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  • तली भुनी चीजों की जगह खाएं रोस्टेड स्नैक्स, वजन कम होने के साथ-साथ मिलेंगे कई फायदे

    तली भुनी चीजों की जगह खाएं रोस्टेड स्नैक्स, वजन कम होने के साथ-साथ मिलेंगे कई फायदे

    ज्यादातर लोग स्नैक्स में तला, भुना या जंक फूड ही खाना पसंद करते हैं। जोकि सेहत के लिए तो हानिकारक होता ही है साथ ही इससे आपका वजन भी बढ़ता है। वहीं आपको बता दें कि आपका स्नैक्स भी यह डिसाइड करता है कि आपका वेट बढ़ेगा या घटेगा। वहीं अगर आप भी स्नैक्स खाने के शौकीन हैं और आप भी वेट भी कम करना चाहते हैं तो इसके लिए रोस्टेड स्नैक्स काफी अच्छा विकल्प है। इसमें कम कैलोरी होने से यह आपका वेट भी नहीं बढ़ाता हैं और आपको कई फायदे भी पहुंचाता है। आज हम आपको बताएंगे एसे ही रोस्टेड स्नैक्स के बारे में।

    चने- इसमें फाइबर और प्रोटीन भरपूर मात्रा में होते हैं। इसके सेवन से आपका वेट भी जल्दी कम होता है। वहीं इसे खाने से आपको जल्दी भूख भी नहीं लगती है। जिससे आपका वेट कंट्रोल में रहता है।

    मखाने- भूने हुए मखाने खाने से आपका वेट कम होता है। इसमें कैलोरी और ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। वहीं कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है। इसके लिए आप मखानों को माइक्रोवेव में भून कर खा सकते हैं।

    भिंडी- हरी सब्जियां काफी पोष्टिक होती हैं। यह डायबिटीज और दिल के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद होती हैं। आप रोस्टेड भिंडी को स्नैक्स के अलावा दाल और चावलल के साथ भी खा सकते हैं।

    सीड्स- इसके लिए आप सूरजमुखी, लौकी और अलसी के बीजों को भून कर भी खा सकते हैं। इसमें प्रोटीन बहुत ज्यादा पाई जाती है।

    मटर- इसके लिए आप मटर को अच्छे से धोकर सुखाएं। इसके बाद आप इसे 375 डिग्री तापमान पर 45 मिनट तक बेक करके खाएं।

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  • कोरोना काल में गले में हो रही खराश को ना समझे हल्का, पानी में ये दो चिजें मिलाकर पीने से मिलेगा राहत

    कोरोना काल में गले में हो रही खराश को ना समझे हल्का, पानी में ये दो चिजें मिलाकर पीने से मिलेगा राहत

    कोरोना का खतरा हर रोज बढ़ता ही जा रहा है। वहीं कोरोना के बढ़ते केस के साथ-साथ कोरोना के लक्षण भी बढ़ते जा रहे हैं। वहीं इन लक्षणों में गले की खराश की दिक्कत भी शामिल है। अगर आपको गले की खराश के साथ और भी दिक्कतें हो रही हैं तो आप उन्हें हल्के में न लें और तुरंत चेकअप करवाएं। वहीं अगर आपको सिर्फ गले में खराश की समस्या है तो तुरंत इसका इलाज कराएं। इसके लिए आप घरेलू नुस्खे भी अपना सकते हैं। वहीं आज हम आपको गले की खराश की समस्या दूर करने के लिए घरेलू उपचार बताने जा रहे हैं, जिससे आपको काफी आराम मिलेगा। तो आइए जानते हैं। गले की खराश से राहत पाने के लिए घरेलू उपाय।

    इसके लिए आपको अदरक और शहद की जरूरत पड़ेगी। यह दोनों ही चीजें घर में आसानी से मिल जाती हैं। यह दोनों ही चीजें इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए भी काफी फायदेमंद होती है। आप इन दोनों चीजों की मदद से गले की खराश की दिक्कत से भी राहत पा सकते हैं।

    विधी

    - इसके लिए आप सबसे पहले एक अदरक का टुकड़ा लें और उसे पानी में अच्छी तरह धोकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काटें।

    - इसके बाद अब अदरक के इन टुकड़ों को दो गिलास पानी में मिलाकर किसी बर्तन में उबाल लें।

    - इसे तब तक उबालें जब तक यह पानी एक गिलास न हो जाए।

    - अब पानी को छानकर एक गिलास में रखें और इसमें एक चम्मच शहद मिक्स करें।

    - अब आप इस पानी को धीरे धीरे पीते रहें। इसका सेवन करने के साथ-साथ आप इसी पानी से गरारे भी कर सकते हैं।

    इससे आपकी गले की खराश की दिक्कत बहुत ही जल्द ठीक हो जाएगी।

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  • ये गलतियां हमारे Immune System को कर सकती है वीक

    ये गलतियां हमारे Immune System को कर सकती है वीक

    कोरोना महामारी ने सभी को हिला कर रख दिया है। तमाम कोशिशों के बाद भी अभी तक कोई खास सफलता हासिल नहीं हुई है। ऐसे में लोगों को शुरू से ही अपना इम्यून सिस्टम मजबूत रखने के लिए कहा जा रहा है। जिसके लिए डाइट पर खास ध्यान देने की सलाह दी जा रही है। अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत रखकर बीमारियों से लड़ा जा सकता है। वहीं हम कई ऐसी गलतियां करते हैं कि जिसका असर हमारे इम्यून सिस्टम पर पड़ता है और हमारा इम्यूनिटी सिस्टम वीक होने लगता है। ऐसे में आपको अपने इस खान पान की गलत आदतों पर ध्यान देने की खास जरूरत होती है। इसी बीच आज हम आपकी उन गलत आदतों के बारे में बताने जा रहे हैं।

    चीनी

    कई लोग मीठे खाने के काफी शौकीन होते हैं। मीठा खाना सेहत के लिए अच्छा होता है, लेकिन मीठा खाने से आपका इम्यून सिस्टम वीक होता है। हाल में हुई स्टडी की मानें तो ज्यादातर लोग सुबह उठते ही कम से कम 100 ग्राम चीनी का सेवन करते हैं। आपकी इस से आदत शरीर में बैक्टीरिया को रोकेने वाले प्रतिरक्षा कोशिकाओं की क्षमता कमजोर होने लगती है।

