ब्रेकिंग न्यूज़
  • शॉर्ट्स पहनकर केंद्र पर एग्जाम देने पहुंची छात्रा को रोका, जानें पूरा मामला
  • भारत में एक दिन में 34 हजार से ज्यादा संक्रमित हुए, केरल बढ़ा रहा टेंशन
  • पीएम मोदी जहां भी जाते हैं, वहीं के हो जाते हैं उनके कपड़ों में दिखती है संस्कृति की झलक
  • कृषि कानूनों के विरोध में SAD ने निकाला मार्च, हरियाणा से दिल्ली आने वाले सभी रास्ते बंद
  • दिल्ली में मानसून मेहरबान, अब तक 1159 मिलीमीटर बारिश दर्ज, आज भी छींटे पड़ने की आशंका
  • राहुल गांधी ने पीएम मोदी को दी जन्मदिन की बधाई, सोशल मीडिया पर यूजर्स ने किए मजेदार कमेंट्स
  • पीएम मोदी 71 की उम्र में फिट और ऊर्जा से हैं भरपूर, जानें दिनचर्या के बारे में
  • T20 World cup के बाद Virat kohli छोडेंगे लिमिटेड ओवर के फॉर्मेट की कप्तानी
  • गुजरात विधानसभा स्पीकर राजेंद्र त्रिवेदी ने नए मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण से पहले पद से दिया इस्तीफा
  • Covid Third Wave : Delta Virus की ऐसे करें पहचान, जानें लक्षण और बचाव के उपाय
  • राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आज पहुंचेंगे शिमला, यहां पढ़ें पूरा शेडयूल
  • जब नीति और नीयत साफ हो और प्रयास ईमानदार हो तो कुछ भी असंभव नहीं होता: पीएम मोदी
  • रॉकेट फोर्स करेगी मिसाइलों का सामना, पाक-चीन की चाल रह जाएगी धरी: सीडीएस बिपिन रावत
  • Coronavirus: भारत में एक दिन में 30 हजार से ज्यादा संक्रमित हुए, 431 लोगों की मौत
  • स्पेसएक्स ने रचा इतिहास: 4 आम लोगों को अंतरिक्ष में भेजा, 3 दिन तक पृथ्वी की कक्षा में रहेंगे
  • पीएम मोदी और जो बाइडेन के बीच क्वाड से पहले होगी बड़ी मीटिंग: रिपोर्ट
  • गुजरात के नए मंत्रिमंडल में पूरे फेरबदल की संभावना! शाम तक के लिए टला शपथ ग्रहण समारोह
  • पेट्रोल पंप कर्मचारी से गाली-गलौज करने वाला आरक्षक सस्पेंड
  • J&K: डल झील के ऊपर गरजेंगे वायुसेना के सुखोई-30 और मिग-21 लड़ाकू विमान
  • कोर्ट ने चार आतंकियों को 14 दिन की पुलिस रिमांड में भेजा- सीरियल ब्लास्ट कर दहलाना चाहते थे देश
  • रोड एक्सीडेंट में बाइक सवार दो लोगों की मौत, कार की टक्कर से 30 फ़ीट ऊंचे फ्लाईओवर से नीचे गिरे
  • छत्तीसगढ़-झारखंड में आज और कल भारी बारिश की संभावना, जानिए देश के अन्य हिस्सों का हाल
  • पुलिस ने आरोपी पर किया 10 लाख का इनाम घोषित, मंत्री बोले- पकड़कर एनकाउंटर कर देंगे
  • संभावित कोरोना की तीसरी लहर से नहीं कर सकते इनकार, अगले साल भी करना होगा ये काम

सेहत

  • Health tips : थायरॉइड के मरीजों को रोजाना खाने चाहिए ये 4 फल

    Health tips : थायरॉइड के मरीजों को रोजाना खाने चाहिए ये 4 फल

    इन दिनों अधिकतर लोगों में थायरॉइड (Thyroid) की समस्या देखने को मिल रही है। यह एक हॉर्नोनल जनित बीमारी है, जो पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा होती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो यह बीमारी शरीर में आयोडीन की कमी से हो सकती है, इसके साथ ही जिंक, फॉस्फोरस और विटामिन्स की कमी भी इसकी वजह बन सकती है। यहां कुछ ऐसे फ्रूट्स के बारे में बताया जा रहा है, जिनका नियमित रूप से सेवन कर आप इस बीमारी को कंट्रोल कर सकते हैं।
     

    सेब (Apple)

    सेब आपकी सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। रोजाना एक सेब (Apple) खाने से आपको वजन कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही इससे ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar) को भी मैनेज किया जा सकता है। अध्ययनों से पता चलता है कि सेब आपके शरीर को डिटॉक्सीफाई कर सकता है, जो थायरॉयड ग्रंथि को अच्छी तरह से काम करने में हेल्प करता है। सेब कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) के लेवल को भी कम करता है और डायबिटीज (Diabetes), मोटापा और दिल से संबंधित बीमारियों से बचाता है।

    संतरा (Orange) संतरे में विटामिन सी (Vitamin C) और एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) भरपूर मात्रा में पाया जाते हैं, इसे खाने से आपकी थायरॉयड ग्रंथि (Thyroid disease) पर पॉजिटिव इफेक्ट पड़ता है। यह आपके इम्यून सिस्टम को भी बढ़ाता है और बल्ड शुगर लेवल को भी कंट्रोल करता है।

    अनानास (Pineapple) अनानास में विटामिन सी (Vitamin C) और मैंगनीज (Minerals) की उच्च मात्रा होती है, ये दोनों पोषक तत्व आपके शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं। इस खट्टे फल में विटामिन बी (Vitamin B) भी होता है, जो थायरॉइड के लक्षणों में से एक थकान को दूर करने में मदद कर सकता है। अनानास का सेवन करना कैंसर, ट्यूमर और कब्ज से पीड़ित लोगों के लिए भी अच्छा माना जाता है

    जामुन जामुन में एंटीऑक्सिडेंट भरपूर मात्रा में होता है, जो थायरॉइड पेशेंट्स के लिए अच्छा माना जाता है। अगर आप नियमित रूप से जामुन का सेवन करते हैं, तो इससे आपको काफी राहत मिलेगी।


     

    और भी...

