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  • Acne Solutions Tips: अगर आप भी अपने सिर में हो रहे पिंपल्स से हैं परेशान, तो ऐसे करें बचाव

    Acne Solutions Tips: अगर आप भी अपने सिर में हो रहे पिंपल्स से हैं परेशान, तो ऐसे करें बचाव

    Acne Solutions Tips: बालों में डेंड्रफ का कारण अक्सर खुजली और खुश्की बनता है। कई बार आप अपने स्केल्प पर छोटे-छोटे दाने महसूस करते हैं। जिस वजह से कई बार आपको काफी परेशानी भी होती है। इसके होने के कई कारण होते हैं। मेडिकल टर्म को समझें, तो इसे स्केल्प एक्ने (Scalp Acne) कहा जाता है। जो कई कारणों से होता है। स्कैल्प एक्ने छोटे पिंपल्स की तरह दिखते हैं। इसमें सिर का पिछला भाग भी शामिल होता है। इन फुंसियों में खुजली होती है। आज हम स्केल्प होने के कारण और इसके बचाव के बारे में बताएंगे।

    स्कैल्प एक्ने के कारण

    -बालों को अच्छी तरह से न धोना।

    -वर्कआउट के बाद बहुत देर तक पसीने को रहने देना।

    -सिर ढंकते समय पसीना आनाउनमें शामिल हैं।

    -हेयर जैल, हेयरस्प्रे जैसे उत्पादों का इस्तेमाल करना।

    -फंगल इंफेक्शन।

    -डैंड्रफ का होना।

    -टेंशन लेना।

    -हार्मोनल असंतुलन।

    -अस्वास्थ्यकर आहार।

    कैसे बचें स्केल्प एक्ने से

    -स्वच्छता का खास ध्यान रखें।

    -पसीने को तुरंत साफ करें।

    -ढीले-ढाले हेडगियर पहनें।

    -वर्कआउट के तुरंत बाद हेयर वॉश करें।

    -प्राकृतिक, हाइपोएलर्जेनिक हेयर केयर प्रोडक्टस का इस्तेमाल करें।

    -हेयरस्प्रे और जैल का इस्तेमाल करने से बचें।

    -मल्टीविटामिन की सही खुराक लें।

    -अपनी डाइट को सही करें।

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  • कहीं उल्टा न पड़ जाए 'चेचक' का इलाज, पहले जान लें ये जरूरी बात

    कहीं उल्टा न पड़ जाए 'चेचक' का इलाज, पहले जान लें ये जरूरी बात

    Health Tips : चेचक इंफेक्शन से फैलने वाली एक गंभीर बीमारी है। इसमें शरीर पर अनगिनत लाल रंग के दाने या निशान आते हैं। जिसकी वजह से असहनीय दर्द और बुखार रहता है। चेचक को अंग्रेजी में चिकनपॉक्स (Chickenpox) कहा जाता है। जबकि भारत में चेचक को आम बोलचाल की भाषा में माता निकलना बोला जाता है। प्राचीन काल में इससे बचने का कोई इलाज नहीं था। लेकिन साल 1758 में पहला चेचक वैक्सीन का पहला सफल परीक्षण किया गया। जिसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 1980 में दुनिया को चेचक यानि चिकनपॉक्स की बीमारी से मु्क्त घोषित किया था। चेचक की बीमारी के समय पीड़ित के लिए साफ-सफाई और खास देखभाल की जरूरत होती है। इसलिए आज हम आपको चेचक क्या होता है (what is Chickenpox),चेचक के कारण, लक्षण और उसके उपचार (Chickenpox Symptoms Causes and treatment) बता रहे हैं।

    क्या होता है चेचक (what is chickenpox)

    चेचक चेहरे और शरीर पर निकलने वाले लाल या सफेद रंग के छालेनुमा दाने होते हैं। जिसकी वजह से पीड़ित को बुखार और असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है। आमतौर पर चेचक इंफेक्शन से होने वाली बीमारी है। चेचक क्योंकि एक संक्रामक बीमारी है, तो ऐसे में पीड़ित के सभी कामों को हमेशा दस्ताने पहन करना चाहिए या काम करने के बाद साबुन से हाथ जरूर धोएं। इससे आप स्वयं को इस गंभीर बीमारी से बचा सकेंगें।