    नमक

    खाने में नमक का ज्यादा सेवन करने से ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है। इसके साथ ही जब आप नमक का ज्यादा सेवन करते हैं तो आपका इम्यून सिस्टम कमजोर होने लगता है। इसके साथ ही आपके शरीर में कई बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।

    शराब

    यह तो सभी जानते हैं कि शराब शरीर के लिए कितनी ज्यादा हानिकारक होती है। इसका बुरा असर आपके लिवर और इम्यून सिस्टम पर पड़ता है। जब आप भारी मात्रा में अल्कोहल का सेवन करते हैं तो आपका इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है और आपको कई तरह का इंफेक्शन होने का भी खतरा रहता है। इतना ही नहीं शराब पीने वाले शख्स से किसी भी बीमारी से उबरने में अच्छा खासा समय लगता है।

    कैफीन

    ज्यादातर लोगों को दिन भर में कई बार चाय, कॉफी और सोडा पानी पीने की आदत होती है। इसका सेवन करने से वो फ्रेश फील करते हैं। वहीं जब आप ज्यादा कैफीन का सेवन करने लगते हैं तो आपके शरीर के लिए खतरा बढ़ जाता है। आपके इम्यून सिस्टम को बुरी तरह से कमजोर कर देती है। इसके साथ ही आपको बता दें कि सोने से कम से कम 6 घंटे पहले इसका सेवन करने से बचें।

    कोराना वायरस से बचने के घरेलू इलाज 

     

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  • योगा कर महिलाएं बन सकती हैं स्वस्थ और सुंदर, मिलेंगे कई तरह के फायदे

    योगा कर महिलाएं बन सकती हैं स्वस्थ और सुंदर, मिलेंगे कई तरह के फायदे

    आज के दौर में पुरुष हों या महिलाएं, तमाम तरह की जिम्मेदारियों को निभाने और घर-बाहर के वर्क प्रेशर की वजह से मेंटली स्ट्रेस में रहते हैं। इससे शारीरिक स्वास्थ्य और सौंदर्य पर भी बुरा असर पड़ता है। इनसे निजात पाने का सरल और कारगर उपाय है-योगाभ्यास।

    बैलून पोज योग: आप कॉलेज गोइंग गर्ल हैं, वर्किंग वूमेन हैं या हाउस वाइफ बैलून पोज फेस योग करके अपने चहरे को खूबसूरत और दमकता हुआ बना सकती हैं। इसके लिए आप गहरी सांस लें और मुंह में इतनी हवा भरें जैसे गुब्बारा फुलाने के लिए हवा भरते हैं। पांच सेकेंड के लिए इसी मुद्रा में रहें। सांस को रोककर रखें। भरी हुई हवा को मुंह के अंदर दाएं-बाएं घुमाएं। यह प्रोसेस 5 बार दोहराएं। इसे कहीं भी कभी भी कर सकते हैं। इस को करने से चेहरे पर फैट नहीं जमती। साथ ही यह पोज जबड़े की हड्डी को मजबूत बनाता है। ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है। पिंपल्स की प्रॉब्लम दूर होती है। इससे गालों की झुर्रियां दूर होती हैं और चेहरे की त्वचा का कसाव बना रहता है।

    नौकासन: इस आसान को करते समय शरीर का आकार नाव जैसा होता है इसलिए इसे नौकासन कहते हैं। इसे करने से पेट के फैट को कम किया जा सकता है। यह पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है और साथ ही साथ सिर से लेकर पैर तक फायदा पहुंचाता है। महिलाओं के गर्भवती होने के पहले और बाद में यह आसन उनके स्वास्थ्य में अहम भूमिका निभाता है। इसे करने से साइटिका के निवारण में फायदा होता है। नौकासन करते समय पेरों को सामने की और फैलाकर बैठ जाइए और अपने शरीर को नौका चलाने के अंदाज में संचालित कीजिए। जितना संभव हो सके आगे पीछे शरीर को झुकाएं। इस तरह से कम से कम 10 से 12 बार करें। गर्भवती महिलाएं डॉक्टर से सलाह लेकर ही इस आसान को करें। मन को शांत कर नई ऊर्जा से भरता है।

    वज्रासन: वज्रासन करना सभी के लिए फायदेमंद है। वज्रासन, महिलाओं में पीरियड्स संबंधी दिक्कतों से भी मुक्ति दिलाता है। जो लड़कियां रोज वज्रासन करती हैं, उन्हें पीरियड्स के दौरान क्रैंप्स, कब्ज, गैस, डिस्टर्ब स्टमक जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है। बेहतर परिणाम के लिए आपको हर दिन 10 से 15 मिनट वज्रासन जरूर करना चाहिए। वज्रासन करने के लिए आप अपने दोनों पैरों को पीछे की तरफ मोड़ते हुए घुटनों के बल बैठ जाएं। कमर, पीठ और कंधे सीधे रखें। गर्दन को सीधा रखते हुए मुंह सामने की तरफ रखें। दोनों हाथों को घुटनों के ऊपर या ध्यान मुद्रा में गोद में रखें। आंखें बंद कर मन को शांत करने का प्रयास करें और गहरी सांसे लें।

    प्राणायाम: प्राणायाम करते समय जितना फोकस स्लो डीप ब्रीदिंग पर होगा, उतना ही वो तन-मन को बेहतर रखेगा। प्राणायाम न सिर्फ श्वांस और जीवन के स्तर को बढ़ाता है, बल्कि बिगड़े मूड को बेहतर करने में भी कारगर होता है।

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  • क्या भारत में अब कमजोर पड़ रहा कोरोना, पहले की तरह खतरनाक नहीं रहा वायरस