  • Sunday Special: बिहार का लोकप्रिय पारंपरिक व्यंजन है लिट्टी चोखा, घर पर ऐसे करें तैयार

    Sunday Special: बिहार का लोकप्रिय पारंपरिक व्यंजन है लिट्टी चोखा, घर पर ऐसे करें तैयार

    लिट्टी चोखा (Litti Chokha) बिहार के लोकप्रिय व्यंजनों (Popular Recipes of Bihar Litti Chokha) में से एक है। जिसको लिट्टी और चोखे - दो अलग-अलग व्यंजनों के साथ खाने को कहा जाता है। लिट्टी चोखा बिहार (Bihar), झारखंड (Jharkhand) के अलावा पूर्वी यूपी में खासतौर पर ज्‍यादा पसंद किया जाता है। वैसे दक्षिण भारत समेत देश के अन्य कई हिस्सों में भी लिट्टी चोखा को बड़े प्‍यार व स्‍वाद से खाया जाता है। लिट्टी वैसे तो तो बाटी जैसी दिखाई देती है, पर इसमें फर्क काफी होता है। आटे में सत्तू भरकर लिट्टी तैयार की जाती है। साथ ही आलू, बैंगन व टमाटर को मिक्‍स करके चोखा बनाया जाता है। फिर चोखा को लिट्टी के साथ बड़े प्रेम से खाया जाता है।

    लिट्टी में इस्तेमाल होने वाली सामग्री लिट्टी को बनाने के लिए 2 कप आटा, आधा चम्मच तेल, आधा चम्मच अजवाइन और दो बड़े चम्मच घी की जरूरत होती है। तैयार करने की प्रक्रिया सबसे पहले आटे को छान कर बर्तन में रख लें। फिर आटे में घी व हल्‍का सा नमक डाल कर अच्छे से मिला लें। इसके बाद हल्के गर्म पानी के साथ नरम आटा गूंथ लें। फिर गूंथे हुए आटे को ढंककर करीब आधा घंटे तक रखना होगा। फिर लिट्टी बनाने के लिए गूंथा हुआ आटा तैयार है। सत्तू में ये सामग्री होगी इस्तेमाल सत्तू बनाने में एक कप बिना छिलके वाले चले भून लें, या सत्तू, कद्दूकस करे हुए 4 से 5 लहसुन, कद्दूकस किया हुआ एक टुकड़ा अदरक लें, एक प्याज बारीक कटी हुई, 2 से 3 बारीक कटी हुई हरी मिर्च, बारीक कटा हुआ आधा कप हरा धनिया, एक चम्मच अजवाइन, एक बड़ा चम्मच नींबू का रस, एक चम्‍मच तेल व दो भरे हुए लाल मिर्च के अचार का मसाला और नमक स्वादानुसार इस्तेमाल होगा।

     

    लिट्‍टी में भरने वाला सत्‍तू ऐसे करें तैयार अदरक को सबसे पहले धोएं और छिलकर बारीक टुकड़ों में काट लें या कद्दूकस भी की जा सकती है। हरा धनिया व हरी मिर्च बारीक काट लें। सत्तू को बर्तन में निकाल लें। फिर उसमें अदरक, धनिया, हरी मिर्च, नमक, काला नमक, नींबू का रस, जीरा, सरसों का तेल व अचार का मसाला मिला लें। जब सत्‍तू इसमें पूरी तरह से मिल जाए तो इसके बाद 1 से 2 छोटे चम्मच तेल व पानी डाल लें व फिर उसे ऐसे मिक्स कर दें कि वह पूरी तरह से भूरभूरा हो जाए। लो अब सत्‍तू भी हो गया तैयार। ऐसे बनाएं लिट्टी गूंथे हुए आटे की मध्यम आकार की लोइयां बना लें। फिर लोई को अंगुलियों की मदद से 2 से 3 इंच के व्यास में गोल कर लें। जिसपर एक या डेढ़ छोटी चम्मच सत्‍तू रख लें। फिर लोई को को चारों ओर से उठा कर बंद कर गोल कर दें। फिर इस गोले को हथेली की मदद से दबा कर थोड़ा चपटा कर दें। लो आपकी लिट्टी सिकने के लिए हो गई तैयार। फिर लकड़ियों या कोयले को जला कर उसे पूरी तरह से आग बना लें। जिसे जमीन या अंगीठी में रख लें। तैयार लोइयों को उस पर रख दें और पलट-पलट कर भूरी होने तक सेंकते रहें।

    चोखा ऐसे करें तैयार आलू, बैंगन और टमाटर को धोने के बाद भून लें। ठंडा होने पर इनके छिलका उतार लें। अब किसी बर्तन में रख कर चम्मच की मदद से मिक्स कर लें। फिर इसमें कटी हुई प्‍याज, हरी मिर्च, हरा धनिया पत्‍ता, नींबू, अचार, नमक व तेल डाल कर अच्छे से मिला लें। लो अब तैयार हो गया बिहार का लोकप्रिया चोखा। यदि आप अदरक और लहसुन को पसंद करते हैं तो 5 से 6 लहसुन की कलियां व अदरक का एक छोटा सा टुकड़ा बारीक काटकर इस चोखे में मिक्स कर लें।

    अब परोस दें एक प्याले में चोखा डाल दें। गर्म लिट्टी को बीच में से तोड़कर घी में डुबा दें। अब आलू, बैंगन और टमाटर के चोखा को हरी धनिए की चटनी के साथ पेश कर दें।

     

    और भी...

