गुप्तेश्वर नाग के तबला वादन का भी आनंद उठाया। इसके बाद मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों के समक्ष मंच पर स्कूल के विद्यार्थियों ने क्विज का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम, कमिश्नर जी.आर. चुरेन्द्र, पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी., कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा, एस.पी सिद्धार्थ तिवारी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण एवं वरिष्ठ नागरिक उपस्थित थे।

     

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  • मतदाता अपने मत की कीमत पहचाने और चरित्रवान उम्मीदवार का करें चयन- प्रमुख लोकायुक्त टी.पी.शर्मा

    मतदाता अपने मत की कीमत पहचाने और चरित्रवान उम्मीदवार का करें चयन- प्रमुख लोकायुक्त टी.पी.शर्मा

    रायपुर। राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर आज छत्तीसगढ़ लोक आयोग के प्रमुख लोकायुक्त न्यायमूर्ति टी.पी.शर्मा ने कहा कि मतदाता अपने मत की कीमत को पहचाने और चरित्रवान उम्मीदवार का चुनाव करें। उन्होंने मतदाताओं को अपने मताधिकार का शतप्रतिशत उपयोग करने और बिना किसी दबाव, प्रलोभन में आये निर्भिक होकर मतदान करने को कहा। शर्मा ने नए मतदाताओं को मतदाता पहचान पत्र वितरित किए। उन्होंने मतदाताओं से कहा कि मतदाता ईपिक कार्ड का उपयोग पहचान के लिए तो करते ही हैं, लेकिन जिसके लिए मिला है उसका उपयोग अनिवार्य रूप से करें। उन्होंने कोविड काल में सफलता पूर्वक मरवाही विधानसभा उपचुनाव सम्पन्न कराने के लिए निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई दी। शर्मा ने कहा कि निर्वाचन से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी जब कठिन परिस्थितियों में चुनाव कराने के लिए कृतसंकल्पित होते हैं, तो हमें भी अपने मत का उपयोग करने के लिए संकल्पित होना चाहिए। इस अवसर पर भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त के संदेश का प्रसारण भी सुना गया।

    राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर प्रमुख लोकायुक्त शर्मा ने मतदाताओं को शपथ दिलाई। उन्होंने मतदाताओं को ’हम भारत के नागरिक, लोकतंत्र में अपनी पूर्ण आस्था रखते हुए यह शपथ लेते हैं कि हम अपने देश की लोकतांत्रिक परम्पराओं की मर्यादा को बनाए रखेंगे तथा स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण निर्वाचन की गरिमा को अक्षुण्ण रखते हुए, निर्भीक होकर धर्म, वर्ग, जाति, समुदाय, भाषा अथवा अन्य किसी भी प्रलोभन से प्रभावित हुए बिना सभी निर्वाचनों में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे’ की शपथ दिलाई।

    प्रमुख लोकायुक्त ने इंदिरा गांधी कृषि महाविद्यालय के प्रेक्षागृह में दीप प्रज्जवलित कर राष्ट्रीय मतदाता दिवस का शुभारंभ किया। इसके पूर्व शर्मा ने यहां आयोजित मतदाता जागरूकता प्रदर्शनी का अवलोकन किया और ई.व्ही.एम. और व्ही.व्ही.पी.ए.टी. मशीन की कार्यप्रणाली से अवगत हुए। शर्मा ने निर्वाचन से जुड़े उत्कृष्ट कार्यो के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरित किए। इस अवसर पर राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त ठाकुर राम सिंह ने कहा कि भारत की लोकतंत्र की खूबियां विश्व में कहीं नहीं मिलता। यहां एक मत पर सरकार गिर जाती है और एक मत पर सरकार बन जाती है। उन्होंने कहा कि मतदान सीधा अधिकार है। मताधिकार से कोई नही रोक सकता। उन्होंने कहा कि मतदाता होना भी पर्याप्त नही है, बल्कि मतदान कैसे करना है इसे भी जानना और समझना जरूरी है। मतदाता जागरूकता प्रदर्शनी के जरिए मतदान प्रक्रिया के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

    इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.एस.के.पाटिल ने वोटर आईडी के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि वोटर आईडी की कीमत और कर्तव्य का निर्वहन अवश्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें मतदाता जागरूकता प्रदर्शनी में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग के संबंध में नयी जानकारी मिली है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी छत्तीसगढ़ रीना बाबा कंगाले ने कहा कि हम लोग आज लोकतंत्र को समर्पित राष्ट्रीय उत्सव की 11वीं जयंती मना रहे हैं। इसकी शुरूआत भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना दिवस पर 2011 से की गई है। इसका उद्देश्य मतदाताओं को सशक्त, सतर्क, सुरक्षित और जागरूक करना है। इस अवसर पर सेवा मतदाता और वायु सेना के जवानों का भी पुष्प गुच्छ से स्वागत किया गया।

    राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर राज्य स्तरीय पुरस्कार भी वितरित किए गए हैं। इसके तहत राज्य के प्रत्येक संभाग से एक-एक ई.आर.ओ. और ए.ई.आर.ओ. को 7500 रूपए नगद पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। प्रत्येक संभाग से एक-एक सहायक प्रोगामर को 6000 रूपए से पुरस्कृत किया गया। वर्ष 2020 में समग्र रूप से निर्वाचन कार्यों के संपादन में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए दुर्ग जिले को 10 हजार रूपए और वर्ष 2020 में स्वीप कार्य के क्रियान्वयन में उत्कृष्ट कार्य के लिए सरगुजा जिले को 10 हजार रूपए से पुरस्कृत किया गया। निर्वाचन में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए उप जिला निर्वाचन अधिकारी गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही और व्याख्याता शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कल्हाड़कट्टा जिला बस्तर को साढ़े सात-सात हजार और सर्वश्रेष्ठ क्रियेटिव स्लोगन तैयार करने के लिए कोरिया जिले के बैकुण्ठपुर तहसील के पटवारी को साढ़े सात हजार रूपए से पुरस्कृत किया गया।  