    क्या भारत में अब कमजोर पड़ रहा कोरोना, पहले की तरह खतरनाक नहीं रहा वायरस

    Coronavirus: भारत में कोरोना वायरस को लेकर हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या भारत में ढ़ाई लाख के पार पहुंच गई है। इंफेक्शन के मामले में भारत ने अब इटली को भी पीछे छोड़ दिया है। भारत दुनिया का पांचवा सबसे ज्यादा कोरोना केस वाला देश बन गया है। जिसके बाद सभी की चिंता काफी बढ़ गई है, लेकिन इसी बीच एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। खबरों की मानें तो भारत में अब कोरोना कमजोर पड़ रहा है।

    कोरोना पहले की तरह खतरनाक नहीं रहा

    भारत में कोरोना के मामले भले ही तेजी से फैल रहे हैं, लेकिन अब यह पहले की तरह इतना खतरनाक नहीं रहा है। कहा जा रहा है कि यह खतरनाक वायरस अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ते जा रहा है। हो सकता है कि कोरोना की चपेट में ज्यादा लोग आएं, मगर इससे मरने वालों की संख्या कम होगी।

    बताया जा रहा है कि वायरस दो तरह के होते हैं। एक वायरस काफी खतरनाक होता है दूसरा वायरस कमजोर होता है। वहीं खतरनाक वायरस अब खत्म हो चुका है। जिसके साथ वायरस काफी कमजोर पड़ गया है और कोरोना की चपेट में आकर लोगों के मरने का चांस काफी कम हो गया हैं।

    जून और जुलाई में कोरोना के सबसे ज्यादा केस देखने को मिल सकते हैं

    बताया जा रहा है कि कमजोर वायरस तेजी से बढ़ता है, लेकिन इसका खतरा काफी कम होता है। वहीं एक्सपर्ट की मानें तो भारत में कोरोना वायरस के सितंबर महीने तक पूरी तरह से खत्म होने की संभावना है। इसके साथ ही जून और जुलाई में कोरोना के सबसे ज्यादा केस देखने को मिल सकते हैं।

    अपना इम्यून सिस्टम मजबूत रखें

    शुरू से ही लोगों को कोरोना से बचाव के लिए अपना इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत रखने के लिए सलाह दी जा रही है। जिस शख्स का इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत है उसे दूसरों के मुकाबले कोरोना का कम खतरा है। ऐसे में सभी के लिए बहुत जरूरी है कि लोग अपना इम्यून सिस्टम मजबूत रखें।
     

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  • टिड्डियों ने अभी तक 60 से 70 हजार हेक्टेयर फसल खराब कर दी- एक्सपर्ट्स

    टिड्डियों ने अभी तक 60 से 70 हजार हेक्टेयर फसल खराब कर दी- एक्सपर्ट्स

    जहां एक तरफ कोरोना के चलते देश काफी परेशान है। वहीं दूसरी तरफ इस साल टिड्डियों ने पिछले तीन दशक का सबसे बड़ा हमला बोला है। जिससे राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, एमपी, पश्चिम यूपी और महाराष्ट्र के किसान काफी डर गए हैं। वहीं हालातों को देखते हुए केंद्र सरकार ने 12 राज्यों में एडवाइजरी जारी की है। वहीं केन्द्र और राज्य सरकार की टीमें टिड्डियों के इलाकों का पता करने में लगी हैं। टिड्डियों के इलाके की पहचान करने के लिए टीमें ड्रोन, ट्रेक्टर और मिनी ट्रकों की मदद ले रही हैं।

    60 से 70 हजार हेक्टेयर फसल खराब कर दी

    किसान देसी तरीकों से इन टिड्डियों को भगाने में लगे हुए हैं। वहीं एक्सपर्ट्स का कहना है कि टिड्डियों ने अभी तक 60 से 70 हजार हेक्टेयर फसल खराब कर दी है। एक्सपर्ट्स की मानें तो जो टिड्डियां आई हैं वो अंडे नहीं देने वाली हैं। वो अभी फसल खाएंगी। यह खरीफ फसल पर दूसरा अटैक कर सकती हैं। किसानों के लिए यह टिड्डियां काफी परेशानी भी खड़ी कर सकती हैं। इसी बीच आज हम आपको इससे जुड़ी तमाम जानकारी देने जा रहे हैं।

    टिड्डियां पूरी तरह से हरियाली को खत्म कर दी

    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक्सपर्ट का कहना है कि यह टिड्डियां पूरी तरह से हरियाली को खत्म कर देती हैं। अभी तो यह फल और सब्जियों को नुकसान पहुंचा रही हैं। इन टिड्डियों को कहीं भी हरी पत्ती दिखाई देती है तो उन्हे ये खा जाती हैं। वहीं जो अभी टिड्डियां आई हैं यह अभी अंडे देने वाली नहीं हैं। यह अभी सिर्फ फसल खाएंगी और खुद को डेवेलप करेंगी।

    टिड्डियां 2 तरह तकी होती हैं

    - एक टिड्डी भूरे रंग की होती है, जो एंकात में रहती हैं और इनके बच्चे हरे रंग के होते हैं। इस तरह की टिड्डियां ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाती हैं।

    - दूसरी तरह की टिड्डियां दल बनाकर रहती हैं। यह काले और पीले रंग के अंडे देती हैं। इनके बच्चें एक महीने तक नहीं उड़ते हैं। यह टिड्डियां पंख मजबूत होने के बाद ही उड़ती हैं।

    एक दल में 4 से 8 करोड़ टिड्डियां होती हैं

    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि टिड्डियों के एक दल में 4 से 8 करोड़ टिड्डियां होती हैं। वहीं इनका दल इससे भी बड़ा हो सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि इन्होंने अपना दल कितना बड़ा बनाया है। यह एक वर्ग किमी के दायरे में फैली होती हैं। वहीं एक टिड्डी दल एक रात में 3500 लोगों के भोजन करने के बराबार खाना खा जाती हैं।

    ऐसे में क्या करें

    - टिड्डी दल को कैमिकल की मदद से भी कंट्रोल किया जा सकता है। इसके लिए किसान पेस्टीसाइड्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। इतनी भारी संख्या में टिड्डियों को रोकने के लिए यही तरीका अपनाया जा सकता है। इन्हें रोकने के लिए सबसे पहले इस दल को बिखेरना बहुत जरूरी है। वहीं अगर 30 फीसद भी दल की टिड्डियों को खत्म कर दिया जाए तो इनता दल बिखर जाता है और फिर यह फसलों पर भी नहीं बैठती हैं।