  • बारिश के मौसम में भूलकर भी ना खाएं ये 5 चीजें, वरना बढ़ सकती है आपकी परेशानियां

    बारिश के मौसम में भूलकर भी ना खाएं ये 5 चीजें, वरना बढ़ सकती है आपकी परेशानियां

    Health Tips : बरसात (Rainy Season) का मौसम हमें गर्मी से तो राहत देता ही है, लेकिन यह हमारे लिए कई बीमारियों को लेकर आता है। यहां ऐसी चीजों के बारे में बताया जा रहा है, जिन्हें आपको बारिश के दिनों में खाने से बचना चाहिए। आइए जानते हैं इन फूड्स (Foods) के बारे में।

    1- स्ट्रीट फूड (Street Foods) से बचे- बारिश के मौसम में स्ट्रीट फूड से बचना चाहिए, इससे आपकी सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। बरसात में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है अगर आप ये फूड्स खाएंगे तो आपको फूड पाइजनिंग, पेट दर्द, इंफेक्शन आदि हो सकता है।

    2- ऑयली फूड (Oily Food) को करें अवॉइड - बरसात के मौसम में ज्यादा तला-भूना नहीं खाना चाहिए, इससे आपका डायजेशन काफी स्लो हो जाता है और आप खाने को बचा नहीं पाते हैं, इससे आपको गैस, कब्ज, सीने में जलन आदि की समस्या हो सकती है।

    3- दही (Curd) को कहे ना - वैसे तो दही खाना सेहत के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन बरसात के मौसम में इससे परहेज करना चाहिए। एक्सपर्ट्स की मानें तो मानसून में खाने-पीने की चीजों में बैक्टीरिया हो सकते हैं, इसे खाने से आपको पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है।

    4- कुछ हरी सब्जियों (Green Vegetables) से करें परहेज हरी सब्जियां हमारी सेहत के लिए अच्छी होती है, लेकिन बरसात में उनका सेवन करने से बैक्टीरिया और फंगस इंफेक्शन हो सकता है। इसलिए इस सीजन में पत्ता गोभी, पालक, बथुआ, मेथी जैसी सब्जियां नहीं खाना चाहिए। इनमें बारिश के मौसम में कीड़े लगने का खतरा रहता है, जो हमारी सेहत को खराब कर सकते हैं।

    5- फिश (Fish) से करें परहेज इस मौसम से मछली खाने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि मानसून में फिश खाने से फूड प्वाइजनिंग की समस्या हो सकती है।

     

    और भी...

  • इन बीमारियों की वजह से आती है खांसी, जानें हर बात जो आप इसके बारे में जानता चाहते हैं

    इन बीमारियों की वजह से आती है खांसी, जानें हर बात जो आप इसके बारे में जानता चाहते हैं

    Health Tips : वास्तव में खांसी (Cough) कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं है, बल्कि गले का साफ करने के लिए शरीर का एक मैकेनिज्म (Mechanism) होता है। समस्या तब होती है, जब बार-बार खांसी आए या लंबे समय तक खांसी से छुटकारा ना मिले। सर्दी, जुकाम और बुखार (Fever) के कारण खांसी हो सकती है, जो थोड़े दिन में ठीक हो जाती है। कभी-कभार खांसी होना किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं है, लेकिन अगर बच्चों में चार सप्ताह तक या वयस्कों में आठ सप्ताह तक लगातार खांसी की समस्या बनी रहे तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

    इसलिए होती है खांसी खांसी के बारे में गाजियाबाद स्थित संयुक्त जिला चिकित्सालय में वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक- डॉ. संजय तेवतिया बताते हैं, जब गले में म्यूकस या बाहरी तत्व जैसे धुएं या धूल के कण जमा हो जाते हैं तो गले को साफ करने के लिए एक रिफ्लक्स एक्शन के रूप में खांसी आती है, ताकि गला साफ हो जाए और सांस लेने में परेशानी ना हो। कभी-कभी खांसी आना जरूरी है ताकि आपका गला साफ रहे और म्यूकस या बाहरी तत्व बाहर निकल जाएं। जब खांसी की समस्या तीन सप्ताह से कम समय तक रहती है तो उसे एक्यूट कफ कहते हैं। लेकिन अगर खांसी तीन से आठ सप्ताह तक बनी रहे तो उसे उसे क्रॉनिक कफ कहते हैं, यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। खांसी दो तरह की हो सकती है-

    गीली खांसी- जब खांसी के साथ बलगम निकले तो इसे गीली खांसी कहते हैं। सामान्यता सर्दी-जुकाम और फ्लू होने पर खांसी के साथ बलगम आता है। बलगम गले, छाती, नाक, श्वसन मार्ग और फेफड़ों में जमा होता है। जब बलगम का रंग नीला-पीला हो जाए या उसके साथ खून आए तो सतर्क हो जाएं, यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।

    सूखी खांसी- सूखी खांसी में बलगम नहीं निकलता है। अकसर सूखी खांसी को नियंत्रित करना कठिन होता है। सूखी खांसी की समस्या श्वसन मार्ग की सूजन या जलन के कारण हो सकती है।

    खांसी आने की वजहें

    -कईं स्थितियों के कारण खांसी की समस्या हो सकती है, ये कारण स्थायी और अस्थायी दोनों हो सकते हैं।

    -गले में जमा हुए म्यूकस या बाहरी तत्वों जैसे धूल

    -धुएं के कणों को साफ करने के लिए
    -श्वसन मार्ग का संक्रमण जैसे कोल्ड या फ्लू

    -धूम्रपान करना

    -अस्थमा

    -दवाइयों के साइड-इफेक्ट्स

    -वोकल कॉर्ड का डैमेज हो जाना

    -जीईआरडी यानी गैस्ट्रोइसोफैगियल रिफ्लक्स डिजीज

    -बैक्टीरिया का संक्रमण जैसे न्यूमोनिया, टीबी आदि गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं जैसे पल्मोनरी एंबोलिज़्म, हार्ट फेलियर, फेफड़ों का कैंसर, सीओपीडी यानी क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज
     

    और भी...

