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छत्तीसगढ़

  • सुरक्षाबलों ने किया नक्सलियों के कैंप को ध्वस्त, जंगल की आड़ में भागे नक्सली

    सुरक्षाबलों ने किया नक्सलियों के कैंप को ध्वस्त, जंगल की आड़ में भागे नक्सली

    सुकमा। सुरक्षाबलों ने फिर नक्सलियों के कैंप को ध्वस्त कर दिया है। नक्सलियों को जवानों के आने की सूचना मिलने पर नक्सली कैंप छोड़कर भाग निकले थे। जिसके बाद जवानों ने नक्सलियों का पीछा भी किया। जवानों ने मौके से आईईडी स्विच, नक्सलियों की वर्दी सहित अन्य सामान बरामद किया गया है। पुलिस ने नक्सलियों का पीछा किया, लेकिन जंगल-झाड़ी का फायदा उठाकर नक्सली वहां से भागने में कामयाब हो गए।

    आपको बता दें की पुलिस के मुताबिक भेजी और कोंटा थाना क्षेत्र के जंगलों में नक्सलियों के होने की सूचना मिली थी। इसके बाद 8 अगस्त को डीआरजी और एसटीएफ की संयुक्त टीम को सर्चिंग के लिए रवाना किया गया। ये जवान ग्राम जिनेतोंगे, गोमपाड़ और आसपास के जंगलों में रवाना हुए थे। अगले दिन 9 अगस्त की सुबह सर्चिंग के दौरान गोमपाड़ के जंगलों में पहुंच गए। जंगलों में जवान आगे बढ़ रहे थे कि इस दौरान नक्सलियों के मुखबिरों ने उनको सूचना दे दी।

    इस अभियान के दौरान रविवार को सुबह पुलिस पार्टी ग्राम गोमपाड़ के जंगलों की सचिंग करते हुए आगे बढ़ रहे थे, तभी जंगल में मौजूद संत्रियों ने नक्सलियों को अलर्ट कर दिया, जिसके बाद मौके से सभी नक्सली भागने लगे। ऐसे में जवानों के पहुंचने से पहले ही नक्सली कैंप छोड़कर जंगल का फायदा उठाकर भाग निकले। मौके से जवानों ने नक्सली टेंट, 6 पिठ्‌ठू, दो नक्सली वर्दी, एक जर्किन, आईईडी स्विच, साहित्य सहित अन्य सामान बरामद किया है।

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  • वनाधिकार पत्र मिलने से वनांचल के कई परिवारों की संवरी जिंदगी, 11552 हितग्राहियों के आय का बना जरिया

    वनाधिकार पत्र मिलने से वनांचल के कई परिवारों की संवरी जिंदगी, 11552 हितग्राहियों के आय का बना जरिया

    जगदलपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाले छत्तीसगढ़ सरकार के जनहितैषी निर्णय के फलस्वरूप वनभूमि में वर्षों से काबिज लोगों को वनाधिकार पत्र मिलने से बस्तर जिले के अनेक गरीब परिवारों की जिंदगी संवर गई है। राज्य शासन की इस संवेदनशील निर्णय के कारण लंबे समय तक इस भूमि में काबिज होकर माटी महातारी सेवा कर अपने कुटूम्ब का भरण-पोषण कर रहे भूमि पुत्रों को आखिरकार जंगल जमीन का मालिकाना हक मिल ही गया है। जिससे वन भूमि के स्वामित्व को लेकर उनकी चिंता दूर हुई है, अब वे निश्चिंत होकर अपनी मेहनत से इस जमीन में सोना उगा रहे हैं। 

    इस योजना के फलस्वरूप बस्तर जिले के तोकापाल अनुविभाग के कुल 11 हजार 552 हितग्राहियों को वनाधिकार पत्र मिलने से यह जमीन उनके परिवार के लिए खुशहाल जीवन एवं अतिरिक्त आय का जरिया बन गया है। तोकापाल राजस्व अनुविभाग के अन्तर्गत तहसील तोकापाल में व्यक्तिगत वनाधिकार पत्र के अन्तर्गत 2 हजार 719 एवं सामुदायिक वनाधिकार पत्र के अन्तर्गत 623 सहित विकासखण्ड में कुल 3 हजार 342 हितग्राहियों को वनाधिकार पत्र वितरित किया गया है। दरभा विकासखण्ड में व्यक्तिगत वनाधिकार पत्र के अन्तर्गत 6 हजार 763 तथा सामुदायिक वनाधिकार पत्र के अनतर्गत 434 सहित कुल 7 हजार 197 हितग्राहियों को वनाधिकार पत्र वितरित किया गया है। इसी तरह बास्तानार विकासखण्ड में व्यक्तिगत वनाधिकार पत्र के अन्तर्गत 734 एवं सामुदायिक वनाधिकार पत्र के अन्तर्गत 279 सहित विकासखण्ड में कुल 1 हजार 013 हितग्राहियों को वनाधिकार पत्र वितरित किया गया है। इस तरह से शासन के इस निर्णय के फलस्वरूप तोकापाल राजस्व अनुविभाग में कुल 11 हजार 552 हितग्राहियों को इस योजना से लाभान्वित हुए हैं।