    - रेगिस्तान इलाकों में किसान खाई खोद देते हैं जिससे टिड्डियां यहां बैठे और अंडे दे, तो लोग उससपर मिट्टी डाल दें।

    - कई बार किसान इस समस्या से निपटने के लिए इस पर पेट्रोल डालकर आग भी लगा देते हैं।

    - इनसे बचने के लिए किसान खेतों की रखवाली करें।

    - खेतों में धुंआ भी कर सकते हैं।

    - थाली बजाकर भी टिड्डी दल को भगाया जा सकता है।

    - इन्हें भगाने के लिए डीजे भी बजाया जा सकता है।

    एक दिन में 120 किमी से 150 किमी तक उड़ सकती हैं

    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह टिड्डियां एक दिन में 120 किमी से 150 किमी तक उड़ सकती हैं। सुबह होते ही यह बहुत जल्दी फरार होती हैं।एक्सपर्ट की मानें तो इन टिड्डियों का 64 देशों में आना जाना लगा रहता है। यह दक्षिण ईरान और दक्षिण- पश्चिम पाकिस्तान में पैदा होती हैं।

    भारत में इनका आने का समय जून और जुलाई है

    किसान के लिए सरकार ने इसलिए एडवाइजरी जारी की है कि क्योंकि बरसात के साथ ही रेगिस्तानी इलाकों से टिडि्डयाें का दल उड़कर पश्चिम-उत्तर और मध्य भारत के राज्यों में पहुंच सकता है। वहीं भारत में इनका आने का समय जून और जुलाई का महीना है।

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  • Chocolate Benefits: चॉकलेट खाने से शरीर को होते है कई तरह के फायदे

    Chocolate Benefits: चॉकलेट खाने से शरीर को होते है कई तरह के फायदे

    चॉकलेट खाने का बच्चे से लेकर बड़ा हर कोई शौकीन होता है। वहीं हमने हमेशा लोगों को यही कहते हुए सुना होगा कि चॉकलेट खाने से लोगों के दांत खराब हो जाते हैं और इसे खाने से वजन भी बढ़ता है। वहीं हाल ही में हुई रिसर्च से पता लगा है कि चॉकलेट खाने से शरीर को कई तरह का फायदा भी पहुंचता है।

    चॉकलेट कोको नाम के पेड़ के द्रव्य से बनती है

    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चॉकलेट कोको नाम के पेड़ के द्रव्य से बनती है। इस पेड़ में बहुत ज्याजा मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है। वहीं इसी बीच आज हम आपको चॉकलेट खाने से होने वाले फायदे के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं कि क्या हैं चॉकलेट खाने के फायदे।

    सेहत के लिए काफी फायदेमंद होती है

    कोको पेड़ के द्रव्य से डार्क चॉकलेट बनाई जाती है, जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद होती है। कोको में ज्यादा मात्रा में खनिज और घुलनशील फाइबर पाए जाते हैं। वहीं कोको में मैग्नीशियम, लोहा, पोटेशियम, जिंक के अलावा भी कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो कि शरीर को फायदा पहुंचाते हैं।

    बीपी और हार्ट अटैक जैसी बीमारियों में मिलता है फायदा

    डार्क चॉकलेट में फ्लेवोनोल्स पाए जाते हैं, जो नाइट्रिक ऑक्साइड का निर्माण करते हैं, जिससे धमनियां शक्तिशाली बनती हैं और रक्त प्रवाह में बाधा नहीं आती है। शरीर में यदि रक्त प्रवाह सुचारू रूप से काम करता है तो दिल व मस्तिष्क भी उचित कार्य करता है। वहीं चॉकलेट बीपी और हार्ट अटैक जैसी बीमारियों में काफी फायदा पहुंचाता है।

    चॉकलेट एंटीऑक्सीडेंट का महत्वपूर्ण स्त्रोत

    डार्क चॉकलेट एंटीऑक्सीडेंट का महत्वपूर्ण स्त्रोत है। बॉडी में होने वाले बाहरी अटैक को रोकने के लिए एंटीऑक्सीडेंट का लेना बहुत जरूरी होता है।

    दिल व मस्तिष्क भी उचित कार्य करता है

    डार्क चॉकलेट खाने से शरीर को डार्क चॉकलेट में फ्लेवोनोल्स पाए जाते हैं, जो नाइट्रिक ऑक्साइड का निर्माण करते हैं, जिससे धमनियां शक्तिशाली बनती हैं और रक्त प्रवाह में बाधा नहीं आती है। शरीर में यदि रक्त प्रवाह सुचारू रूप से काम करता है तो दिल व मस्तिष्क भी उचित कार्य करता है।

    सकारात्मक असर आपके शरीर पर भी पड़ता है

    रिसर्चर्स का कहना है कि डॉर्क चॉकलेट में मौजूद कोको फ्लैवनॉल झर्रियों को नहीं आने देता है। इसके साथ ही इसे खाने से माइंड भी अच्छा रहता है। जब आपका माइंट स्वस्थ रहता है तो इसका सकारात्मक असर आपके शरीर पर भी पड़ता है।

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  • World Environment Day 2020: पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली से कैंसर के मामले हो सकते हैं कम

    World Environment Day 2020: पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली से कैंसर के मामले हो सकते हैं कम

    World Environment Day 2020: भारत में कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। देश के लाखों लोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। जिसका बड़ा कारण में पर्यावरण के स्तर में लगातार गिरावट का आना है। पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली के जरिये कैंसर से बचा जा सकता है।