  • वायरल बुखार, खांसी और जुखाम की चपेट में आ रहे लोग, बदलते मौसम में ऐसे रखें Health का ध्यान

    वायरल बुखार, खांसी और जुखाम की चपेट में आ रहे लोग, बदलते मौसम में ऐसे रखें Health का ध्यान

    इन दिनों मौसम बदलते ही वायरल बुखार भी तेजी से फैल रहा है। वायरल के साथ-साथ मलेरिया व डेंगू के संदिग्ध मरीज भी आ रहे हैं। लोग खांसी और जुखाम की चपेट में भी आ रहे हैं। जिस कारण अब अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ने लगी है। जिस कारण सरकारी अस्पतालों ही नहीं, प्राइवेट अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। वहीं मरीजों में कोरोना का डर भी सता रहा है।

    इस बार बरसात का मौसम लंबा चल गया। वहीं मौसम में कभी ठंड तो कभी उमस भरी गर्मी भी चल रही है। मौसम के इस बदलते तेवरों व बरसात की वजह से इन दिनाें वायरल बुखार के मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। महेंद्रगढ़ के नागरिक अस्पताल की बात करें तो एक सप्ताह पूर्व तक जहां नागरिक अस्पताल में 200 से 250 मरीज प्रतिदिन आ रहे थे, वहीं अब मरीजों का यह आंकड़ा 400 पार हो चुका है। सोमवार को भी 402 मरीज नागरिक अस्पताल में आए। वहीं अन्य दिनाें की बात करें तो रोजाना 400 के करीब मरीज नागरिक अस्पताल में आने लग गए हैं। नागरिक अस्पताल ही नहीं प्राइवेट अस्पतालों की बात की जाए तो प्राइवेट अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या कम नहीं हो रही है। प्राइवेट अस्पतालों में भी एक अस्पताल में औसतन 70 से 80 मरीज रोजाना बुखार के आ रहे हैं।

    हर घर में लोग हो रहे बीमार वायरल बुखार का प्रकोप इतना बढ़ रहा है कि हर घर में मरीज होने लगे हैं। वहीं बुखार एक बार घर में किसी व्यक्ति को हो जाए तो घर वाले सभी लोग बीमार हो जाते हैं। जिसके कारण एक बार परिवार के एक सदस्य के बाद अस्पताल में आने वालों की लाइन लग जाती है। तेज बुखार व ठंड लगने के साथ आ रहा बुखार इन दिनाें जो बुखार हो रहा है, उसमें मरीजों को ठंड लगने के साथ तेज बुखार या बहुत तेज बुखार की शिकायत हो रही है। इनके अलावा सिर दर्द, पेट दर्द व उल्टी की शिकायत भी लोगों को हो रही है।

    बदलते मौसम में ऐसे रखें स्वास्थ्य का ध्यान

    # बदलते मौसम में अपने खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। खाने में पौष्टिक आहार लेना चाहिए, इससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। 

    # ठंडे पदार्थों का सेवन करना भी कई बार वायरल बुखार का कारण बन जाता है इसलिए सावधानी जरूर रखें, और गुनगुना पानी पीयें।

    # इन दिनों दिनभर में 7 से 8 गिलास पानी जरूर पीएं जिससे आपके शरीर में डिहाइड्रेजन की समस्या ना हो।

    # अगर बुखार या सिरदर्द महसूस हो रहा हो तो अपनी मर्जी से दवा न लें। विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह से ही दवा लें।

    # बदलते मौसम में नियमित रूप से योग करना चाहिए। योग भी अच्छा व्यायाम होता है।

    # मौसम बदलते में खांसी और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इससे मरीज को रोजाना भाप लेने के साथ नमक मिले गुनगुने पानी से गरारे करवाएं।

     

    और भी...

  • 12 साल के बच्चे की मौत के बाद बढ़ रहा Nipah Virus का खतरा, जानें लक्षण

    12 साल के बच्चे की मौत के बाद बढ़ रहा Nipah Virus का खतरा, जानें लक्षण

    Nipah virus : केरल (Kerala) में निपाह वायरस (Nipah virus) का ताजा मामला सामने आया है। यहां एक 12 साल के बच्चे की मौत हो गई है। यह वायरस (Nipah virus) ज्यादा न फैले इसके लिए राज्य सरकार की ओर से ठोस इंतजाम किए जा रहे हैं। आइए जानते हैं, यह वायरस कहां से आया और इसके लक्षण और इलाज क्या है।

    मलेशिया में आया था पहली बार मलेशिया में 1998 में निपाह वायरस (Nipah virus) के केस सामने आए थे, जिससे 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। माना जाता है कि मलेशिया (Malaysia) ने पालतू सूअरों को मेजबान (Domesticated Pigs) के रूप में देखा था । भारत में यह वायरस साल 2001 में आया था। जो पश्चिम बंगाल (West Bengal) राज्य में देखने को मिला था। इसके लिए पूरी तरह से चमगादड़ों के द्वारा जो फल खाकर छोड़ दिए जाते हैं, उनको जिम्मेदार ठहराया गया था। 2018 निपाह वायरस के प्रकोप ने राज्य में दर्ज 18 पुष्ट मामलों में से 17 लोगों की जान ले ली थी।

    कैसे फैलता है वायरस इंडियन जर्नल ऑफ वायरोलॉजी (Indian Journal of Virology) की मानें तो संक्रमित सूअरों के डायरेक्ट कांटेक्ट में आने से, जो फल चमगादड खाकर छोड़ देते हैं उनसे, संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति के कांटेक्ट में आने से हो सकता है।

    क्या है वायरस के लक्षण -बुखार -सिरदर्द -बेहोशी -मतली -पेट दर्द -उल्टी -थकान -धुंधली दृष्टि -मरीज कोमा में भी जा सकता है कितने दिन यह वायरस 5 से 14 दिनों तक रहता है वैक्सीन (Vaccine) अभी तक इस वायरस के इलाज के लिए कोई वैक्सीन नहीं बनी है। कैसे करें बचाव -संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में न जाएं -ऐसे फल न खाएं जो किसी पक्षी ने पहले से खाएं हो -पिग के संपर्क में न जाएं

     

    और भी...

  • Health Tips : जानें आपके दिल के लिए कितना खतरनाक हो सकता है Steroids का सेवन

    Health Tips : जानें आपके दिल के लिए कितना खतरनाक हो सकता है Steroids का सेवन

    Steroid : अक्सर हम स्टेरॉयड (Steroid) का नाम सुनते हैं। कोविड के टाइम से यह लगातार चर्चा में बना हुआ है। दरअसल, मानव शरीर के अंदर ही स्टेरॉयड का होर्मोन होता है, जो हमारे शरीर को बैलेंस करता है। जब स्टेरॉयड की कमी हो जाती है, तो कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आप नेचुरल तरीके से स्टेरॉयड ले सकते हैं, लेकिन किसी प्रोडक्ट्स में इसे मिलाकर खाना बैन किया गया है, इसका सेवन आप डॉक्टरों की सलाह से केवल बीमारियों में ही किया जाता है, लेकिन आज तक युवा बॉडी बनाने के चक्कर में स्टेरॉयड का इस्तेमाल करते हैं, जिसकी वजह से उन्हें दिल संबंधित बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है।