    छत्तीसगढ़ सरकार के इस निर्णय की सराहना करते हुए इस योजना से लाभान्वित हितग्राहियों ने इसे किसान, मजदूर एवं जन हितैषी कदम बताया है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाले छत्तीसगढ़ सरकार को हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया है। राज्य शासन के निर्णय के फलस्वरूप वनाधिकार पत्र मिलने से प्रसन्नचित जिले के तोकापाल विकासखण्ड के ग्राम माड़वा के आदिवासी किसान गागरा, पूरन एवं रामसिंह ने कहा कि उन्हें इस जंगल जमीन का मालिकाना हक मिलने से उनके परिवार का वर्षों पूराना सपना साकार हुआ है। उन्होंने कहा कि इस जमीन के माध्यम से उन्हें सुखमय जीवन का सहारा मिल गया है। तोकापाल विकासखण्ड के ग्राम कंरजी के आदिवासी किसान त्रिलोचन ने कहा कि उनके परिवार के लिए वर्षों से काबिज इस जंगल जमीन का पट्टा मिलने से उसके परिवार की सबसे बड़ी चिंता दूर हुई है। तोकापाल विकासखण्ड के ग्राम कंरजी के आदिवासी महिला निरबत्ती ने कहा कि उनके लिए यह जंगल जमीन हर तरह से फायदेमंद है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने हम जैसे अनेक जरूरतमंद लोगों को इस जमीन का मालिकाना हक देकर सहारा प्रदान किया है।

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  • राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार राज्य में अब तक 666.7 मिमी औसत वर्षा दर्ज

    राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार राज्य में अब तक 666.7 मिमी औसत वर्षा दर्ज

    रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा बनाए गए राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष द्वारा संकलित जानकारी के अनुसार एक जून से अब तक राज्य में 666.7 मिमी औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है।

    राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष द्वारा संकलित जानकारी के अनुसार आज अगस्त को सवेरे रिकार्ड की गई वर्षा की जानकारी के अनुसार सरगुजा में 26.4 मिमी, सूरजपुर में 19.9  मिमी., बलरामपुर में 20.0 मिमी, जशपुर में 26.9  मिमी तथा कोरिया में  4.4 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई है। रायपुर में 3.7 मिमी, बलौदाबाजार में 1.7 मिमी, गरियाबंद में 12.0 मिमी, महासमुन्द में 1.6 मिमी, धमतरी में 95.1 मिमी,मुंगेली में 0.8 मिमी, रायगढ़ में 1.4 मिमी तथा कोरबा में 12.2 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई। इसी तरह गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही में 6.0 मिमी, दुर्ग में4.7 मिमी, कबीरधाम में 8.4 मिमी, राजनांदगांव में 28.1. मिमी, बालोद में 92.4 मिमी, बेमेतरा में 3.2 मिमी, बस्तर में 7.6 मिमी, कोण्डागांव में 16.7 मिमी, कांकेर में 31.6 मिमी, नारायणपुर में15.6  मिमी, दंतेवाड़ा में 23.3 मिमी, सुकमा में 33.4 मिमी तथा बीजापुर में, 92.5 मिमी औसत वर्षा आज रिकार्ड की गई है।

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  • मंत्री गुरु रूद्रकुमार की विशेष पहल, 42 लाख परिवारों को मिलेगा मुफ्त नल कनेक्शन

    मंत्री गुरु रूद्रकुमार की विशेष पहल, 42 लाख परिवारों को मिलेगा मुफ्त नल कनेक्शन

    रायपुर। राज्य सरकार की मंशानुरूप ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर पेयजल व्यवस्था करने की दिशा में तेजी से कार्य किए जा रहे हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री गुरु रूद्रकुमार की विशेष पहल पर अब जल जीवन मिशन के कार्य नए अनुबंध दर पर किए जाएंगे। मंत्री गुरु रुद्रकुमार ने कहा कि राज्य में हर घर में नल से जल मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य शासन की महत्वाकांक्षी मिनीमाता अमृत धारा नलजल योजना के तहत प्रदेश के सभी 42 लाख परिवार को निःशुल्क नल कनेक्शन उपलब्ध होगा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव की अध्यक्षता में बीते दिनों राज्य स्तरीय निविदा एवं क्रय समिति और वित्त विभाग के प्रतिनिधि की उपस्थिति में बैठक आयोजित हुई। जिसमें रुचि की अभिव्यक्ति के माध्यम से प्राप्त न्यूनतम दरों को औचित्य प्रतिपादित कर स्वीकृति की अनुशंसा की है।

    बता दें की मंत्री गुरु रुद्रकुमार ने बताया कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण पेयजल योजनाओं के लिए दर अनुबंध करने की कार्रवाई पूर्ण की गई है। इसके अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 9485.60 करोड़ रुपए की लागत से उच्च स्तरीय जलागार निर्माण, पाइपलाइन विस्तार कार्य, सिविल वर्क, घरेलू कनेक्शन, क्लोरिनेटर स्थापना एवं पावर पंप स्थापना के कार्य किए जाएंगे और इसके लिए राज्य में पहली बार मंत्रिमंडल के अनुमोदन उपरांत निविदाकारों से रुचि की अभिव्यक्ति के माध्यम से दरें प्राप्त कर औचित्य दर प्रतिपादित की गई है। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले पेयजल प्रदाय कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने में जहाँ मदद मिलेगी, वहीं यह पहल राज्य के अनुसूचित जाति-जनजाति बाहुल्य एवं वनांचल क्षेत्रों के सर्वहारा वर्ग को घरेलू कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल प्रदाय करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

    उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सभी विभागों को निर्माण कार्यों के लिए नए एसओआर लागू करने के निर्देश दिए हैं। जिसके परिपालन में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने सर्वप्रथम राज्य में अपना नया यूएसओआर-2020 जारी कर निर्माण-संधारण संबंधी कार्य में एसओआर लागू करने में अग्रणी रहा है।

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  • 400 से अधिक प्रवासी श्रमिकों को मिला स्थानीय उद्योगों में रोजगार, 48 अलग-अलग नौकरियां उपलब्ध