    नई दिल्ली स्थित देश के प्रमुख कैंसर केयर सेंटर राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (आरजीसीआईआरसी) के डायरेक्टर मेडिकल ओंकोलॉजी डॉ. विनीत तलवार ने कहा कि धूम्रपान, वायु प्रदूषण, डीजल का धुआं कुछ ऐसे अहम कारण हैं, जिनसे लंग (फेफड़े के) कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। जो लोग ऐसे प्लास्टिक के कारखानों में काम करते हैं, जहां बेंजीन कंपाउंड का इस्तेमाल होता है, उनमें यूरीनरी ब्लेडर के कैंसर का खतरा रहता है। इसी तरह फंगल टॉक्सिंस के संपर्क में आने वालों में लीवर के कैंसर का खतरा ज्यादा रहता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय की जरूरतों से बचा तो नहीं जा सकता है, लेकिन हर व्यक्ति को अपनी हिफाजत को लेकर सतर्क रहना चाहिए।

    हम जैसा करते हैं, वैसा ही भरते हैं। अगर हम पर्यावरण को प्रदूषित करेंगे, तो पलटकर यह हमें भी नुकसान पहुंचाता है, जो कि ग्लोबल वार्मिंग में वृद्धि से पता चलता है। डॉ. तलवार ने कहा हमें बचाव पर ध्यान देते हुए पर्यावरण के संरक्षण में योगदान करना चाहिए। डॉ. तलवार ने आगे कहा कि एक स्वस्थ जीवनशैली कैंसर के मामले में प्राणरक्षक साबित हो सकती है। मोटापा, आलस, लो रफेज (कम फाइबर वाले) भोजन कुछ ऐसे कारण हैं, जो हमें अलग-अलग कैंसर के खतरे की ओर ले जाते हैं।

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  • Heart Attack: तुरंत नहीं आता हार्ट अटैक, इतने महीने पहले मिलते हैं संकेत

    Heart Attack: तुरंत नहीं आता हार्ट अटैक, इतने महीने पहले मिलते हैं संकेत

    ज्यादातर लोग इस बात से अनजाव होते हैं कि हार्ट अटैक से कई महीने पहले या कई सप्ताह पहले ही बॉडी कुछ संकेत देने लगती है। जिसपर लोगों को ध्यान देने की जरूरत होती है। लेकिन लोग इन संकेतों को अनदेखा कर देते हैं। बस यही लापरवाही कुछ समय बाद आप पर भारी पड़ जाती है और हार्ट अटैक जैसी खतरनाक बीमारी का सामना करना पड़ सकता है। इसी बीच आज हम आपकी मदद के लिए आपको इससे जुड़ी तमाम जानकारी बताने जा रहे हैं।

    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अटैक अचानक ही आता है। चाहे हार्ट अटैक हो या ब्रेन अटैक हो। लेकिन कई महीने या कुछ हफ्ते पहले से बॉडी में कुछ चैंज आने लगते हैं। जो हमारी डेली लाइफ में भी असर डालता है। वहीं मेडिकल भाषा में हार्ट अटैक को एमआई कहा जाता है यानी मायोकार्डियल इंफ्रेक्शन। चलिए जानते हैं उन संकेतों के बारे में।

    एंजायना पेन

    चलते वक्त, काम करते समय छाती में भारीपन होने लगता है। जो काम बंद करने के बाद ठीक हो जाता है। इसे एंजायना पेन कहते हैं। यह हार्ट अटैक की बीमारी का बहुत ही कॉमन लक्षण है। ज्यादतर केसेज में यह लक्षण देखने को मिलता है।

    सांस फूलना

    सांस फूलने की दिक्कत होने लगती है। थोड़ी देर चलते ही आपकी सांस फूलने लगती हैं। अगर आपके साथ लंबे समय से ऐसा हो रहा है। आपको इस समस्या को इग्नोर नहीं करना चाहिए।

    मिमिक सिंप्टम्स

    खाने के बाद गले में जलन होना। कुछ भी खाने के बाद गले में जलन होने लगती है। खासकर खाना खाने के बाद गले में जलन होने लगती है। यह भी अचानक हार्ट अटैक आने का एक लक्षण हो सकता है।

    तेज पसीना और धड़कनों की रफ्तार

    अगर आपको बिना किसी वजह से अचानक पसीना आता है, तो यह भी दिल की कमजोरी का एक लक्षण हो सकता है। कई बार धड़कनें बहुत तेज होना या बहुत धीमी होना भी दिल की कमजोरी की तरफ इशारा करती है। अचानक आपको घबराहट होने लगती है तो इसे हल्के में न लें। यह दिल की बीमारी होने का भी एक लक्षण हो सकता है।

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  • सैनिटाइजर के अधिक उपयोग से त्वचा रोग की शिकायत आई सामने, डॉक्टरों की सलाह साबुन का करें इस्तेमाल

    सैनिटाइजर के अधिक उपयोग से त्वचा रोग की शिकायत आई सामने, डॉक्टरों की सलाह साबुन का करें इस्तेमाल

    कोरोना संक्रमण से बचने का एक मात्र उपाय सेनिटाइजर अब लोगों के मुसीबत बनता जा रहा है। क्योंकि इसके अधिक उपयोग से त्वचा रोग की शिकायतें सामने आ रही हैं। लोग घर में रहने के बावजूद 10 से 15 बार सेनिटाइजर से हाथ साफ कर रहे हैं। ऐसे में त्वचा में खुजली के साथ जलन सहित अन्य समस्याएं होने लगी हैं। दो माह से लगातार सैनिटाइजर का उपयोग कर रहे लोगों को अब डॉक्टर भी साबुन से अच्छी तरह से हाथ धोने की सलाह दे रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, प्राइवेट अस्पतालों की ओपीडी व क्लीनिक खुलने पर इस तरह के केस और बढ़ सकते हैं।

    पहले सिर्फ डॉक्टर करते थे सेनिटाइजर का उपयोग

    मार्च के पहले तक सिर्फ डॉक्टर या मेडिकल संचालक सेनिटाइजर का इस्तेमाल करते नजर आते थे, लेकिन कोरोना संक्रमण में अल्कोहल बेस्ड सेनिटाइजर के उपयोग से बचाव की जानकारी के बाद अब हर कोई इसका उपयोग करने लगा है। बाहर निकलने पर लोग साथ में सेनिटाइजर की छोटी बोतल भी रख रहे हैं।