    दिल के लिए खतरनाक होता है स्टेरॉयड् का सेवन - हेल्थ एक्सपर्ट्स के मानें तो जो लोग स्टेरॉयड्स (Steroids) का सेवन करते हैं, उनका दिल कमजोर हो जाता है। इसकी वजह से वह ब्लड पंप नहीं कर पाता है। इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। -वहीं जो लोग एनाबोलिक स्टेरॉयड सेवन काफी लंबे समय तक करते हैं, तो उनकी कोरोनरी धमनी के रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। -जो भी लोग स्टेरॉयड्स का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उनके दिल उतना ही कमजोर होता चला जाता है। -स्टेरॉयड से किडनी फेल होने की समस्या, लीवर खराब होना, टेस्टिकल्स के सिकुड़ने की समस्या हो सकती हैं। अगर आप स्टेरॉयड का सेवन बंद कर देते हैं तो इसके साइड इफेक्ट आपको कई सालों तक देखने को मिल सकते हैं।

    स्टेरॉयड का इस्तेमाल कोविड को दौरान पेशेंट्स को दिया गया था। लेकिन इससे कोविड का इलाज नहीं होता है। यह दावा एक रिसर्च में किया जा चुका है। जर्नल ऑफ द अमरीकन मेडिकल एसोसिएशन की मानें तो कोविड की वजह से जो लोग ज्यादा बीमार हुए तो 100 में से 8 लोगों को जीवन बचाया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने यह भी दावा किया है कि स्टेरॉयड से कोरोना का इलाज नहीं होता है।

     

    और भी...

  • ज्यादा ही नहीं कम नमक खाने से भी होता है बड़ा नुकसान, इन बीमारियों का रहता है खतरा

    ज्यादा ही नहीं कम नमक खाने से भी होता है बड़ा नुकसान, इन बीमारियों का रहता है खतरा

    Health Tips : नमक (Salt) आपके घर की कीचन में पाई जाने वाली ऐसी चीज है, जिसके बिना सब कुछ फीका सा लगता है। अगर यह ज्यादा हो जाए तो खाने का स्वाद बिगाड़ देता है और अगर आप कम खाते हैं, तो खाना का स्वाद अच्छा नहीं लगता है। जैसे यह नियम किसी खाद्य पदार्थों पर लागु होता है, ऐसे ही यह आपके स्वास्थ्य (Health) पर भी असर करता है। ज्यादा नमक खाने से शरीर में सोडियम की मात्रा ज्यादा हो जाती है, इससे बीपी हाई (High Blood pressure) की समस्या हो जाती है। वहीं जो लोग कम नमक खाते हैं उन्हें लॉ ब्लड प्रेशर (Low Blood pressure) की प्रोब्लम होती है। यहां आपको कम नमक (Salt) खाने के नुकसान के बारे में बताने जा रहे है।

    1- शुगर कम नमक खाने से सामान्य लोगों के लिए तो नुकसान का होता ही है, लेकिन शुगर के मरीजों के लिए यह बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है। अगर शुगर के मरीज नमक का कम इस्तेमाल करते हैं तो उनका दिल का दौरा पड़ने और स्ट्रोक का खतरा हो सकता है। ऐसे में शुगर पेंशेंट्स अपनी डाइट में उतना नमक जरूर डालें, जिससे वह इन खतरों से टल सके।

    2- ब्लड प्रेशर की समस्या नमक आपकी बॉडी के ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है। नमक में सोडियम पाया जाता है, जो ब्लड प्रेशर में अहम भूमिका निभाता है। शरीर में जब सोडियम ज्यादा होता है, तो ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है और जब कम हो जाता है तो ब्लड प्रेशर को कम कर देता है। इससे दिल से संबंधित बीमारियां हो सकती है।

    3- कोलेस्ट्रोल 2012 के एक शोध की मानें तो कम नमक खाने वाले लोगों में कोलेस्ट्रोल, रेनिन और ट्राइग्लिसराइड का लेवल सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होता है। ऐसे मेंं अपनी शरीर की जरूरत के हिसाब से नमक का सेवन करना चाहिए।

     

    और भी...

  • उम्र के हिसाब से जानें आपको किन Foods को करना चाहिए अपनी डाइट में शामिल

    उम्र के हिसाब से जानें आपको किन Foods को करना चाहिए अपनी डाइट में शामिल

    National Nutrition Week 2021 : नेशनल न्यूट्रेशन वीक (National Nutrition Week) हर साल 1 से 7 सितंबर तक मनाया जाता है। इस वीक में स्वास्थ्य और पोषण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। यहां बताया जा रहा है कि आपको अपनी उम्र हिसाब से किस तरह की चीजों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।

    शिशुओं के लिए (For Child) छोटे बच्चे को संतुलित आहार खिलाना आसान नहीं होता है। इस उम्र में न्यूट्रेशन की काफी जरुरत होती है, जिसमें बच्चे का शारीरिक, मानसिक और विकासात्मक बदलाव होते हैं। बचपन के शुरुआती दिनों में, ऊर्जा (Energy) की अधिक जरुरत होती है क्योंकि बच्चा बढ़ रहा है और उसे प्रोटीन, आवश्यक फैटी एसिड की आवश्यकता होती है, जो मस्तिष्क के बेहतर विकास में मदद करता है। जैसे ही बालक किशोरावस्था में पहुंचते हैं, हमें इसमें कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, जिंक जैसे आवश्यक खनिजों को शामिल करना चाहिए।

    बच्चों के लिए (Food for children) आज कल बच्चे घर का बना हुआ खाना नहीं खाना चाहते हैं, वो फास्ट फूड्स और बाहर की चीजों को खाने के लिए तैयार रहते हैं। जिससे उन्हें शारीरिक पोषण नहीं मिल पाता है। ऐसे में बच्चों को आकर्षित करने के लिए थाली में फिंगर फूड डालने की कोशिश कर सकते हैं। थाली को रंगीन फलों और सब्जियों से सजाया जाना चाहिए। गोभी, हरी चटनी, पनीर की परतों के साथ एक पिनव्हील सैंडविच बनाया जा सकता है। जिसमें वह सब कुछ शामिल होता है। जिसकी एक बच्चे को आवश्यकता होती है। रोल, पैटी में पोषक तत्व मिला सकते हैं और भोजन को बच्चों के लिए रोचक बना सकते हैं।