    400 से अधिक प्रवासी श्रमिकों को मिला स्थानीय उद्योगों में रोजगार, 48 अलग-अलग नौकरियां उपलब्ध

    रायगढ़। रायगढ़ जिले के 400 से अधिक प्रवासी श्रमिकों को रायगढ़ जिले में संचालित 48 अलग-अलग उद्योगों में नौकरियां उपलब्ध हुई है। जिले के श्रमिक अधिक संख्या में रोजगार के लिए देश के अन्य राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब तथा दक्षिणी राज्यों में कार्यरत थे। कोरोना महामारी के संक्रमण के दौरान प्रवासी श्रमिक अपने गृह जिले लौटकर वापस आ गए है। राज्य शासन के निर्देशानुसार इन श्रमिकों को क्वारंटीन सेंटरों में रखते हुए रोजगार तथा श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों के अन्य राज्यों में किए गए कार्य अनुभव के आधार पर स्किल मेपिंग कर पूर्ण डाटा तैयार किया गया।

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा सभी प्रवासी श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए गए थे। इसी भावना के अनुरूप कलेक्टर भीम सिंह द्वारा प्रवासी श्रमिकों को जिले के उद्योगों में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए उद्योग, श्रम, रोजगार एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने स्वयं जिले के उद्योग प्रबंधकों के साथ सतत् रूप से बैठकें आयोजित कर स्थानीय प्रवासी श्रमिकों को उद्योगों में रोजगार दिलाने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर सिंह के निर्देश पर जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रवासी श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए जिले के विभिन्न स्थानों पर रोजगार कैंप आयोजित किया गया। इन निरंतर प्रयासों से 400 से अधिक प्रवासी श्रमिकों को स्थानीय उद्योगों में इंजीनियर, लेबर, टेपिंग, मेकेनिकल, वेल्डर, फीटर, राजमिस्त्री, टे्रनी एसएमएस, पंप फिल्टर, हेल्पर, साइट इंचार्ज, वाहन चालक, इलेक्ट्रीशियन, सुपरवाइजर, लैब ब्वाय, गार्ड, केमिस्ट, स्टोर कीपर, हाऊस कीपिंग, सिक्युरिटी गार्ड, टे्रलर ड्राईवर, मिस्त्री, टेक्नीशियन, कार्यालय सहायक, बोरवेल लेबर, मशीन आपरेटर, गैलेन आपरेटर, कुक, बढ़ई, धोबी, डिलीवरी ब्वाय तथा प्यून के पदों पर नियुक्ति प्राप्त हुई है। शेष प्रवासी श्रमिकों को भी अकुशल श्रमिक के तौर पर रोजगार उपलब्ध कराने हेतु उद्योग प्रबंधकों को निर्देशित किया गया है। उन्होंने सभी उद्योग प्रबंधकों को अपने प्लांट में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए स्थानीय प्रवासी श्रमिकों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।

    उद्योग प्रबंधकों द्वारा कलेक्टर सिंह को आश्वासन दिया गया है, कि उनका सदैव प्रयास रहेगा कि स्थानीय व्यक्तियों को नौकरी में रखें क्योंकि बाहर से आने वाले श्रमिकों के लिए उद्योग प्रबंधन को आवास, भोजन इत्यादि के लिए पृथक से व्यवस्था करना पड़ता है। जबकि स्थानीय व्यक्ति के नौकरी करने से इन सब व्यवस्थाओं की आवश्यकता नहीं रहेगी। श्रमिक अपने घरों से आना-जाना कर सकता है। 

    कलेक्टर सिंह ने बताया कि शेष बचे श्रमिकों को भी रोजगार उपलब्ध कराने के प्रयास जारी है और जिन व्यक्तियों को उद्योगों में रोजगार नहीं प्राप्त होगा, उन्हें शासकीय निर्माण कार्यों से जुड़े विभाग पीडब्ल्यूडी, जल संसाधन और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के निर्माण संबंधी कार्यों में रोजगार प्रदान किया जायेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित रोजगार गारंटी योजना में भी कार्य करने के इच्छुक श्रमिकों के जॉब कार्ड बना लिए गए है। उन्हें रोजगार गारंटी योजना के कार्यों में रोजगार उपलब्ध कराया जायेगा।

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  • आदिवासियों के न्याय के लिए प्रतिबद्ध भूपेश सरकार

    आदिवासियों के न्याय के लिए प्रतिबद्ध भूपेश सरकार

    रायपुर। आदिवासी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि करना अत्यन्त दुष्कर कार्य हैं। आदिवासी क्षेत्रों में अधिकांश भू-भाग पर घने वन स्थित हैं। कृषि योग्य भूमि की कमी हैं, सिंचाई साधन अत्यन्त कम हैं, परंपरागत ढंग से कृषि होती हैं तथा मिट्टी की गुणवत्ता निम्न स्तर की होने से कृषि पिछड़ी अवस्था में हैं। इन क्षेत्रों में बी.पी.एल. आबादी 50 प्रतिशत से अधिक हैं। लोगों की क्रय शक्ति कम होने के कारण व्यापार एवं उद्योग संबंधी गतिविधियां अत्यन्त सीमित हैं। 1980 में वन संरक्षण अधिनियम के प्रभावशील होने के बाद इससे वनों की अंधाधुंध कटाई पर रोक तो लगी किंतु इससे वन क्षेत्रों के विकास में बाधा भी उत्पन्न हुई है। आज भी वस्तुस्थिति यह हैं कि अभी भी जनजातीय क्षेत्रों में गरीबी, कुपोषण, अशिक्षा एवं स्वास्थ्य सूचकांक मैदानी जिलों की तुलना में निम्न स्थान पर हैं। 