     

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  • छग के बाल वैज्ञानिकों ने किया राज्य को गौरवान्वित, उत्कृष्ट परियोजनाओं के लिए 15 बाल वैज्ञानिक चयनित

    छग के बाल वैज्ञानिकों ने किया राज्य को गौरवान्वित, उत्कृष्ट परियोजनाओं के लिए 15 बाल वैज्ञानिक चयनित

    रायपुर। छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा 21 से 23 जनवरी 2021 तक राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस का वर्चुअल आयोजन जैव प्रौद्योगिकी अध्ययनशाला, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर में किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार के सहयोग से हुआ। 

    वेबीनार में राज्य शैक्षणिक समन्वयक, राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस द्वारा राज्य स्तर पर चयनित बाल वैज्ञानिकों के नाम की घोषणा की गई। चयनित बाल वैज्ञानिकों में कु. गनीका कुम्भकार, शास.उ.मा.वि.जेवरा सिरसा, जिला-दुर्ग, अर्यान हरलालका, एन.एच.वर्ल्ड स्कूल, रायपुर, श्रृष्टी सोनी, स्वामी आत्मानंद शास. एक्सेलेन्स स्कूल, सरगुजा, कु. संजना यादव,शास.उ.मा.वि. पाउवारा जिला-दुर्ग, श्रुती सोम, लर्नर इंग्लिश मिडियम, बिलासपुर, मुस्कान पांडे, शास.कन्या उ.मा.वि., बस्तर, कन्हैया प्रसाद राजवाडे, शास. उ. मा. वि., रामपुर धर्मेश,डीएवी पब्लिक स्कूल, छाल, रायगढ, लीना यादव, शासकीय आदर्श मिडिल स्कूल, महासमुंद, अनीश सूरी, शास.उ.मा.वि., बुनागांव, कोण्डागांव, सर्वज्ञा सिंह, डीपीएस स्कूल, जामनीपाली, कोरबा, सविता, शास उ. मा. वि., गोकुलपुर. धमतरी, आयुश साहू, शास. बालक उ.मा.वि., रामानुजगंज, सूरजपुर, अकांक्षा साहू, शास.उ.मा.वि., पटौद, कांकेर, विजय कुमार ध्रुव, शास. उ.मा.वि., भखारपारा, नारायणपुर एवं निर्मला यादव, शास.उ.मा.वि. बुनागांव, कोण्डागांव शामिल है। इन बाल वैज्ञानिकों ने छत्तीसगढ़ राज्य को गौरवान्वित किया है।

    राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का वर्ष 2020 एवं 2021 में मुख्य विषय- सतत् जीवन के लिए विज्ञान तथा पांच उप-विषय, जिसमें ‘सतत् जीवन के लिए पारितंत्र’, ‘उचित प्रौद्योगिकी’, सामाजिक नवाचार, निरूपण, विकास एवं मॉडलिंग व पांरपरिक ज्ञान प्राणाली शामिल है। 28वीं राज्य स्तरीय बाल विज्ञान काग्रेस कार्यक्रम के समापन सत्र में कुलपति प्रो. के. एल. वर्मा ने कहा कि बच्चों में वैज्ञानिक रूचि विकसित करने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम को भारत वर्ष में राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, ज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार के तत्वाधान में आयोजित किया जाता है जो काफी सराहनीय है। छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के महानिदेशक मूूदित कुमार सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय बाल विज्ञान कॉंग्रेस बच्चों को एक मंच प्रदान करता है, जहां वे अपनी रचनात्मकता एवं नवाचार सोच के माध्यम से स्थानीय समस्याओं को चिन्हित कर उसका समाधान प्रयोग, आंकड़ा संकलन, शोध-विश्लेषण एवं नवाचारयुक्त प्रक्रिया के माध्यम से परिणाम तक पहुंचने हेतु प्रेरित होते है। उन्होंने जिला समन्वयकों तथा मार्गदर्शक शिक्षकों से अनुरोध किया कि वे बच्चों को अनुसंधान क्षेत्र में अग्रसर होने हेतु प्रेरित करें।

    कार्यक्रम के प्रारंभ में राज्य समन्वयक, राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस, छत्तीसगढ, डी नीमति जे.के. रॉय द्वारा राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस की संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। उन्होंने बताया कि 25 जिलों से कुल 374 परियोजनाएं जिला स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस में प्रस्तुत की गई तथा राज्य स्तर पर 125 परियोजनाओं का वर्चुअल प्रस्तुतीकरण कोविड-19 संक्रमण को ध्यान में रखते हुये डी.एस.टी. द्वारा लिये गये निर्णय अनुसार ऑनलाईन मोड में भारत सरकार तथा राज्य शासन के दिशा-निर्देश में किया।

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  • लघु वनोपज खरीदी में देश में अव्वल है छत्तीसगढ़, देश का 73 फीसद लघु वनोपज छत्तीसगढ़ ने किया क्रय

    लघु वनोपज खरीदी में देश में अव्वल है छत्तीसगढ़, देश का 73 फीसद लघु वनोपज छत्तीसगढ़ ने किया क्रय

    रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में लघु वनोपज की बहुलता और राज्य सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर इसकी खरीदी की बेहतर व्यवस्था के जरिए वनवासियों के दिन बहुरने लगे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बीते दो सालों में वनवासियों एवं लघु वनोपज संग्राहकों के जीवन में तब्दीली लाने के क्रांतिकारी फैसलों ने औने-पौने दाम में बिकने वाले लघु वनोपज को अब मूल्यवान बना दिया है। जिसका सीधा लाभ यहां के वनोपज संग्राहकों को मिलने लगा है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ राज्य आज लघु वनोपज के संग्रहण के मामले में देश का अव्वल राज्य बन गया है। देश का 73 प्रतिशत वनोपज क्रय कर छत्तीसगढ़ राज्य में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। छत्तीसगढ़ देश का एकमात्र राज्य है, जहां 52 प्रकार के लघु वनोपज को समर्थन मूल्य पर क्रय किया जा रहा है। इससे वनवासियों एवं वनोपज संग्राहकों को सीधा लाभ मिल रहा है। 

    छत्तीसगढ़ सरकार ने लघु वनोपजों की खरीदी की व्यवस्था के साथ-साथ अब इनके वैल्यू एडीशन की दिशा में तेजी से पहल शुरू कर दी है। राज्य में वनांचल परियोजना शुरू की गई है। जिसका उद्देश्य वनांचल क्षेत्रों में लघु वनोपज आधारित उद्योगों की स्थापना कर वनवासियों द्वारा संग्रहित किए गए लघु वनोपज का मूल्य संवर्धन कर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

    त्तीसगढ़ सरकार ने लघु वनोपज आधारित उद्योगों के प्रोत्साहन के लिए राज्य की नई उद्योग नीति में कई तरह के छूट एवं आकर्षक पैकेज देने का प्रावधान किया है। जिसके चलते उद्यमी अब वनांचल क्षेत्रों में वनोपज आधारित उद्योग लगाने के लिए आकर्षित होने लगे हैं। अब तक 15 उद्यमियों ने वनांचल क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के वनोपज आधारित उद्योग लगाने के लिए राज्य सरकार को 75 करोड़ रूपए के पूंजी निवेश के प्रस्ताव सहित आवेदन दिया है।

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की विशेष पहल पर वनोपज संग्राहकों को उनकी मेहनत का वाजिब मूल्य दिलाने के लिए लघु वनोपजों के क्रय मूल्य में बढ़ोतरी के साथ-साथ तेंदूपत्ता संग्रहण की दर को 2500 रूपए प्रति मानक बोरा से बढ़ाकर सीधे 4000 रूपए प्रति मानक बोरा किया गया। जिसकी वजह से राज्य के लगभग 12 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को प्रति वर्ष 225 करोड़ रूपए की अतिरिक्त मजदूरी के साथ ही 232 करोड़ रूपए का अतिरिक्त प्रोत्साहन पारिश्रमिक बोनस भी मिला है।

    महुआ के समर्थन मूल्य को 17 रूपए से बढ़ाकर 30 रूपए प्रति किलोग्राम, इमली 25 रूपए के बजाय अब 36 रूपए प्रति किलो, चिरौंजी गुठली 93 रूपए से बढ़ाकर 126 रूपए प्रति किलो की दर से समर्थन मूल्य पर क्रय की जाने लगी है। इसी तरह रंगीनी लाख 130 रूपए प्रति किलो ग्राम से बढ़ाकर रूपए 220 प्रति किलोग्राम, कुसमी लाख 200 प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर अब 300 रूपए प्रति किलोग्राम, शहद 195 रूपए से बढ़ाकर रूपये 225 प्रति किलोग्राम में खरीदा जा रहा है। इसका सीधा लाभ 5 लाख ग्रामीण परिवारों को प्राप्त हुआ। अन्य वनोपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने और खरीदी की व्यवस्था करने से ग्रामीणों को लगभग 300 करोड़ रूपए की अतिरिक्त लाभ होने लगा है।  

     

    वर्तमान में राज्य में संग्रहित वनोपज ही केवल पांच फीसद हिस्से का ही प्रसंस्करण राज्य में होता है। इस स्थिति को बदलने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने वनांचल परियोजना प्रारंभ की गई है, बस्तर जैसे क्षेत्र में वनोपज आधारित उद्योग को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से आकर्षक सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। इस योजना से उत्साहित होकर बस्तर क्षेत्र में 15 उद्यमियों ने लघु वनोपज आधारित उद्योग स्थापित करने हेतु अपनी सहमति दी है। इनके साथ एम.ओ.यू प्रक्रियाधीन है। वनोपज आधारित उद्योगों में इमली, महुआ, टोरा, हर्रा, बहेड़ा, ला, एसेन्सियल आईल, मुनगा, कोदो कुटकी, रागी आग गुठली, काजू, भिलवा आदि के उद्योग लगाये जाएंगे। इन उद्योगों की बस्तर में लगने से यहाँ के ग्रामीणों को न केवल अतिरिक्त रोजगार प्राप्त होगा, बल्कि वनोपज की लगातार मांग बनी रहेगी। वनांचल से प्राप्त होने वाले वनोपज के अलावा इन उद्योगों के स्थापित होने से बस्तर अंचल के कृषक मुनगा, लेमन ग्रास, सतवर, पचौली, वेटीवर, सफेद मूसली, पिपली, अश्वगंधा जैसे जड़ी बूटियों की खेती भी कर सकेंगे। इससे उन्हें अन्य फसलों की तुलना में दुगनी आय प्राप्त होगी। इन फसलों से एसेन्सियल आईल, एरोमेटिक आईल एवं औषधि उत्पाद तैयार होंगे, जिसका देश के बाहर निर्यात की बड़ी संभावनाएं है।

     

     

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  • कण्डोरा स्व-सहायता समूह की महिलाएं कुनकुरी हाईवे पर गुपचुप-चार्ट ठेला लगाकर बनी आत्मनिर्भर