    20-40 आयु वर्ग के लोगों को क्या खाना चाहिए? 20-40 की आयु में पोषण हमारी हेल्थ को बनाए रखने और बीमारियों को रोकने में मदद करता है। आहार के महत्व पर जोर देता है। यह वह अवधि होती है, जिसमें पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग पोषण संबंधी आवश्यकताएं होती हैं। यह उनकी प्रजनन चरण भी होता है और पुरुषों की तुलना महिलाओं में हमेशा आयरन की डिमांड ज्यादा होती है। महिलाओं में प्रेंग्नेंसी और ब्रेस्ट फीडिंग की एक स्टेज होती है, इसमें विभिन्न पोषक तत्वों और सूक्ष्म पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। उन्हें हाई प्रोटीन, फैटी एसिड, कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयरन और फोलिक एसिड की आवश्यकता होती है। वहीं पुरुषों को इस समय में महिलाओं से ज्यादा एनर्जी की जरूरत होती है।

    40 प्लस वालों को क्या खाना चाहिए 40 सही संतुलन बनाने का समय है। स्वस्थ वसा को आहार में शामिल करना चाहिए और सही भोजन चुनना चाहिए। इस उम्र में एवोकाडो और जामुन समेत उन फलों और सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। जिनमें एंटीऑक्सिडेंट और फाइटोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं। जबकि हरी पत्तेदार सब्जियां आयरन का अच्छा स्रोत है।

    बुजुर्गों के लिए भोजन (60 और ऊपर) यह वह उम्र होती है जब व्यक्ति शरीर में गिरावट देख सकता है और पहले की तरह दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों को करने में असमर्थ हो सकता है। कुछ लोगों को यह अपना भोजन स्वयं तैयार करने में असमर्थ लग सकता है या दांतों की समस्याओं के कारण भोजन को ठीक से चबाने या निगलने में सक्षम नहीं हो सकता है।

     

    और भी...

  • Health Tips : हल्के में न लें फैटी लिवर की बीमारी, ये लक्षण दिखने पर इन चीजों से करें परहेज

    Health Tips : हल्के में न लें फैटी लिवर की बीमारी, ये लक्षण दिखने पर इन चीजों से करें परहेज

    Fatty Liver Disease : फैटी लिवर (Fatty Liver) होना आज के समय में एक कॉमन बीमारी बन गई है। यह बीमारी तब होती है, जब लीवर (Liver) में अतिरिक्त चर्बी (Extra Fat) जमा हो जाती है, ज्यादातर लोगों में कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं, इसलिए उन्हें अधिक समस्या नहीं होती है। हालांकि, कुछ मामले में यह गंभीर बीमारी हो सकती है। आप हेल्दी फूड्स और अपने लाइफ स्टाइल में कुछ बदलाव कर इस समस्या से निपट सकते हैं।

    शरीर में क्या काम करता है लीवर

    1-लीवर शरीर में पित्त (Bile) का उत्पादन करता है, जो पाचन (Digestion) में मदद करता है।

    2- शरीर के लिए प्रोटीन्स बनाता है।

    3- आयरन को स्टोर करता है

    4- पोषक तत्वों को ऊर्जा में बदलता है

    5- ऐसे पदार्थ बनाता है जो आपके रक्त का थक्का बनाने में मदद करते हैं

    6-आपके ब्लड से इम्यून फैक्टर बनाकर और बैक्टीरिया और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर संक्रमण से लड़ने में आपकी हेल्प करता है।

     

    और भी...

  • जानें COVID शॉट लगवाने पर आपकी बॉडी के अंदर क्या होता है और वैक्सीन की दूसरी डोज लेना क्यों है जरूरी

    जानें COVID शॉट लगवाने पर आपकी बॉडी के अंदर क्या होता है और वैक्सीन की दूसरी डोज लेना क्यों है जरूरी

    कोरोना वायरस (Coronavirus) से लड़ने के लिए वैक्सीनेशन (Vaccination) कराना बहुत जरूरी है, सभी देशों की सरकारें कोविड वैक्सीन लगवाने के लिए लोगों को जागरूक कर रही है, ताकि वह जल्द ही वैक्सीन सेंटर (Vaccine Center) जाकर वैक्सीन लगवाएं। भारत की बात करें तो यहां 65 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन की पहली डोज लग चुकी है और लगभग 15 करोड़ लोग दोनों डोज ले चुके हैं। हालांकि अभी भी लोग वैक्सीन लगवाने से डर रहे हैं, क्योंकि वैक्सीनेशन (Vaccination) के बाद कुछ साइड इफेक्ट्स (Side Effects) देखने को मिल रहे हैं, जिसकी वजह से लोग कोविड का टीका (Covid Vaccine) नहीं लगवाना चाहते हैं। आपकी चिंता को दूर करने के लिए यहां बताया जा रहा है कि वैक्सीनेशन के बाद आपके शरीर के अंदर क्या होता है और कुछ लोगों में यह साइड इफेक्ट्स क्यों नजर आते हैं।

    जानकारी के मुताबिक, वैक्सीनेशन (Vaccination) एक ऐसी प्रक्रिया है, जो इम्यूनिटी (Immunity) को बढ़ाती है और भविष्य में होने वाले संक्रमण (Infection) से लड़ती है। वैक्सीन (Vaccines) में कुछ ऐसे बैक्टीरिया या परजीवी होते हैं जो कोविड 19 के इनफेक्शन से लड़ने में मदद करते हैं। जब वैक्सीन को शरीर में लगाया जाता है तो टीके में मौजूद एजेंट्स कोशिकाओं और टिसूज में पहुंच जाते हैं। शरीर में कुछ 'डेंड्रिटिक' (Dendritic) कोशिकाएं होती हैं, जिनका काम शरीर में बाहर से आने वाले (intruders) को मॉनिटर करना होता है। पेट्रोलिंग सेल (Patrolling cells) इसे पहले कभी नहीं देखे गए एजेंट को नोटिस करते हैं और शरीर को इसके खिलाफ अलार्म देते हैं।

    भारत में कोविशील्ड और को-वैक्सिन को टीके की दोनों खुराक लेना जरूरी होता है। पहला शॉट शरीर में न्यूट्रलाइज़िंग एंटीबॉडी बनाता है, वहीं दूसरा शॉट अल्पकालिक सुरक्षात्मक एंटीबॉडी के अलावा शरीर को दीर्घकालिक स्मृति कोशिकाओं (Long term Memory Cells)को बनाने में मदद करता है। इसलिए वैक्सीन की दोनों डोज लेना बहुत जरूरी है। सिंगल डो़ज से कोविड से फाइट करना मुश्किल हो जाएगा।
     

    और भी...