    सरकारों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती रही हैं कि किस तरह आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आय में वृद्धि की जाएं, उन्हे भी जीवन की मूलभूत सुविधाएं प्राप्त हो सके तथा वे अभावों से मुक्ति प्राप्त कर सकें। वर्ष 2013 में केन्द्र सरकार द्वारा कृषि उत्पादों की तरह ही 12 लघु वनोपजों के संग्रहण का निर्णय लिया गया। किन्तु छत्तीसगढ़ राज्य सहित अन्य राज्यों में भी लघु वनोपजों के संग्रहण में गंभीरता नहीं दिखाई गई। जिसके कारण आदिवासी लघु वनोपजों को बिचौलियों एवं व्यापारियों को औने-पौने मूल्य पर बेचने को विवश हुए। उनका शोषण बदस्तूर जारी रहा और उनकी आय वृद्धि का एक महत्वपूर्ण उपाय अर्थहीन सिद्ध हो गया।

    2011 की जनगणना के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य में आदिवासियों की जनसंख्या 78 लाख (कुल जनसंख्या का 32 प्रतिशत) हैं। राज्य के आदिवासियों की दशा देश के अन्य जनजातिय क्षेत्रों की तुलना में अपेक्षाकृत निम्न है, क्योंकि अन्य प्राकृतिक कठिनाईयों के अलावा राज्य के अधिकांश आदिवासी क्षेत्र वर्षों से नक्सल हिंसा से भी पीड़ित रहें है। राज्य में दिसम्बर 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने पर राज्य के आदिवासियों के हितों के संवर्द्धन हेतु तथा उन्हे ‘न्याय‘ की अवधारणा से लाभान्वित करने हेतु अनेक ऐसे अभिनव कार्यक्रम आरंभ किए गए हैं जिनके दूरगामी परिणाम होगें और आदिवासियों की खुशहाली का नया दौर आरंभ होगा। 

    राज्य के आदिवासी अंचलों में बच्चों एवं महिलाओं में कुपोषण की दर 50 प्रतिशत तक है। यह स्थिति अत्यंत चिन्ताजनक है। राज्य सरकार ने ग्रामों मे ही 3 लाख बच्चों एवं महिलाओं को प्रतिदिन निःशुल्क पौष्टिक गरम भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था 2 अक्टूबर 2019 से आरंभ की है। यह कार्य महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से किया जा रहा है। इस अभियान के प्रारंभिक परिणाम उत्साह जनक रहे है। हमने यह ठाना है कि आगामी 3 वर्षों में राज्य को कुपोषण मुक्त किया जायेगा।

    दूरस्थ आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं का नितान्त अभाव है। दुर्गम वन एवं पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वालों के लिए डाक्टर की उपलब्धता स्वप्न की तरह ही थी। राज्य के आदिवासी इलाकों के लगभग 550 हाट बाजारों में 2 अक्टूबर 2019 से सभी हाट बाजार भरने के दिन मेडिकल टीम भेजने का निर्णय लिया गया। मेडिकल टीम के पास मोबाईल पैथालॉजी मशीन के साथ ही सभी आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टाक भी होता है। अभी तक हाट बाजार में आने वाले लाखों मरीजों का उपचार किया जा चुका है। 
    आदिवासी अंच
    लों में अधोसंरचना विकास के स्थान पर व्यक्तियों की आय बढ़ाने वाली गतिविधियों को प्राथमिकता दी जा रही है। दंतेवाड़ा देश के सबसे पिछड़े जिलों में से एक है, जहां 60 प्रतिशत से अधिक लोग बी.पी.एल. परिवारों की श्रेणी में है। हमने यह संकल्प किया है कि आगामी 4 वर्षो में दंतेवाड़ा में गरीबी का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत (22 प्रतिशत) के बराबर या उससे नीचे लाना है। इसके लिए अनेक अभिनव कार्य आरंभ किए गए है। 

    आदिवासियों की आय का 25 से 50 प्रतिशत भाग लघु वनोपजों के संग्रहण एवं विक्रय से प्राप्त होता है। राज्य में अनेक प्रकार के लघु वनोपज जैसे इमली, महुआ, हर्रा, आंवला, लाख इत्यादि प्राकृतिक रूप से वनों में पाए जाते है। इन लघु वनोपजों का अनुमानित मूल्य 1100 करोड़ रूपए है। राज्य सरकार की ओर से तेन्दूपत्ता के अलावा अन्य लघु वनोपजों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर संग्रहण की व्यवस्था न किए जाने के कारण वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को संग्रहित वनोपजों को बिचौलियों एवं व्यापारियों को बेचना पड़ता था। जिसके कारण उन्हे 1100 करोड़ की आधी के बराबर भी राशि प्राप्त नही होती थी। 
    राज्य में कांग्रेस सरकार बनने के बाद हमने यह संकल्प लिया कि आदिवासियों द्वारा संग्रहित शत प्रतिशत वनोपजों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने की पुख्ता व्यवस्था की जायेगी ताकि किसी भी आदिवासी को शोषण का शिकार न होना पड़े। वनोपजों के संग्रहण हेतु पूरे राज्य में 55,000 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया। चूँकि आदिवासी लोग हाट-बाजारों के दिन ही बिचौलियों को अत्यन्त कम दरों पर लघु वनोपज का विक्रय करते थे, अतः हमने यह निर्णय लिया कि हाट-बाजारों में महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर लघु वनोपजों का संग्रहण किया जाए। लधु वनोपज के संग्राहकों को हाट-बाजार में ही नकद भुगतान की व्यवस्था भी की गई। 