    कण्डोरा स्व-सहायता समूह की महिलाएं कुनकुरी हाईवे पर गुपचुप-चार्ट ठेला लगाकर बनी आत्मनिर्भर

    जशपुरनगर। दूरस्थ अंचल में निवास करने वाली ग्रामीण महिलाएं अब चार्ट-गुपचुप बनाकर विक्रय कर रहीं हैं और अन्य अजीविका अपनाकर भी अपने परिवार को आर्थिक मद्द पंहुचा रही हैं। जशपुर जिले के कुनकुरी विकास खण्ड के ग्राम कण्डोरा की दुर्गा स्व-सहायता समूह की महिला छ.ग. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर हाईवे के किनारे ठेले में चार्ट-गुपचुप, पेठा एवं अन्य खाद्य सामग्री का विक्रय कर रही हैं। हाईवे के किनारे दुकान लगाने के कारण समूह कि महिलाओं को अच्छा मुनाफा हो रहा है। लगभग डेढ़ माह से दुकान संचालित कर रहीं हैं। अन्य खर्च निकालकर समूह को माह में 6000 से 7000 तक का शुद्ध मुनाफा हो रहा है। चार्ट ठेला लगाने वाली समूह की महिलाएं मनप्यारी, ननप्यारी ने बताया कि दुर्गा स्व.सहायता समूह में मिलकर 10 महिलाएं कार्य कर रही हैं और गुपचुप-चार्ट बनाती हैं जिससे उनको अच्छा लाभ मिल रहा है उन्होने बताया कि समूह ने लोन लेकर व्यापार शुरू किया और धीरे-धीरे किशत भी पटा रहें हैं।

    गत् दिवस निरीक्षण के दौरान कलेक्टर महादेव कावरे और जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी के.एस. मण्डावी ने हाईवे किनारे रूक कर दुर्गा स्व सहायता समूह की महिलाओं से व्यापार के संबंध में जानकारी ली और समूह द्वारा बनाए गए पेठे को भी चक कर देखा और उनके बनाए गए पेठे की सरहना करते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

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  • महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों के लिए कुपोषण पर ऑनलाइन संवेदीकरण तकनीकी प्रशिक्षण आयोजित

    महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों के लिए कुपोषण पर ऑनलाइन संवेदीकरण तकनीकी प्रशिक्षण आयोजित

    रायपुर। प्रदेश में कुपोषण स्तर को न्यूनतम स्तर में लाने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में काम कर रहे अधिकारियों के लिए संभाग स्तरीय ऑनलाइन संवेदीकरण प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में अधिकारियों और कर्मचारियों को कुपोषण के कारणों और तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में 20 जनवरी को रायपुर, दुर्ग संभाग और 22 जनवरी को बस्तर, सरगुजा और बिलासपुर संभाग के अधिकारियों को केयर इंडिया के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. श्रीधर द्वारा कुपोषण के तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दोनों सत्रों में विभाग के कुल 1100 जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला बाल विकास अधिकारी, परियोजना अधिकारी और पर्यवेक्षकों को कुपोषण की पहचान, उसके कारण और उसे दूर करने के उपायों की विस्तार से जानकारी दी गई।

    उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 (एन.एफ.एच.एस-4) के अनुसार छत्तीसगढ़ में कुपोषण का स्तर 37.7 और वजन त्यौहार के अनुसार 23.37 है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश में कुपोषण मुक्ति की पहल करते हुए मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की शुरूआत की है। मुख्यमंत्री और महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेंड़िया के निर्देशन में लगातार मैदानी अमले को कुपोषण से संबंधित जानकारियां देकर अपग्रेड किया जा रहा है। 

    प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को बौनापन, दुबलापन व कमभारिता जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए इनके पहचान के तरीके को विस्तार से समझाया गया। प्रशिक्षण के बाद प्रशिक्षणार्थियों के कुपोषण के संबंध में शंका समाधान भी किया गया। डॉ. श्रीधर ने बताया कि बौनापन और दुबलापन दूर करने के लिए 6 माह से 9 माह तक के बच्चों को पूर्ण पूरक पोषण आहार दिया जाना चाहिए। बच्चे के भूखे होने और बीमार होने की स्थिति को अच्छी तरह समझकर उसके अनुसार निर्णय लिया जाना चाहिए, जरूरत पड़ने पर पोषण पुनर्वास केन्द्र की मदद लेनी चाहिए। डॉ. श्रीधर ने अनुवांशिक बौनेपन को कम करने के सवाल पर बताया कि अनुवांशिक बौनापन कम नहीं होता लेकिन सही देखभाल और खानपान से उसमें 30 प्रतिशत तक सुधार लाया जा सकता है। प्रशिक्षण में संचालनालय, राज्यस्तरीय संसाधन केन्द्र, क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान के अधिकारी भी उपस्थित थे।

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  • हस्तशिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष ने चपका स्थित प्रसिद्ध शिव मंदिर का किया अवलोकन

    हस्तशिल्प विकास बोर्ड के अध्यक्ष ने चपका स्थित प्रसिद्ध शिव मंदिर का किया अवलोकन

    रायपुर। हस्तशिल्प विकास बार्ड के अध्यक्ष चंदन कश्यप ने गुुरूवार को जगदलपुर के तीर्थ नगरी के रूप में विख्यात बस्तर विकासखंड के ग्राम चपका स्थित शिव मंदिर का अवलोकन किया है। इस दौरान उन्होंने भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर राज्य की खुशहाली और समृद्धि के लिए प्रार्थना की है। 