    महिलाओं में अधिक असर

    पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की त्वचा अधिक नर्म होती है, इस कारण उनमें सेनिटाइजर से त्वचा संबंधी समस्या के मामले ज्यादा सामने आए हैं। डॉक्टरों के अनुसार इससे ठीक होने में पांच से सात दिन लग रहे हैं, वहीं जलन भी ज्यादा समय तक रहती है।

    केस- एक

    कोहेफिजा में रहने वाले इरशाद कामिल दो महीने से लगातार सेनिटाइजर का उपयोग कर रहे हैं। अब उनके हाथ की त्वचा में जलन और खुजली होने लगी है। डॉक्टर को दिखाया तो इरशाद ने बताया कि सामान्य भोपाल का सेवन और पहले किसी चीज से एलर्जी नहीं होने की बात बताई। डॉक्टर ने लक्षण देखकर सेनिटाइजर से इंफेक्शन होना कारण बताया। लगभग सात दिनों के इलाज और सेनिटाइजर का उपयोग बंद करने से इंफेक्शन खत्म हुआ।

    केस- दो

    अरेरा कॉलोनी निवासी विनय यादव ने डॉक्टर को फोन कर हथेलियों में खुरदुरापन आने सहित कोहनी तक जलन होने की समस्या बताई। इसक बाद डॉक्टर ने लक्षण देखते ही तुरंत सेनिटाइजर का उपयोग कम करने का सुझाव दिया और साबुन से हाथ धोने का कहा। इसके तीन दिन बाद समस्या खत्म हो गई।

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  • Benefit Of Coconut: कई वायरस से बचाता है कोकोनट का वसा, बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता

    Benefit Of Coconut: कई वायरस से बचाता है कोकोनट का वसा, बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता

    Coconut Ke Fayde: नारियल या कोकोनट में ऐसी वसा होती है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती है। कैपरीक, कैपरीलिक और यूरिक फैटी एसिड जैसे तत्व इसे हमारे लिए फायदेमंद बनाते हैं। ये एंटीवायरल, एंटीबैक्टीरियल और एंटीप्रोटोजोनल का कार्य करती हैं। यह हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। कोकोनट की वसा में मौजूद मोनो लेयूरिन, हवा में मौजूद कई वायरस से हमें बचाते हैं।

    खनिज लवण: कोकोनट में बहुत सारे खनिज लवण होते हैं, जो हमारे शरीर की कार्यप्रणाली को दुरुस्त रखते हैं। मैग्नीज, कॉपर, सिलेनियम, पोटेशियम, आयरन, फास्फोरस, मैग्नीशियम और जिंक जैसे तत्व इसे खास बनाते हैं।

    ब्लड प्रेशर रखे नियंत्रित: कच्चे नारियल में फाइबर होते हैं, जो हमारे ब्लड प्रेशर को कम करता है।

    कब्ज से राहत दिलाए: फाइबर से भरपूर नारियल कब्ज से राहत दिलाता है। इसमें मौजूद सेचुरेटेड फैट हालांकि खराब फैट होती है लेकिन एक कप कच्चे नारियल में 24 ग्राम सेचुरेटेड फैट होती है, जो लोग अपना वजन कम करना चाहते हैं, उन्हें इसकी कम मात्रा लेनी चाहिए। अपने शरीर और वजन के अनुसार 10 से 20 ग्राम की लिमिट रखें।

    कम मात्रा में लें: इसमें मौजूद सेचुरेटेड फैट वेट लॉस प्रोग्राम को फेल कर सकते हैं। अगर आप अपना वेट मेंटेन करना चाहते हैं तो कोकोनट ऑयल का इस्तेमाल करें। अगर आप वजन कम नहीं करना चाहते तो प्रति सप्ताह एक बार 30 से 35 ग्राम कच्चा नारियल खा सकते हैं। इसे सब्जी, चटनी, पेस्ट और मीठे पकवानों में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। कच्चा नारियल सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है। ताजे नारियल में सभी पोषक तत्व कुछ समय तक सुरक्षित रहते है। इसलिए इसे काटने के बाद जितना जल्दी हो सके कंज्यूम करें।

    कोकोनट मिल्क: कोकोनट मिल्क में वसा ज्यादा होती है और इसे अगर किसी व्यंजन बनाने में इस्तेमाल किया जाता है तो इसकी वसा के विषय में ध्यान रखें। कटे हुए कोकोनट, पैक किए हुए कोकोनट, पैकेज्ड कोकोनट मिल्क का इस्तेमाल उसकी ताजगी के अनुसार करें।

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  • कोरोना वायरस का संक्रमण को रोकने ब्रिटिश वैज्ञानिकों की टीम ने तैयार किया विशेष प्रकार का इनहेलर

    कोरोना वायरस का संक्रमण को रोकने ब्रिटिश वैज्ञानिकों की टीम ने तैयार किया विशेष प्रकार का इनहेलर

    Coronavirus: कोरोना वायरस का संक्रमण पूरी दुनिया में अभी भी महामारी के रूप में अपना विकराल रूप धारण किए हुए है। इसके संक्रमण को रोकने के लिए पूरी दुनिया के डॉक्टर और वैज्ञानिक लगातार इस कोशिश में जुटे हुए हैं कि जल्द से जल्द इसकी वैक्सीन को बनाया जा सके। संक्रमण और इसके खतरे से बचे रहने के लिए अब एक और राहत भरी खबर सामने आई है।

    डॉक्टरों ने इस संक्रमण के खतरे को शरीर में कई गुना तक कम करने के लिए एक विशेष प्रकार का इनहेलर तैयार किया है। यह इन्हेलर दमा के मरीजों के लिए और भी मजबूत सुरक्षा कवच की तरह कार्य करेगा। आइए अब इसके बारे में विस्तार पूर्वक जानते हैं।

    ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने किया है तैयार

    इस इन्हेलर को तैयार करने के लिए ब्रिटिश वैज्ञानिकों के एक विशेष टीम कोरोना वायरस के संक्रमण के बारे में जानने के बाद इस पर काम कर रही थी। लंबे समय तक कोशिश करने के बाद साउंथैम्पटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इन्हेलर को तैयार कर लिया है। इसका इस्तेमाल करके भी देखा गया है जिसके बाद इसे प्रभावी रूप से कोरोना वायरस के संक्रमण से होने वाले गंभीर जोखिम को कम करने में काफी मदद मिल सकती है।