    हमारे द्वारा लघु वनोपजों के संग्रहण हेतु की गयी समुचित व्यवस्था का ही परिणाम है कि इस सीजन में देश भर में संग्रहित कुल लघु वनोपजों का 80 प्रतिशत भाग सिर्फ हमारे राज्य में संग्रहित किया गया है। गत वर्ष तक महुआ का न्यूनतम समर्थन मूल्य 17/- प्रति किलो था। राज्य शासन की ओर से महुआ क्रय की कोई व्यवस्था न होने के कारण वनवासी भाई महुआ 13-15 रूपए प्रति किलो की दर से बिक्री करने के लिए विवश होते थे। हमने महुए का समर्थन मूल्य 17 रूपये से बढ़ाकर 30 रूपये प्रति क्विंटल पर क्रय की व्यवस्था की। आज स्थिति यह है कि व्यापारी महुए का क्रय 32 से 35 रूपये प्रति किलों की दर से कर रहे हैं। अन्य लघु वनोपजों की भी आदिवासियों को अधिक मूल्य प्राप्त हो रहा है।

    वर्ष 2018 तक राज्य में तेन्दूपत्ता का संग्रहण 2500/- प्रति मानक बोरे की दर से किया जा रहा था। राज्य में हमारी सरकार बनने के बाद हमनें प्रति मानक बोरे की दरें 2500/- से बढ़ाकर 4,000/- कर दीं। ये दरें देश में सर्वाधिक हैं। इससे तेन्दूपत्ता संग्राहकों को 225 करोड़ रूपए का अतिरिक्त लाभ प्राप्त हो रहा है। इस तरह तेन्दूपत्ता के दो सीजन में वनवासियों को 450 करोड़ रूपये का अतिरिक्त लाभ प्राप्त हो चुका है। वन क्षेत्र में रहने वाले को वनोपजों से अधिकतम लाभ दिलाए जाने के लिए शासन की ओर से लघु वनोपजों के संग्रहण, प्रसंस्करण एवं माकेटिंग की उपयुक्त व्यवस्था किए जाने से राज्य के वन क्षेत्रों में रहने वाले 12 लाख परिवारों को इस वित्तीय वर्ष में 2500 करोड़ रूपए की आय होना संभावित हैं। इस तरह प्रति परिवार लगभग 20 हजार रू. आय प्राप्त होगी।

    राज्य में वन क्षेत्रों में परंपरागत रूप से निवास करने वाले 4.18 लाख लोगों को वनाधिकार पट्टे दिए गए हैं। इनके पट्टों की भूमि घने वन क्षेत्रों में स्थित होने तथा भूमि खेती योग्य न होने के कारण उन्हें इससे कोई विशेष लाभ प्राप्त नहीं हो रहा है। राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है कि इन पट्टेधारियों की भूमि सुधार कर तथा सिंचाई की व्यवस्था कर उसमें मिश्रित प्रजातियों के फलों, लघु वनोपजों एवं वनौषधियों का रोपण किया जाए, जिससे आगामी एक वर्ष में ही उन्हे प्रतिवर्ष एक निश्चित आय प्राप्त होना आरंभ हो सके। इस संपूर्ण कार्य पर होने वाले व्यय का वहन शासन द्वारा किया जायेगा।

    शासन द्वारा आरंभ की गई अभिनव योजनाओं के माध्यम से वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को कुपोषण के दंश से मुक्ति मिलेगीं, स्वास्थ्य सूचकांक बेहतर होंगे तथा आय वृद्धि से जीवन स्तर में सुधार होगा। जिससे दशकों से पिछड़ेपन एवं अभावों में जीवन यापन करने वालों हेतु न्याय सुनिश्चित किया जा सकेगा।

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  • राज्य सरकार की योजनाओं से जनजातियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव: सीएम भूपेश बघेल

    राज्य सरकार की योजनाओं से जनजातियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव: सीएम भूपेश बघेल

    रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से विश्व आदिवासी दिवस की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा जनजातियों के आर्थिक विकास और कल्याण के लिए क्रियान्वित की जा रही योजनाओं से जनजातियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन से आदिवासी समाज के लोगों का जीवन स्तर में अनवरत वृद्धि हो रही है। उन्होंने आदिवासी समाज में आए सकारात्मक परिवर्तन पर अपनी खुशी जाहिर की हैं।

    बता दें की इस अवसर पर कलेक्टर जांजगीर-चांपा यशवंत कुमार ने आज जिला कार्यालय के स्वान कक्ष में बलौदा विकासखंड के ग्राम सेंदरी, खैजा, देवरी और पंतोरा के सरपंच एवं वन अधिकार समिति के अध्यक्षों को स्वीकृत वन अधिकार पट्टा सौंपा।

    गौरतलब है कि जिले में सामुदायिक वन अधिकार पट्टों के कुल 120 प्रकरण स्वीकृत किए गए हैं। जिसमें 186.794 हेक्टेयर वन भूमि को संरक्षित किया गया है। उन्होंने बताया कि देवगुड़ी, चारागाह का अधिकार, मछली एवं अन्य जल उत्पाद सहित अन्य प्रयोजनों के लिए स्वीकृत किया गया है।

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  • सड़क दुर्घटना में एक युवक की मौत, लोगों ने थाने का किया घेराव

    सड़क दुर्घटना में एक युवक की मौत, लोगों ने थाने का किया घेराव

    रायपुर। राजधानी रायपुर में एक सड़क दुर्घटना हो गई हैं। इस सड़क दुर्घटना में एक युवक की मौत हो गई हैं। युवक की मौत से नाराज बीएसयूपी कॉलोनी भाठागांव के निवासियों ने टिकरापारा थाना को घेरा लिया हैं। 