    मंदिर समिति और ग्रामीणों की मांग पर मंदिर परिसर में बाउण्ड्रीवाल निर्माण, जलकुण्डों का सौंदर्यीकरण, धर्मशाला भवन एवं स्वागत द्वार का निर्माण, सामुदायिक शौचालय एवं सीसी रोड़ निर्माण आदि निर्माण कार्यों की सौगात दी गई। इसके अलावा तिरथापारा चपका में पेयजल एवं विद्युत संबंधी समस्या का शीघ्र निराकरण तथा मेला स्थल को विकसित करने हेतु 15 फरवरी तक योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए। 

    इस अवसर पर विधायक चंदन कश्यप ने तीर्थ नगरी चपका के महत्व की जानकारी देते हुए इसकी समुचित विकास करने की बात कही। कलेक्टर बंसल ने कहा कि तीर्थ नगरी चपका को पुराने स्वरूप में विकसित करने और इसके समुचित विकास हेतु योजना बना कर कार्य किया जाएगा तथा चपका में पुराने समय की भांति भव्य मेला के आयोजन हेतु मेला स्थल को विकसित करने की भी बात कही। कलेक्टर बंसल ने मौके पर उपस्थित अधिकारियों को इन सभी कार्यों को निर्धारित समयावधि में पूरा करने के निर्देश दिए। इस दौरान डिप्टी कलेक्टर गीता रायस्त, ग्राम पंचायत चपका के सरपंच जोगीराम और मंदिर समिति के पदाधिकारी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित थे।

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  • अवैध शराब कारखाने को पकड़ने वाले अधिकारी-कर्मचारी होंगे पुरस्कृत

    अवैध शराब कारखाने को पकड़ने वाले अधिकारी-कर्मचारी होंगे पुरस्कृत

    रायपुर। आबकारी मंत्री कवासी लखमा के निर्देशन एवं आबकारी सचिव सह आयुक्त निरंजन दास के मार्गदर्शन में बेमेतरा जिले में आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई की गई। प्रबंध संचालक आबकारी ए.पी. त्रिपाठी और रायपुर कलेक्टर डॉ. एस. भारतीदासन के मार्गदर्शन पर 20 जनवरी को आबकारी विभाग द्वारा रायपुर रोड स्थित सांकरा (भूमिया) थाना तिल्दा में रोड चेकिंग के दौरान बिलासपुर से आ रही स्वीफ्ट डिजायर कार सीजी 12 एएन 9211 को रोककर पूछताछ की गई। जांच के दौरान कार से 50 पेटी गोवा व्हिस्की मध्यप्रदेश राज्य में विक्रय हेतु निर्मित 450 बल्क लीटर बरामद की गई। इस कार्रवाई के दौरान आरोपी अविभाष सिंह के विरूद्ध आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) एवं 36 के तहत प्रकरण दर्ज की गई। प्रकरण विवेचना के दौरान आरोपी अविभाष सिंह से कड़ी पूछताछ करने पर आरोपी द्वारा बेमेतरा जिले के नवागढ़ थाना अंतर्गत ग्राम जेवरा के जाट फार्म हाउस में अवैध मदिरा निर्माण का कारखाना संचालित होने की जानकारी दी।

    प्रकरण की विवेचना अधिकारी नीलम किरण सिंह आबकारी उप निरीक्षक द्वारा राज्य स्तरीय उड़न दस्ता को इसकी जानकारी दी गई। जिस पर डी.डी. पटेल आबकारी उप निरीक्षक राज्य स्तरीय उड़न दस्ता के नेतृत्व में जिला रायपुर की टीम तत्काल बेमेतरा रवाना होकर आरोपी द्वारा बताए गए स्थल की जांच की गई। जांच टीम द्वारा उक्त स्थल पर एक अवैध मदिरा निर्माण का कारखाना संचालित था जहां पर मदिरा निर्माण के लिए 4 ड्रम स्प्रिट (760 लीटर ओ.पी.) और मध्यप्रदेश राज्य में विक्रय के लिए लेबल लगी 70 पेटी गोवा व्हीस्की के साथ परिवहन में उपयोग किए जा रहे वाहन एक मिनी ट्रक माजदा को जप्त किया गया। अवैध रूप से संचालित इस कारखाने की जांच के दौरान आरोपी अनिल वर्मा और कुलेश्वर वैष्णव के विरूद्ध आबकारी अधिनियम की धारा 34(1)(क), 34(2) एवं 59(क) के तहत प्रकरण दर्ज कर आरोपियों को जेल भेजकर प्रकरण विवेचना में लिया गया। जांच टीम द्वारा अवैध मदिरा निर्माण परिवहन एवं विक्रय की उक्त घटना के विरूद्ध कायम किए गए प्रकरण में शामिल अन्य लोगों की पतासाजी की जा रही है। विवेचना उपरांत प्रकरण में शामिल सभी आरोपियों के विरूद्ध भी सह-अपराधी होने का आपराधिक प्रकरण दर्ज कर विधिवत कार्यवाही की जाएगी।

    आबकारी आयुक्त द्वारा प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए घटना स्थल क्षेत्र के प्रभारी अधिकारी उप निरीक्षक जलेश कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनका मुख्यालय आबकारी आयुक्त कार्यालय रायपुर नियुक्त किया गया है। जांच टीम की इस कार्रवाई में 17 लाख रूपए मूल्य की जप्त मदिरा और 15 लाख रूपए की कीमत की 2 नग चार पहिया वाहन बरामद की गई। आबकारी विभाग द्वारा नवागढ़ में संचालित अवैध फैक्ट्री एवं जमीन को राजसात करने की योजना बनाई जा रही है।