    ​कैसे काम करेगा इनहेलर

    आपने दमा के मरीजों को एक विशेष प्रकार का इनहेलर का इस्तेमाल करते हुए देखा होगा। हमारे शरीर में ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा को पहुंचाने के लिए यह एक प्रकार का यंत्र होता है। ठीक उसी तरह कोरोना वायरस के संक्रमण को शरीर में अधिक नुकसान पहुंच आने से रोकने के लिए इस इनहेलर के सहारे एक खास दवा का प्रयोग किया जाएगा। इससे संक्रमण के खतरे को रोकने में मदद मिलेगी।

    ​फेफड़ों की करेगा सुरक्षा

    कोरोना वायरस का संक्रमण रेस्पिरेट्री सिस्टम से जुड़ा हुआ है। संक्रमण होने के बाद हमारे श्वसन तंत्र में म्यूकस इकट्ठा होने लगता है जिसके कारण धीरे-धीरे हमें सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। इसमें एक खास तरह की दवा का इस्तेमाल किया गया है। इसे इन्हेल करने के बाद यह फेफड़ों को बुरी तरह से प्रभावित नहीं होने देगा और फेफड़ों पर पड़ने वाले कोरोना वायरस संक्रमण कि नकारात्मक असर को भी काफी हद तक कम कर देगा।

    ​इस प्रोटीन का किया गया है इस्तेमाल

    इनहेलर को तैयार करने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि इसको तैयार करने के लिए एक विशेष प्रकार की प्रोटीन का इस्तेमाल किया गया है। इसे इंटरफेरान बीटा प्रोटीन कहा जाता है। वायरस शरीर में पहुंचने के बाद विकराल रूप धारण करता है जिसे रोकने के लिए यह प्रोटीन सक्रिय रूप से कार्य करेगा। इसमें इस्तेमाल होने वाली ड्रग को विशेष कोड दिया गया है जिससे SNG001 के नाम से भी जाना जाता है।

    ट्रायल के अंतिम चरण पर है यह इनहेलर

    शोधकर्ताओं के अनुसार, इस बारे में जानकारी दी गई है कि फिलहाल इस इनहेलर का ट्रायल किया जा रहा है जो अंतिम चरण में है। यह पूरी तरीके से सफलतापूर्वक खत्म होता है तो उसके बाद इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन करके लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी। हालांकि, शुरुआती आंकड़ों की मानें तो कुछ मरीजों पर इसका इस्तेमाल करने से उनके लक्षणों में भारी कमी देखी जा चुकी है।

    120 मरीज ट्रायल के लिए तैयार

    कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों पर इसका इस्तेमाल करने के लिए फिलहाल अनुमति मिल चुकी है। इसके लिए 120 मरीजों का चयन किया गया है जिन्हें इस इनहेलर का उपयोग कराया जाएगा और उनके शरीर में कोरोना वायरस के संक्रमण की स्थिति के कम होने का आंकड़ा इकट्ठा किया जाएगा। कहा जा रहा है कि इसका परिणाम जुलाई महीने तक पूरी तरह से सामने आ सकता है। वैज्ञानिकों ने इस बात की पूरी उम्मीद जताई है कि यह सकारात्मक परिणाम दिखाएगा।

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  • Women Health: हर तीसरी महिला है इस बीमारी का शिकार, जानिए क्या हैं बीमारी

    Women Health: हर तीसरी महिला है इस बीमारी का शिकार, जानिए क्या हैं बीमारी

    Women Health: अक्सर कुछ औरतों को पेट के निचले हिस्से, कुल्हों और जांघों में दर्द रहता है। जिसे महिलाएं पीरियड्स का दर्द समझकर इग्नोर कर देती हैं। ऐसा करना उनको आगे जाकर भारी पड़ सकता है। यहीं दर्द पीरियड्स के दौरान और ऑफिस में कई घंटों एक ही जगह पर बैठे रहने से बढ़ जाता है, और वहीं अगर दर्द 6 माह से ज्यादा समय तक बना रहे तो यह पेल्विक कंजेशन सिंड्रोम यानी PCS भी हो सकता है। इसमें महिलाओं को तेज दर्द होता है। वहीं खड़े होने पर ज्यादा दर्द होता है, और लेटने पर इसमें थोड़ी राहत मिलती है।

    यह महिलाओं में होने वाली ऐसी बीमारी है जिसमें पेट मे बहुत ही तेज होता है। जो खड़े होने पर और बढ़ जाता है। इसमें शिराएं सामान्य से अधिक खिंच जाती हैं।आपको यह जानकार हैरानी होगी इंडिया में हर तीसरी महिला को यह बीमारी होती है। इस बीमारी का शिकार ज्यादातर 20 से 45 साल की महिलाएं होती हैं।

    क्या है PCS का कारण

    - बॉडी स्ट्रक्चर और हार्मोंनल गड़बड़ी

    - हार्मोंनल चेंज

    - वजन बढ़ने

    -पेल्विक एरिया की अनैटमी में बदलाव

    PCS के लक्षण

    - पेट के निचले हिस्‍से में भारीपन

    - पेट के निचले हिस्से में मरोड़ और दर्द

    - यूरीन पास करते समय दर्द होना

    - ज्यादा देर खड़े और बैठने में दर्द

    क्या है इसका इलाज

    इस परेशानी से बचने के लिए नॉन सर्जिकल प्रकिया का भी सहारा लिया जा सकता है। यह PCS का एक मिनिमली इनवेसिव ट्रीटमेंट है, जिसमें खराब नसों को बंद कर दिया जाता है, ताकि उनमें रक्त जमा न हो।

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  • चीन का एक लैब बना रहा ऐसी दवा, जो कोरोना वायरस को कर सकती है काबू