    आपको बता दें की पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर लिखने के दौरान गाली गलौज का आरोप लगाया गया हैं। बीएसयूपी कॉलोनी के लोग बड़ी संख्या में थाने पहुंचे है। टिकरापारा थाने के बाहर लोगों ने चक्काजाम किया हैं। पुलिस अधिकारियों के साथ तीखी बहस भी हुई है। गाली गलौज करने आरोप का लगा रहे है।

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  • 4 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, जबरदस्ती दी गई थी ट्रेनिंग

    4 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, जबरदस्ती दी गई थी ट्रेनिंग

    कोंडागांव। नक्सलियों को माओवादी विचारधारा छोड़कर मुख्य धारा से जोड़ने की सरकार की योजनायें रंग ला रही है। कोंडागांव जिले के थाना केशकाल के धुर नक्सल प्रभावित ग्राम माड़गांव के 2 युवक एवं 2 युवतियों ने कोण्डागांव पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया हैं। बताया जा रहा है कि चारों युवक/युवतियों को नक्सली बलपूर्वक गांव से लेकर गए थे।

    इसके बाद चारों युवक/युवतियों ने नक्सलियों के विचारों से विमुख होकर एवं समाज की मुख्य धारा में जुड़ने का निर्णय लिया तथा स्वयं अपने ग्राम माडगांव वापस आ गए और आज रविवार को ग्राम के अन्य रहवासियों की मदद से इन्हें कोण्डागांव पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कराया गया है। तथा कोंडागांव पुलीस अधीक्षक ने उन्हें प्रोत्साहन राशि दे कर समझाई दी है।

    बता दें की पूछताछ के दौरान इन चारों ने खुलासा किया कि इन चारों को पिछले माह 12 जुलाई को ग्राम माड़गांव से नक्सली किसकोडो एलजीएस कमांडर लखमू एवं अन्य 7 नक्सली गांव से बलपूर्वक धमकाकर अपने साथ ले गये थे। इस दौरान उन्हें नक्सलियों द्वारा हथियार चलाने, बम बनाने एवं अन्य नक्सल संबंधित प्रशिक्षण दिया गया तथा जबरदस्ती अपने साथ घुमाकर इनके दिमाग में नक्सल संबंधी भडकाउ वीडियों, साहित्य इत्यादि के माध्यम से अपने साथ शामिल करने का प्रयास किया गया है। छत्तीसगढ़ शासन की नीतियों एवं विकास कार्यों से प्रभावित होकर इन नौजवानों ने नक्सलियों का साथ छोड़कर समाज की मुख्य धारा में शामिल होने का निर्णय लिया है।

    इस मामले में कोंडागांव पुलिस अधीक्षक सिदार्थ तिवारी ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार की विकास नीतियों और एंटी नक्सली अभियान के चलते इलाके में नक्सलियों के कदम उखड़ रहे हैं। इसलिए नक्सली जबरदस्ती युवाओं को उठाकर उन्हें नक्सली बना रहे हैं। जिन्हें हाथों में कलम होनी चाहिए उन हाथों में हथियार और आईईडी थमा रहे हैं। सरकार की विकास नीतियों से प्रभावित होकर चार युवक युवतियों ने मुख्य धारा में प्रवेश लिया है उनका स्वागत है। 

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  • राज्य के तीन जिलों में स्थापित होंगे ग्रामोद्योग प्रक्षेत्र, गतिविधियों को विस्तार देने की नई पहल

    राज्य के तीन जिलों में स्थापित होंगे ग्रामोद्योग प्रक्षेत्र, गतिविधियों को विस्तार देने की नई पहल

    रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशानुरूप राज्य में ग्रामोद्योग की गतिविधियों के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार से जोड़ने की पहल शुरू कर दी गई है। छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा राज्य के दुर्ग, कोण्डागांव एवं सुकमा जिले में ग्रामोद्योग की गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्रामोद्योग प्रक्षेत्र स्थापित किया जाएगा। इसके लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं ग्रामोद्योग मंत्री गुरू रूद्रकुमार की विशेष पहल पर संबंधित जिला प्रशासन द्वारा भूमि आबंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दुर्ग जिले के सेलूद ग्राम में स्थापित होने वाले ग्रामोद्योग प्रक्षेत्र में सोलर चरखे से पोनी धागा कताई एवं लूम से कपड़ा बुनाई का प्रशिक्षण दिए जाने की तैयारी अंतिम चरण में है। यहां ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से खादी उत्पादन केन्द्र भी शुरू किया जाएगा।

    छत्तीसगढ़ खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के नवनियुक्त अध्यक्ष राजेन्द्र तिवारी ने बीते दिनों बोर्ड के अधिकारियों की बैठक लेकर ग्रामोद्योग प्रक्षेत्र की स्थापना सहित विभाग के कामकाज की गतिविधियों की विस्तार से समीक्षा की है। उन्होंने कहा कि ग्रामोद्योग के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिले, यह मुख्यमंत्री की मंशा है। उन्होंने अधिकारियों को इसके लिए पूरी शिद्दत से मैदानी स्तर तक प्रयास शुरू करने की बात कही। अध्यक्ष राजेन्द्र तिवारी ने ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा बुनकर एवं महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के अब तक के प्रयासों की सराहना की और इसे विस्तारित करने को कहा। उन्होंने कहा कि ग्रामोद्योग ग्रामीण अंचल के लोगों को रोजगार व्यवसाय से जोड़ने का अच्छा माध्यम है। इसके जरिए लोगों को घर बैठे रोजगार उपलब्ध कराकर उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है।