    चेचक के कारण (chickenpox causes)

    1. दूषित खाद्य पादर्थों और पानी का सेवन करना

    2. चेचक से पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में आने से

    3. चेचक के पीड़ित की खांसी या छींक की वजह फैलने वाले बैक्टीरिया के संपर्क में आना

    चेचक के लक्षण (chickenpox symptoms)

    1. चेहरे, हाथ, पैर, पीठ पर लाल या सफेद रंग के चकत्ते या दानों का निकलना

    2. अत्याधिक कमजोरी

    3. बुखार का लंबे समय तक रहना

    4. सिरदर्द और घबराहट रहना

    5. पीठ में दर्द रहना

    चेचक के उपचार (chickenpox treatment)

    1. चेचक होने पर डॉक्टर की सलाह पर टीकाकरण करवाने के साथ एंटीबॉयोटिक दवाओं का इस्तेमाल फायदेमंद होता है।

    2. चेचक को ठीक करने में घरेलू उपचार यानि आयुर्वेदिक उपाय भी कारगर साबित होते हैं। इसके लिए ताजी नीम की पत्तियों को पीसकर दानों पर लगाने खुजली और दर्द से राहत मिलती है।

    3. चेचक के रोगी को केला, सेब और चावल के अलावा तरल पदार्थो का सेवन करवाना लाभदायक होता है।

    4. चेचक के रोगी को दही, नारियल पानी जैसे शरीर को ठंडक देने वाले तरल पदार्थो का सेवन करवाना अच्छा होता है।

    5. चेचक के समय मसालेदार, ऑयली और मांसाहारी भोजन खाने से बचना चाहिए।

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  • नवजात शिशु को ठंड से बचाने के लिए अपनाए जाने वाले ये तरीके होते हैं जानलेवा

    नवजात शिशु को ठंड से बचाने के लिए अपनाए जाने वाले ये तरीके होते हैं जानलेवा

    अक्सर मांएं अपने नवजात शिशु बच्चों को सर्दियों में गर्म रखने के लिए उन्हें मोटे कंबल या रजाई में लपेटे रहती हैं, लेकिन कई बार उनकी ऐसी छोटी-छोटी गलतियां शिशु के लिए सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम (Sudden Infant Death Syndrome) यानी SIDS का कारण बन जाते हैं। अगर आप सर्दियों में इस स्थिति से शिशु को बचाना चाहती हैं, तो हम आपके लिए लेकर आएं हैं सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम के लक्षण और गलतियां। जिन्हें पहचान कर आप अपनी गलतियों को सुधार सकें और शिशु की बेहतर तरीके से देखभाल कर सकें।

    सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम क्या है

    एक स्वस्थ शिशु की बिना किसी कारण से अचानक होने वाली मृत्यु को सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम यानि अचानक शिशु मृत्यु सिड्रोंम कहा जाता है। इसे कॉट डेथ भी कहते हैं। ये समस्या आमतौर पर शिशु के सोते होने वाली घटना या स्थिति होती है।

    सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम के लक्षण :

    1. सोते समय कंबल या रजाई को मुंह तक न ढकें

    अगर आप भी अक्सर अपने शिशु को ठंड से बचाने के लिए उसके सोते समय रजाई या कंबल को मुंह तक कवर कर देती हैं, तो जल्द इस आदत को बदल लें। क्योंकि लंबें समय तक मुंह ढककर सोने से शिशु को फ्रेश एयर यानि ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। साथ ही रजाई या कंबल के अंदर गर्माहट, कार्बनडाई ऑक्साइड के स्तर में वृद्धि होना उसकी लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

    2. कमरे में शिशु को अकेले सुलाना

    आपने अक्सर फिल्मों और सीरियल्स में शिशु को अलग कमरे में सुलाते हुए जरुर देखा होगा, लेकिन ये गलती आप हकीकत में कभी भी न करें, क्योंकि शिशु को जन्म के बाद से लगभग 2 साल तक बेहद खास देखभाल की जरुरत होती है। ऐसे में उसे अकेले सुलाने से उसके बार-बार डरने, लंबे समय तक भूख लगने या अन्य वजह से रोने के कारण शिशु की सांस रुकने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा शरीर के ठंड लगने से बुखार, निमोनिया आदि बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है।