    प्रकरण में त्वरित कार्रवाई करने के लिए आबकारी उप निरीक्षक नीलम किरण सिंह, पंकज कुजूर, अनिल मित्तल, डी.डी. पटेल तथा आबकारी मुख्य आरक्षक विक्रम सिंह, लखन लाल ओसले, संतोष दुबे सहित आबकारी आरक्षक विजय वर्मा को प्रशस्ति पत्र देकर पुरस्कृत किया जाएगा।

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  • वाद्य यंत्रों पर आधारित छतीसगढ़ राज्य की झांकी को राष्ट्रीय मीडिया की मिली सराहना

    वाद्य यंत्रों पर आधारित छतीसगढ़ राज्य की झांकी को राष्ट्रीय मीडिया की मिली सराहना

    रायपुर। गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर निकलने वाली राज्यों की झांकियों का आज नई दिल्ली की राष्ट्रीय रंगशाला में प्रेस प्रीव्यू आयोजित किया गया। प्रेस प्रीव्यू के दौरान छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में प्रयुक्त होने वाले लोक वाद्यों पर आधारित झांकी को राष्ट्रीय मीडिया के सामने प्रस्तुत किया गया। इस दौरान छत्तीसगढ़ की झांकी के समक्ष छत्तीसगढ़ के लोक कलाकारों ने मांदरी नृत्य का प्रदर्शन किया।
    गणतंत्र दिवस पर इस बार नई दिल्ली के राजपथ पर छत्तीसगढ़ के लोक संगीत का वाद्य वैभव दिखेगा। छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में प्रयुक्त होने वाले लोक वाद्यों को उनके सांस्कृतिक परिवेश के साथ प्रदर्शित किया जा रहा है। राज्य शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा तैयार की जा रही इस झांकी में छत्तीसगढ़ के दक्षिण में स्थित बस्तर से लेकर उत्तर में स्थित सरगुजा तक विभिन्न अवसरों पर प्रयुक्त होने वाले लोक वाद्य शामिल किए गए हैं। इनके माध्यम से छत्तीसगढ़ के स्थानीय तीज त्योहारों तथा रीति रिवाजों में निहित सांस्कृतिक मूल्यों को भी रेखांकित किया गया है।

    झांकी के ठीक सामने वाले हिस्से में एक जनजाति महिला बैठी है जो बस्तर का प्रसिद्ध लोक वाद्य धनकुल बजा रही है। धनकुल वाद्य यंत्र, धनुष, सूप और मटके से बना होता है। जगार गीतों में इसे बजाया जाता है। झांकी के मध्य भाग में तुरही है। ये फूँक कर बजाया जाने वाला वाद्य यंत्र है, इसे मांगलिक कार्यों के दौरान बजाया जाता है। तुरही के ऊपर गौर नृत्य प्रस्तुत करते जनजाति हैं। झांकी के अंत में माँदर बजाता हुआ युवक है। झांकी में इनके अलावा अलगोजा, खंजेरी, नगाड़ा, टासक, बांस बाजा, नकदेवन, बाना, चिकारा, टुड़बुड़ी, डांहक, मिरदिन, मांडिया ढोल, गुजरी, सिंहबाजा या लोहाटी, टमरिया, घसिया ढोल, तम्बुरा को शामिल किया गया है।

     

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  • धान को नमी, बारिश और चूहों से बचा रहे संग्रहण केंद्र में पक्के चबूतरे, मनरेगा अभिसरण से बने चबूतरे

    धान को नमी, बारिश और चूहों से बचा रहे संग्रहण केंद्र में पक्के चबूतरे, मनरेगा अभिसरण से बने चबूतरे

    रायपुर। मनरेगा के अभिसरण से धान संग्रहण केंद्रों में बनाए गए पक्के चबूतरे इस साल धान को नमी, बारिश और चूहों से बचा रहे हैं। कोरिया जिले के दूरस्थ विकासखण्ड भरतपुर के गाँव कंजिया में भी मनरेगा और 14वें वित्त आयोग की राशि के अभिसरण से संग्रहण केंद्र में पक्के चबूतरे बनाए गए हैं। इन चबूतरों ने सरकार द्वारा समर्थन मूल्य में उपार्जित धान की सुरक्षा को लेकर ग्राम पंचायत और सहकारी समिति के प्रबंधकों के माथे से चिंता की लकीरें खत्म कर दी हैं। वहीं दूसरी ओर अपना धान बेच चुके किसान भी अब पूरी तरह से निश्चिंत हैं कि स्थानीय सहकारी समिति द्वारा खरीदा गया उनका धान बेमौसम होने वाली बारिश, नमी तथा चूहों व कीड़ों के प्रकोप से सुरक्षित है।

    मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के अभिसरण तथा ग्राम पंचायत और सहकारी समिति के संयुक्त प्रयास से यह संभव हो सका है। मनरेगा से स्वीकृत सात लाख 38 हजार रूपए और 14वें वित्त आयोग के 50 हजार रूपए के अभिसरण से कंजिया धान संग्रहण केंद्र में चार पक्के चबूतरों का निर्माण किया गया है। स्थानीय पंचायत एवं समिति को इससे जहां धान को सुरक्षित रखने में सहजता हो रही है, वहीं किसान भी अब खुश हैं। वनांचल भरतपुर की ग्राम पंचायत कंजिया की सरपंच विपुलता सिंह कहती हैं कि संग्रहण केन्द्र में चबूतरों के निर्माण से धान को सुरक्षित रखने में बड़ी मदद मिल रही है। इनके निर्माण के कुछ ही महीनों में उपार्जित धान के सुरक्षित रखरखाव से पक्के चबूतरों की उपयोगिता और सार्थकता दिख रही है। कंजिया में 18 जनवरी 2021 तक किसानों से उपार्जित 15 हजार 106 क्विंटल धान आ चुका है, जिसे इन चबूतरों के ऊपर सुरक्षित रखा गया है।

    आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित गढ़वार (कंजिया) के सहायक प्रबंधक विक्रम सिंह बताते हैं कि इस सहकारी समिति से आसपास के 30 गाँव जुड़े हुए थे। इस साल एक और उपकेन्द्र कुंवारपुर में खुल जाने से कंजिया में लगभग 21 हजार क्विंटल धान की खरीदी का अनुमान है। उन्होंने बताया कि पूर्व के वर्षों में यहाँ सुरक्षित भंडारण की सुविधा नहीं होने से उठाव होने तक हर साल लगभग 150 से 200 क्विंटल धान खराब हो जाता था। इसका सीधा नुकसान सहकारी साख समिति प्रबंधन और समिति से जुड़े किसानों को होता था। परंतु अब पक्के चबूतरे बन जाने से यह समस्या समाप्त हो गई है।

    सिंह ने बताया कि हाल ही में अभी नए साल की शुरुआत में बेमौसम बारिश हुई थी। परंतु इस बार धान को सुरक्षित रखने में कोई परेशानी नहीं हुई। धान संग्रहण चबूतरों के बन जाने से अब किसानों के द्वारा दिन-रात की मेहनत से उपजाई गई पूँजी 'धान' को ज्यादा अच्छे से रखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि इन चबूतरों के निर्माण के समय गांव के 49 मनरेगा श्रमिकों को 393 मानव दिवस का सीधा रोजगार भी प्राप्त हुआ था।

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  • अत्यंत हर्ष की बात है कि अब विदेश में भी चखा जाएगा छत्तीसगढ़ का स्वाद : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

    अत्यंत हर्ष की बात है कि अब विदेश में भी चखा जाएगा छत्तीसगढ़ का स्वाद : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

    रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज अपने निवास से छत्तीसगढ़ के खाद्य प्रोसेसिंग उद्योग गोयल ग्रुप द्वारा निर्मित फ्रोजन फूड प्रोडक्ट ‘‘गोल्ड‘‘ की विदेश में जाने वाली पहली कन्साइनमेंट को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है। 

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष की बात है कि छत्तीसगढ़ का स्वाद अब विदेश में भी चखा जाएगा। राज्य के बाहर देश-विदेश में भी छत्तीसगढ़ की माटी की सौंधी महक और स्वाद का जादू और अधिक छाएगा। उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत ठीक छः महीने पूर्व कोरोना संकटकाल में हुई थी और इतने कम समय में एक नया उत्पाद छत्तीसगढ़ से देश के बाहर न्यूजीलैंड भेजा जा रहा है, मैं इसके लिए गोयल ग्रुप ऑफ कंपनी को बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूँ। इससे छत्तीसगढ़ का नाम देश और विदेश में और अधिक रौशन होगा, यह हमारे लिए गर्व की बात है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कम्पनी के चेयरमैन सुरेश गोयल सहित ग्रुप से जुड़े सभी लोगों को बधाई और शुभकामनाएं दी।

    गोयल समूह के मैनेजिंग डायरेक्टर राजेन्द्र गोयल ने बताया कि मुख्यमंत्री बघेल के हाथों 9 जून को छत्तीसगढ़ की पहली फ्रोजन फूड इकाई का शुभारंभ किया गया। कोरोना संकट के दौर में प्रारंभ हुए इस इकाई ने हजारों लोगों को रोजगार दिया है, जिसमें लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं हैं। उन्होंने बताया कि बहुत जल्द छत्तीसगढ़ की माटी की महक लिए गोल्ड की यह फ्रोजन फूड रेंज अमेरिका, कैनेडा, मालदीव, रशिया, मॉरिशस समेत मिडिल ईस्ट के बाजारों में भी अपनी पहचान बनाएगा। इस उत्पाद को FSSAI, USFDA, HALAL, FSSC 20-2000, BRCGS जैसे राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों से लायसेंस प्राप्त होने के साथ ही फूड ऑडिट, क्वालिटी और सेफ्टी स्टैंडर्ड को भी ए-ग्रेड मिला है। इस अवसर पर गोयल समूह के चेयरमैन सुरेश गोयल, मैनेजिंग डायरेक्टर राजेन्द्र गोयल,बजरंग एलियांज लिमिटेड के डायरेक्टर अर्चित गोयल भी उपस्थित थे।

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  • किसान महादेव ने शासकीय योजना का लाभ लेकर किया आधुनिक कृषि

    किसान महादेव ने शासकीय योजना का लाभ लेकर किया आधुनिक कृषि

    जगदलपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कृषकों के कल्याण हेतु विभिन्न शासकीय योजनाओं का क्रियानयन किया जा रहा है। कृषक इन योजनाओं का लाभ लेकर आधुनिक कृषि कर आर्थिक लाभ ले रहे हैं। बस्तर जिले के विकासखण्ड बस्तर के ग्राम भैसगांव के कृषक महादेव द्वारा विगत 10 वर्षों से परम्परागत वर्षा आधारित खेती कर रहे थे। कृषक महादेव द्वारा कृषि विभाग के मैदानी अधिकारियों से सतत् संपर्क कर समय-समय पर दिए गए तकनीकी सलाहों का पालन कर वैज्ञानिक पद्धति से खेती कर अधिक फसल उत्पादन लिया जा रहा है। जिससे न्यूनतम कास्त लागत में अधिकतम लाभ प्राप्त हो रहा है। महादेव द्वारा विभाग में संचालित किसान समृद्धि योजनान्तर्गत अनुदान पर नलकूप खनन करवाया है। कृषक द्वारा खरीफ वर्ष 2019 में खरीफ में एकड़ क्षेत्रफल में धान की खेती की गई, जिससे उनकों एक लाख 20 हजार रूपए का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ था एवं खरीफ वर्ष 2020 में कृषक द्वारा कतार पद्धति से धान लगाया, जिससे एक लाख 80 हजार रूपए का शुद्ध आय प्राप्त हुआ। वर्तमान रबी मौसम में कृषक द्वारा 2 एकड में मटर, गोभी एवं अन्य फसल की कास्त ली जा रही है। जिससे अतिरिक्त आय की प्राप्ति हो रही है।