    बैठक में प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा ने खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड की वर्तमान गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में 219 ग्रामोद्योग इकाईयां संचालित हैं। इन इकाईयों के संचालन के लिए शासन द्वारा तीन करोड़ 5 लाख रूपए का अनुदान शासन द्वारा दिया गया है। ग्रामोद्योग इकाईयों के माध्यम से 1500 से अधिक लोगों को सीधे रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। खादी उत्पादन केन्द्रों के माध्यम से बड़ी संख्या में बुनकरों को भी रोजगार मिल रहा है। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण काल के दौरान भी ग्रामोद्योग बोर्ड से जुड़ी महिलाओं द्वारा उत्पादित सामग्री की अच्छी खासी बिक्री हुई, जिससे समूहों को लाभ हुआ है। उन्होंने खादी एवं ग्रामोद्योग सामग्री की ऑनलाइन मार्केटिंग एवं मोबाइल एप्प के बारे में भी जानकारी दी और कहा कि दुर्ग, अम्बिकापुर एवं रायगढ़ में खादी ग्रामोद्योग बोर्ड का नवीन भण्डार स्थापित किया जाएगा।

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  • खड़े ट्रक से टकराई तेज रफ्तार सूमो, हादसे में 4 लोगों की मौत, 5 लोग गंभीर रूप से घायल

    खड़े ट्रक से टकराई तेज रफ्तार सूमो, हादसे में 4 लोगों की मौत, 5 लोग गंभीर रूप से घायल

    महासमुंद। महासमुंद से हादसे की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। नेशनल हाईवे-53 में टेका गांव के पास खड़े ट्रक से तेज रफ़्तार सूमो जा टकराई हैं। इस हादसे में 4 लोगों की मौत हो गई है। वहीं 5 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।

    आपको बता दें की यह पूरा मामला पिथौरा थाना क्षेत्र का है। ये हादसा इतना भयंकर था कि सूमो वाहन के परखच्चे उड़ तक गए है। मिली जानकारी के मुताबिक ये सूमो वाहन पंश्चिम बंगाल से मजदूरों को लेकर महाराष्ट्र जा रही थी। घायलों को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पिथौरा लाया गया है। प्राथमिक उपचार के बाद रायपुर मेकाहार रेफर किया गया है। सूमो चालक को झपकी आने के कारण हादसा होने की बात कही जा रही है।

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  • 4 साल पहले हत्या के मामले में उत्कृष्ट कार्य के लिए पुलिस जवानों का DGP डीएम अवस्थी ने किया सम्मान

    4 साल पहले हत्या के मामले में उत्कृष्ट कार्य के लिए पुलिस जवानों का DGP डीएम अवस्थी ने किया सम्मान

    कवर्धा। कवर्धा जिले में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस अधिकारी कर्मचारियों को पुरूस्कृत करने आज के छत्तीसगढ़ के डीजीपी डीएम अवस्थी कवर्धा पहूंचे थे। इस दौरान वीरसावरकर भवन में आयोजित इन्द्रधनुष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया है।

    आपको बता दें की कवर्धा जिले के पुलिस जवानों का सम्मान हुआ है। जिन्होने कवर्धा के सबसे बड़ी लूट की वारदात, जिसमें 71 लाख रूपये की लूट हुई थी। लूट की खबर की सूचना पर जिले के पुलिस अमले 24 घटें के अंदर ना कि आरोपियों को गिरफतार किया बल्कि लूट के सारी रकम को भी बरामद कर लिया था। उसी प्रकार एक चिल्पी थाना में चोरी और लोहारा थाना अन्तर्गत 4 साल पहले हुए हत्या के मामलें में आरोपियों को पकड़ने में उत्कृष्ण कार्य करने वाले पुलिस के जवानों को डीजीपी डीएम अवस्थी ने अपने हांथो प्रस्स्ति पत्र प्रदान कर सभी को सम्मानित किया है। डीजीपी ने पुलिस जवानों को संबोधित भी किया और जिले के पुलिस टीम की काफी प्रसंसा भी की, डीजीपी ने पुलिस जवानों को स्पंदन एप के बारे में भी बताया जो पुलिस जवानों के लिए काफी मददगार साबित होगी। संपन्दन एप को 15 अगस्त को लांचिंग की संभावना भी बताई गई।

    डीजीपी ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि कवर्धा जिले के सीमावर्ती इलाका मध्यप्रदेश और राजनांदगांव जिले के अतिनक्सल प्रभावित क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। जहां नक्सलियों की लगातार चहलकदमी की खबर है, जिसके लिए कवर्धा पुलिस को उचित मार्ग दर्शन दिया गया। उन्होंने कहा कि कवर्धा पुलिस को चौकन्ना कर दिया गया है।

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  • प्रशासन के कार्यवाही से हताश ट्रैक्टर चालकों ने किया ट्रैक्टर का चक्काजाम, प्रशसान से लगाई गुहार

    प्रशासन के कार्यवाही से हताश ट्रैक्टर चालकों ने किया ट्रैक्टर का चक्काजाम, प्रशसान से लगाई गुहार

    गरियाबंद। गरीयाबंद ज़िला मुख्यालय से लगी हुई पैरी नदी से रेत का परिवाहन कर नगर को रेत कि सप्लाई करने वाले छोटें छोटे ट्रेक्टर मालिक हताश और परेशान है। कारण है की बार-बार प्रशसान का अमला इनके वाहन को रोककर भारी भरकम जुर्माना कर रहा है। जिसको ले कर आज ट्रेक्टर परिवाहन संघ ने गांधी मैदान में अपने ट्रेक्टरों का पहिया जाम कर दिया है। जिससे नगर में हड़कंप मचा हुआ है।