  • Health Tips : दिखने में लगती है जंगली घास जैसी, लेकिन बहुत काम की चीज है ये जड़ी बूटी

    Health Tips : दिखने में लगती है जंगली घास जैसी, लेकिन बहुत काम की चीज है ये जड़ी बूटी

    Shatavari Health Benefits : शतावरी (Shatavari) के बारे में ज्यादा जानकारी आम लोगों को नहीं है। लेकिन जंगलों में उगने, फलने-फूलने लहलहाने वाली यह औषधीय बूटी बहुत उपयोगी है, जो अनेक बीमारियों में कारगर है। इसे सतावर, सतमूली, नारायणी, तालमूली जैसे कई नामों से जाना जाता है। शतावरी को आप पंसारी की दुकान या जड़ी-बूटी बेचने वालों से ले सकते हैं।

    शतावरी के फायदे

    1- वजन कंट्रोल : शतावरी से वजन कंट्रोल में मदद मिलती है, इसका सेवन करने से आपको काफी लाभ मिलेगा।
    2-ह्रदय और मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी : शतावरी में सल्फोराफेन, कैंसर रोधी गुणों से भरपूर होता है। इसका सेवन ह्रदय और मधुमेह रोगियों के लिए भी उपयोगी है।

    3-प्रतिरोधक क्षमता- शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी शतावरी का खूब इस्तेमाल होता है।

    4-हड्डिया मजबूत बनाने में सहायक -इसमें पाया जाने वाला कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता है।

    5- शारीरिक क्षमता -जड़ी-बूटियों में प्रमुख स्थान रखने वाली शतावरी शारीरिक क्षमता को बढ़ाता है।

    ऐसे करें सेवन -

    रोज एक-एक चम्मच सुबह-शाम शतावरी का सेवन असमय झड़ते बालों की रोकथाम कर चेहरे पर पड़ी झुर्रियों को मिटाता है। -चेहरे पर दाग धब्बे, झाइयां मिटाने के लिए कच्चे दूध में इसका चूर्ण मिलाकर उबटन की तरह चेहरे पर लगाने से उक्त परेशानी दूर हो चेहरे पर निखार आता है।
     

    और भी...

  • मसूर की दाल के फायदे जानकर हैरान हो जाएंगे आप, आज से ही शुरू कर देंगे खाना

    मसूर की दाल के फायदे जानकर हैरान हो जाएंगे आप, आज से ही शुरू कर देंगे खाना

    National Nutrition Week 2021 : ज्यादातर घरों में अरहर, मूंग और चने की दालें खाई जाती है। इनके सेवन के अपने फायदे हैं, लेकिन न्यूट्रिएंट्स के लिहाज से मसूर की दाल (Masoor ki dal) को न्यूट्रीशन का पावर हाउस (Power House Nutrition) कहा जाता है। डाइटीशियन संगीता मिश्र बताती हैं कि आमतौर पर मसूर दाल की 2-3 किस्मों से ही लोग वाकिफ हैं, जबकि दुनिया भर में इसकी 12 किस्मों की खेती की जाती है। इसमें इतनी प्रचुर मात्रा में प्रोटीन (Protein), फाइबर (Fiber), पोटेशियम (Potassium), जिंक, कैल्शियम (Calcium), नायसिन जैसे मिनरल्स और विटामिन पाए जाते है, लेकिन इसके फायदों को जानने के बाद आप इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।

     

    और भी...

  • बारिश के दिनों में बढ़ रहा इस बीमारी का खतरा, ये 9 लक्षण बता देंगे आप सुरक्षित है या नहीं ?

    बारिश के दिनों में बढ़ रहा इस बीमारी का खतरा, ये 9 लक्षण बता देंगे आप सुरक्षित है या नहीं ?

    Health Tips : बारिश के दिनों ( Rainy Days) में कई तरह के बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। ऐसे में अगर भोजन और पानी की स्वच्छता का ध्यान ना रखा जाए तो आप टाइफायड (Typhoid Fever) के शिकार हो सकते हैं। टाइफायड (Typhoid) को मियादी बुखार, आंत्र ज्वर या मोतीझरा नाम से भी जाना जाता है। यह संक्रमित पानी और भोजन से फैलने वाली बीमारी है, जो साल्मोनेला टाइफी, साल्मोनेला पैराटाइफी ए और बी बैक्टीरिया से होता है। अगर इस पर शुरुआत में ध्यान न दिया जाए तो यह आगे चलकर काफी भयानक रूप ले लेता है। आइए जानते हैं, इस बीमारी के लक्षण और ट्रीटमेंट्स के बारे में।

    पहले सप्ताह के प्रमुख लक्षण (Typhoid Fever Symptoms)

    1-टाइफायड का सबसे कॉमन लक्षण लगातार तेज बुखार आना है।
    2-ठंड लगने के साथ-साथ बुखार में उतार-चढ़ाव आता रहता है।

    3- पेट दर्द

    4-वॉमिटिंग

    5-थकावट-कमजोरी महसूस होना

    6-माथे में दर्द

    7-बदन दर्द

    8-भूख कम लगना

    9-मल में खून आना


    दूसरा सप्ताह

    1-दूसरे सप्ताह में चेस्ट के निचले हिस्से और पेट पर रेड रैशेज या स्पॉट्स पड़ते हैं 2-दिल की धड़कन धीमी होने लगती है, जिसे ब्रैडिकार्डिया कहते हैं। 3-लिवर में सूजन आ जाती है। 4-मरीज को कब्ज हो जाता है, जिससे आंतों में बैक्टीरियल इंफेक्शन ज्यादा बढ़ जाता है।