    3. पेट के बल न सुलाएं

    अगर आप अक्सर अपने शिशु को पेट के बल सुलाना पसंद करती हैं, तो जल्द इस आदत को सुधार लें, क्योंकि पेट के बल सुलाने से शिशु के शरीर में ऑक्सीजन सही तरीके से नहीं पहुंच पाती है। ऐसे में सीधा सुलाने से शरीर में ऑक्सीजन स्तर सामान्य रहता है साथ ही शारीरिक विकास में तेजी भी आती है। इसके अलावा अगर वो करवट लेते समय पेट के बल हो जाएं, तो उन्हें सीधा करें। वैसे तो मां के संपर्क में रहने से कुछ गुण जिंदगी में जरुरी होता है।

    4. सही झूले या बेड का चुनाव न करना

    आमतौर पर सभी लोग शिशु को अपने पास ही सुलाना पसंद करते हैं, लेकिन इससे होने वाली कई परेशानियों की वजह से कुछ लोग शिशु को अलग बेड या झूले में अपने पास सुलाना पसंद करते हैं। अगर आप भी ये तरीका अपना रही हैं, तो शिशु के लिए सही साइज या बेड का चुनाव जरुर करें। जिससे शिशु के लेटने, बैठने और खड़े होने पर गिरने का खतरा न हो। इसके अलावा शिशु की नाजुक त्वचा पर रेशेज से बचाने के लिए उनके बिस्तर का मुलायम होना भी बहुत जरुरी है, लेकिन वो फ्लैट भी हो जिससे बिस्तर को बार-बार ठीक न करना पड़े।

    5. सामान्य बुखार को न करें इग्नोर

    नवजात शिशु का शरीर बेहद नाजुक होता है। ऐसे में सर्दी के मौसम में गर्म रखने के लिए सभी उपयुक्त तरीकें अपनाएं (हाथ, सिर और पैरों को ढक कर रखें,लेयरिंग पहनाएं) इससे वो स्टाइलिश दिखने के साथ फिट होने में भी मदद मिलेगी।
     

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  •  तुलसी एक फायदे अनेक, जानिए कौन-कौन सी बीमारी के इलाज में आती है काम

    तुलसी एक फायदे अनेक, जानिए कौन-कौन सी बीमारी के इलाज में आती है काम

     

    जब कभी आप को सर्दी या जुकाम होता है तो हर कोई आपको सलाह देता है कि तुलसी वाली चाय पी लो ठीक हो जाओंगे, लेकिन क्या पता है तुलसी सिर्फ सर्दी या जुकाम में ही लाभकारी नहीं है। इसके अलावा भी बहुत सी बिमारियां होती है जिनमें तुलसी मददगार होती है।   

    तुलसी कई रोगों को दूर करने और शरीर की इम्‍यूनिटी बढ़ाने में बड़ी कारगर है। यह पौधा शरीर की इम्‍यूनिटी बढ़ाने के साथ बैक्‍टीरिया और वायरल इंफेक्‍शन से लड़ता है।आयुर्वेद में कहा गया है कि अगर आप अपने घर में तुलसी लगाते हैं तो स्‍ट्रेस यानी कि तनाव घर से कोसों दूर रहता है।

    तुलसी के पत्तों के रस को गर्म करके दो-दो बूंद कान में टपकाने से कान का दर्द दूर होता है। तुलसी का काढ़ा खून को साफ करने का काम करता है और इससे कॉलेस्‍ट्रोल लेवल भी कम होता है।

    आप तुलसी के पत्तियों की मदद से किडनी की पथरी से छुटकारा पा सकते हैं। तुलसी के पत्तों को गरम पानी में डालकर उसका सारा अर्क निकाल लीजिए। इसके बाद उसमें एक चम्‍मच शहद मिलाकर रोजाना पीने से घर पर ही किडनी की पथरी का इलाज हो जाएगा। काली मिर्च और तुलसी के पत्तों की गोली बनाकर दांत के नीचे रखने से दांत के दर्द में आराम मिलता है

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