    उल्लेखनीय है की कोविड-19 के इस दौर में लोगों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। वहीं ट्रेक्टर के पहिए जाम होने से नगर को रेत की आपूर्ति नहीं हो पाएगी। जिसके चलते छोटे-छोटे रोज कमाने खाने वाले मज़दूर भी प्रभावित हो रहे है। वहीं ट्रेक्टर मालिकों की सामने भी ट्रेक्टर का किस्त पटाने का भी संकट खड़ा हो गया है। जबकी ट्रेक्टर मालिकों को साफ़ कहना है की हम शासन को राय्लटी के रूप में राशी देने को तैयार है। बशर्ते मालगाव नदी में भी घाट की स्वीकृति पर्दान करें हम रोज रोज शसान को जुर्माना दे दे कर हलाकान हो गए है।

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  • विश्व आदिवासी दिवस पर शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक एवं संग्रहालय का ई-भूमि पूजन करेंगे मुख्यमंत्री

    विश्व आदिवासी दिवस पर शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक एवं संग्रहालय का ई-भूमि पूजन करेंगे मुख्यमंत्री

    रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विश्व आदिवासी दिवस पर 9 अगस्त को दोपहर 12 बजे अटल नगर नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में 25 करोड़ 66 लाख रूपए की लागत से बनने वाले शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक एवं संग्रहालय का ई-भूमि पूजन करेंगे। इस कार्यक्रम में सीएम बघेल अपने निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे। इस दौरान वे विभागीय योजनाओं से संबंधित वन अधिकार ‘नई आशाएं‘ पुस्तिका, प्रयास एवं एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय की उपलब्धियों की पुस्तिका, आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा तैयार किए गए हैं। फोटो हैण्डबुक, मानव शास्त्रीय अध्ययन, वर्णमाला चार्ट एवं गिनती चार्ट का विमोचन, टी.आई.आर. वेब पोर्टल का शुभारंभ करेंगे, साथ ही मेघावी छात्रों का सम्मान तथा वन अधिकार पत्रों का वितरण भी करेंगे। इस अवसर पर आदिम जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम भी उपस्थित रहेंगे। 

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर जिलों में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने वाले हितग्राहियों से चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही और कांकेर जिले में वन अधिकार पत्र के हितग्राहियों से चर्चा करेंगे। वे कांकेर के गढ़िया पहाड़ स्थित ओपन आदिवासी संस्कृति संग्राहलय और इच्छापुर स्थित हर्रा प्रसंस्करण केन्द्र का शुभारंभ करेंगे। इसके अलावा कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर स्थित कोदो, कुटकी, रागी, प्रसंस्करण केन्द्र, नवागांव भवगीर स्थित लाख प्रसंस्करण केन्द्र, मर्दापोटी में मशरूम उत्पादन सह-प्रशिक्षण केन्द्र और वन कलस्टर का शुभारंभ करेंगे।

    मुख्यमंत्री जशपुर जिले के लघु वन उत्पादक संग्राहक हितग्राहियों से चर्चा करेंगे। इसके बाद जगदलपुर के नगरीय क्षेत्र में वन अधिकार पट्टे का प्रतिकात्मक शुभारंभ करेंगे और शहीद वीर नारायण सिंह स्वावलंबन योजना के अंतर्गत 217 बेरोजगार युवक-युवतियों को दो-दो लाख रूपए के स्वीकृति आदेश प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण अंतर्गत बोर्ड परीक्षा के 140 मेघावी विद्यार्थियों को 5100-5100 रूपए के चेक और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित करेंगे। प्रमुख सचिव उद्योग मनोज कुमार पिंगुआ स्वागत उद्बोधन देंगे और दोपहर 1.20 बजे आदिम जाति विकास विभाग के सचिव डी.डी. सिंह द्वारा अभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।

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  • मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राज्यपाल अनुसुईया उइके ने हलषष्ठी पर दी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं

    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राज्यपाल अनुसुईया उइके ने हलषष्ठी पर दी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं

    रायपुर। आज हलषष्ठी (कमरछठ) का त्यौहार हैं। हलषष्ठी का व्रत केवल पुत्रवती महिलाएं ही रखती हैं। इस दिन माताएं अपने पुत्र की लंबी उम्र की कामना करती हैं। हलषष्ठी व्रत श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता श्री बलरामजी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन श्री बलरामजी का जन्म हुआ था। 

    आपको बता दें की मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों को विशेषकर माताओं को हलषष्ठी (कमरछठ) की बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि हलषष्ठी का त्यौहार छत्तीसगढ़ में कमरछठ के रूप में जाना जाता है, इस दिन माताएं अपने बच्चों के स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए व्रत रखकर प्रार्थना करती हैं। गांवों और शहरों में कई जगहों पर बनाई गआ सगरी में माताएं इकट्ठा होकर पूजा करती हैं। सीएम बघेल ने कहा कि कोविड संक्रमण से बचाव और सुरक्षा वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने पूजा के दौरान भी सोशल और फिजिकल दूरी, मास्क लगाने औेर हाथ धोने जैसे नियमों का पालन करने की अपील की है।

    इसी के साथ ही राज्यपाल अनुसुईया उइके ने भी हलषष्ठी के अवसर पर प्रदेशवासियों और माताओं को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी है। राज्यपाल उइके ने कहा है कि माताएं इस अवसर पर अपने बच्चों के उत्तम स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। राज्यपाल ने ईश्वर से प्रार्थना की है वो माताओं की कामना को पूरी करें।

     

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