    तीसरा सप्ताह

    बैक्टीरिया के टॉक्सिन स्राव की वजह से तीसरे सप्ताह में डायरिया होता है और वजन कम होने लगता है। मरीज की आंतों में अल्सर बन सकता है।

    प्रमोटेड कंटेंट A 26-Year-Old Girl From Raipur Became A Millionaire Overnight Do copy paste work and earn upto Rs.4000/day from home! बीमार पति और एक बच्ची, घर से ही काम करके 8 लाख महीना कमाती हूं. Raipur Millionaire Reveals: How To Make Money Working From Home सोरायसिस 2 दिन में चली जाएगी यदि आप हर सुबह ये लगाएंगे भारत का नं 1 तेल जो बालों को फिर से सिर्फ एक हफ्ते में उगाता है अपनी मर्दाना समस्याओं का करें अंत, इस विधि से क्षमता को बढ़ाएं Unbelievable Story Of A Man Who Earns Millions By Online Trading! He Became A Billionaire In A Month If You Have Joint Pain, Read It Before It Gets Deleted! 1-माइल्ड स्टेज जनरल फिजीशियन डॉ. नरेश कुमार बताते हैं कि टाइफायड होने पर डॉक्टर की सलाह से ही इसका उपचार करवाना चाहिए। माइल्ड स्टेज पर ओरल एंटीबॉयोटिक्स मेडिसिन दी जाती है। मरीज को एंटीबॉयोटिक्स मेडिसिन का पूरा कोर्स करना जरूरी है, वरना ठीक होने में समय लग सकता है या दोबारा उबर सकता है। अगर ओरल मेडिसिन देने पर भी पेशेंट की कंडीशन में सुधार ना हो रहा हो तो अस्पताल में एडमिट करने की जरूरत पड़ती है।

    2-सीवियर या कॉम्प्लीकेटेड स्टेज डॉ. नरेश कुमार का कहना है कि सीवियर या कॉम्प्लीकेटेड मामलों में मरीज को ब्लड इंट्रावेंस या आईवी के जरिए ग्लूकोज-आईवी फ्लयूड और एंटीबॉयोटिक इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इसके अलावा सिंपटोमैटिक थेरेपी भी दी जाती है। सीवियर मामलों में मरीज को स्टेरॉयड दिए जाते हैं। डिस्चार्ज होने के बाद भी मरीज को अपने डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए ताकि सीवियर कॉम्लीकेशन ना हों। टाइफायड ठीक होने के 3 महीने बाद टाइफायड की वैक्सीन जरूर लगवा लेनी चाहिए, ताकि दोबारा ना हो।

     

    और भी...

  • इस वजह से युवाओं में बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा 40 साल की उम्र में हुई एक्टर सिद्धार्थ शुक्ला की मौत

    इस वजह से युवाओं में बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा 40 साल की उम्र में हुई एक्टर सिद्धार्थ शुक्ला की मौत

    Sidharth Shukla Death : बिग बॉस 13 के विनर सिद्धार्थ शुक्ला (Sidharth Shukla) की हार्ट अटैक से अचानक मौत हो गई है। वह 40 साल के थे, लेकिन इतनी कम उम्र में हार्ट अटैक आना चिंता का विषय है। सभी के मन में ये ही सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी जल्दी हार्ट अटैक कैसे आ सकता है। आमतौर पर दिल की बीमारी एक उम्र के बाद देखी जाती थी, लेकिन अब यह युवाओं में भी बढ़ती जा रही है। आइए जानते हैं आपका बदलता लाइफ स्टाईल, खान-पान और तनाव आपको कैसे नुकसान पहुंचा सकता है।

    1- वर्क प्रेशर इन दिनों काम का प्रेशर काफी बढ़ गया है। काम के चक्कर में युवा अपनी डाइट पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। जिसका सीधा असर उनकी सेहत पर पड़ता है। जिसकी वजह से कम उम्र में ही इस तरह की समस्याएं देखने को मिल रही है। ऐसे में काम के साथ-साथ आप अपने खाने-पीने का ध्यान जरूर रखें।

    2- धूम्रपान और अल्कोहल का सेवन धूम्रपान और अल्कोहल का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, लेकिन इसके बाद भी युवा इन बुरी आदतों को नहीं छोड़ते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो युवाओं की ये आदतें उन्हें दिल संबंधित बीमारियों से पीड़ित कर सकती हैं। युवाओं को सलाह दी जाती हैं कि वो धूम्रपान और शराब का सेवन करने से बचे।

    3-स्टेरॉयड का सेवन स्टेरॉयड भी दिल संंबंधित बीमारियों का एक कारण हो सकती है। बॉलीवुड सेलिब्रिटीज को देखकर युवाओं में भी बॉडी बनाने का क्रेज रहता है और जिम के साथ कई ऐसी हैवी न्यूट्रीशन लेते हैं। कुछ युवा स्टेरॉयड भी ले लेते हैं। जिसकी वजह से हार्ट अटैक के चांस बढ़ जाते हैं।

    4- तनाव कोविड आने के बाद से युवा मानसिक तौर पर काफी परेशान रहने लगे है। काम के साथ-साथ वह ज्यादा तनाव भी ले रहे हैं। ज्यादा तनाव की वजह से हार्टअटैक का खतरा बढ़ सकता है। जब आपको लग रहा है कि आपको तनाव हो रहा है, तो आप अपने दोस्तों से बात करें और खुद को किसी ऐसे काम में लगाएं, जिससे आपको खुशी मिले और आपका तनाव कम हो। तनाव के दौरान धूम्रपान करने से बचे। ऐसा करना आपकी सेहत के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है।

    5-जंक फूड का सेवन आज कल युवा पीढ़ी जंक फूड्स पर ही डिपेंड रहती है और घर का खाना खाना पंसद नहीं करती है। जंक फूड्स के आपका कॉलेस्ट्रोल का लेवल बढ़ जाता है, जो हार्ट अटैक का कारण बन सकता है। इससे बचने के लिए आप अपनी डाइट में हेल्दी फूड़्स का शामिल करें। जंक फूड्स को खाने से बचें।

     

    और भी...