    इसके अलावा महादेव ने गोधन न्याय योजना के तहत् 20 क्विंटल गोबर विक्रय कर 4 हजार रूपए अतिरिक्त आय अर्जन किया है। पूर्व गोबर का उपयोग गोबर खाद बनाने एवं कण्डे निर्माण कर जलाऊ के रूप में उपयोग किया करते थे। गोधन न्याय योजना से प्राप्त राशि का उपयोग कृषि कार्य हेतु किया गया। महादेव द्वारा द्विफसलीय कृषि पद्धति को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर क्षेत्र के अन्य कृषकों को भी प्रोत्साहित कर इस दिशा में संभव प्रयास जारी है।

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  • राजधानी के अंग्रेजी वाइन शॉप में मिली महाराष्ट्र की बीयर बोतलें, बड़े स्तर पर अवैध कारोबार की आशंका

    राजधानी के अंग्रेजी वाइन शॉप में मिली महाराष्ट्र की बीयर बोतलें, बड़े स्तर पर अवैध कारोबार की आशंका

    राजधानी के वाइन शॉप में मंगलवार को दूसरे राज्यों की बीयर बेचे जाने का भंडाफोड़ हुआ है। रेलवे स्टेशन के पास स्थित अंग्रेजी वाइन शॉप में महाराष्ट्र की कई बीयर बोतलें मिली हैं जिसके बाद बड़े स्तर पर अवैध कारोबार की आशंका है। दूसरे राज्य की बीयर बेचने कर्मचारियों ने बारकोड तक स्कैन करते हुए स्टॉक खपा दिया है। महाराष्ट्र के स्टॉक को लेकर आबकारी अफसरों की तरफ से फिलहाल कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है।

    दबी जुबान से ब्रेवरेज की तरफ से गड़बड़ी के चलते चूक होने से स्टॉक वाइन शॉप तक पहुंचने के दावे जरूर किए जा रहे हैं। दुकान में पहुंचने वाले स्टॉक का फिलहाल मिलान नहीं हो सका है। करीबी सूत्र के मुताबिक दो दिन पहले ही वाइन शॉप में स्टॉक पहुंचा था। महाराष्ट्र में बिकने वाली बीयर की बातलें इसी स्टॉक से निकल रही हैं। बीयर की बोतल पर छपे रैपर के मुताबिक शराब का उत्पादन औरंगाबाद में किया गया है।

    बोतल में साफतौर पर सेल फाॅर महाराष्ट्र लिखा हुआ है। दुकान में बारकोड स्कैन होने के मामले में कर्मचारी भी कुछ नहीं कह रहे हैं। महाराष्ट्र सेल की बीयर बोतलों के बारकाेड रायपुर में चल रहे हैं। यह भी एक बड़ी गड़बड़ी का उदाहरण है। कुछ करीबी सूत्र का कहना है कि दूसरे राज्यों की बोतलें खपाने के लिए सिर्फ बीयर ही नहीं है बल्कि शराब का स्टाॅक भी पहुंच रहा है।

    कटोरा तालाब में भी दबिश

    तीन दिन पहले कटोरा तालाब स्थित अंग्रेजी प्राइम शॉप में भी आबकारी की टीम ने दबिश देकर पड़ताल की। इस बात का हल्ला है कि यहां के काउंटर में हरियाणा ब्रांड की बोतलें बेची गई जिसकी खबर मिलने पर अफसरों ने दबिश दी थी। हरियाणा की बोतलें तो नहीं मिलीं लेकिन दूसरी जगह से बिक्री के लिए लाया गया स्टॉक जरूर मिला। अंग्रेजी वाइन की बोतलें बरामद होने के बाद अफसरों ने केस बनाने की बात कही।

    छह पेटियों में सामने आई गड़बड़ियां

    बीयर की छह पेटियों में गड़बड़ियां बाहर आई हैं। इसमें से निकलने वाली बोतलें महाराष्ट्र में ही बिकने के लिए तैयार की गई थीं। आबकारी अफसरों का कहना है कि स्टॉक टेकिंग के दौरान इस तरह की गड़बड़ी हो सकती है लेकिन भारी-भरकम मात्रा में महाराष्ट्र का स्टॉक बिना किसी जांच के दुकान में आने की स्थिति ही कई तरह के सवाल खड़े कर रही है। प्लेसमेंट की ओर से स्टॉक लाने के दौरान उसकी जांच कराई जाती है। परमिट और आमद जांच के लिए पूरा सिस्टम बना हुआ है।

    कंपनी-अफसर सकते में

    महाराष्ट्र की बीयर बोतलों के साथ दुकान में मध्यप्रदेश ब्रांड की शराब बेचे जाने का भी हल्ला है। इस तरह की खबरें बाहर आने के बाद प्लेसमेंट कंपनी और आबकारी अफसर सकते में हैं। मीडिया के सवालों पर कोई जवाब नहीं मिल सका है। 200 रुपए कीमत की बीयर की बोतलें खजुराहो कंपनी की हैं। आगे की जांच में बड़ा खुलासा हो सकता है।

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