    चीन का एक लैब बना रहा ऐसी दवा, जो कोरोना वायरस को कर सकती है काबू

    कोरोना वायरस पर दुनिया के कई देश तरह-तरह की रिसर्च कर रहे हैं। वहीं कई देश इसके इलाज के लिए अलग-अलग तरह के वैक्सीन बनाने में भी लगे हुए हैं। वहीं इस वायरस को लेकर कई खबरें सामने आ रही हैं। इसी बीच चीन की लैब ने दावा किया है कि वो एक ऐसी दवा बना रहे हैं, जो कोरोना वायरस को काबू में कर सकती है।

    रिसर्चर्स कहना है कि इस दवा की मदद से पीड़ित जल्दी ठीक होने के साथ-साथ उनका इम्यून सिस्टम भी स्ट्रांग हो रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साइंटिस्ट इस दवा की टेस्टिंग चीन की पेकिंग यूनिवर्सिटी में कर रहे हैं। इसके बाद इंसान पर इसका ट्रायल ऑस्ट्रेलिया या किसी और देश में किया जाएगा।

    यूनिवर्सिटी के बीजिंग एडवांस्ड इनोवेशन सेंटर फॉर जीनोमिक्स के निदेशक सन्नी झी का कहना है कि जानवरों पर इसका ट्रायल सफल रहा है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि अब उन्होंने वायरस संक्रमित चूहे के अंदर न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबॉडी इंजेक्ट किया तो 5 दिन के बाद वायरल लोड 2500 तक कम हो गया। जिससे पता लगा कि उस पर दवा का असर हुआ है।

    बताया जा रहा है कि यह मेडिसिन न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबॉडी का इस्तेमाल करती है, जिसे इंसान का प्रतिरोधी तंत्र तैयार करता है। जिससे सेल्स को इंफेक्शन से बचाया जा सके। झी की टीम ने ठीक हुए 60 मरीजों से एंटीबॉडी को निकाला।

    एक जर्नल में पब्लिश की गई टीम की रिसर्च में बताया गया कि एंटीबॉडी की मदद से इलाज किया जा सकता है और इससे पीड़ित का रिकवरी टाइम भी कम हो जाता है। झी ने बताया कि फिलहाल अभी दवा का क्लिनिकल योजना पर काम चल रहा है। उन्हें उम्मीद है कि एंटीबॉडी कोरोना वायरस के लिए अच्छी दवा बन सकती है।

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  • Coronavirus: क्या आप जानते है कोरोना वायरस के इन लक्षणों के बारे में, बचने के लिए जरुर पढ़े खबर

    Coronavirus: क्या आप जानते है कोरोना वायरस के इन लक्षणों के बारे में, बचने के लिए जरुर पढ़े खबर

    Coronavirus: दुनिया के कई देश कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए तमाम कोशिश कर रहे हैं। वहीं कई देश कोरोना को लेकर तरह-तरह की रिसर्च कर रहे हैं। जिससे नए नए खुलासे सामने आते जा रहे हैं। जहां साइंटिस्ट इसके इलाज के लिए वैक्सीन बनाने में जुटे हुए हैं। वहीं कोरोना वायरस पीड़ितो में नए नए लक्षण सामने आ रहे हैं। जिसके कारण हालत गंभीर होती जा रही है। जैसे-जैसे कोरोना पीड़ितो की संख्या बढ़ रही है। वैसे-वैसे कोरोना वायरस के भी नए नए लक्षण सामने आ रहे है। इसी बीच आज हम आपको कोरोना के नए नए लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसके बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं।

    कोरोना वायरस की शुरूआत में इसके लक्षण सूखी खांसी, बुखार, सांस में तकलीफ और थकावट नजर आ रहे थे। लेकिन बीते कुछ दिनों से हैरान कर देने वाले लक्षण सामने आ रहे हैं। जिसके बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी है। कोरोना के बढ़ते नए लक्षणों ने साइटिंस्ट और डॉक्टर की चिंता काफी बढ़ा दी है।

    उल्टी और मतली, डायरिया

    हाल ही में हुई रिसर्च से सामने आया है कि कोरोना वायरस के मरीजों में उल्टी, मतली और पेट में दर्द जैसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं। WHO की रिपोर्ट के मुताबिक उलटी और मतली जैसे लक्षण सिर्फ 5 प्रतिशत मरीज़ों में ही देखे गए हैं।

    कन्जेक्टीवाइटिस

    चीन में हुई रिसर्च से सामने आया है कि इस खतरनाक बीमारी में लक्षण कन्जेक्टीवाइटिस भी हो सकता है। कन्जेक्टीवाइटिस जैसे लक्षण में पीड़ित की आखें लाल हो जाती हैं और उससे फ्लूएड निकलता है। इतना ही नहीं आंखों में दर्द भी होता है। अध्ययन की मानें तो ये लक्षण उन पीड़ितों में दिखता है जिनकी हालत गंभीर हो चुकी है।

    चकत्ते और ब्लड क्लॉट्स

    बच्चों में कोरोना वायरस के कुछ अलग लक्षण दिखते हैं। बच्चों में बुखार के साथ स्किन पर चकत्ते, हथेली की त्वचा का निकला, ब्लड क्लॉट, होंठ फटना और आंखें जलना जैसे लक्षण देखेने को मिले।

    पैरों और हाथों की उंगलियों में सूजन और जलन

    हाथों और पैरों की उंगलियों में सूजन और दर्द भी कोरोना के नए लक्षण हैं। यह लक्षण अडल्ट और बच्चों में ज्यादा देखने को मिले हैं।

    सिर दर्द

    यह वायरस अलग-अलग लोगों को अलग-अलग तरह से प्रभावित कर रहा है। WHO के मुताबिक कोरोना वायरस से संक्रमित हुए 14 प्रतिशत लोगों मे सिर दर्द की दिक्कत होती है।

    चक्कर आना

    वुहान में हुई एक रिसर्च में पाया गया कि कोरोना वायरस के 36 प्रतिशत पीड़ितो में सिर दर्द और चक्कर आने जैसे लक्षण दिखने को मिलते हैं। इसके साथ कुछ मरीजों को सांस लेने में तकलीफ भी देखी गई है।

    स्वाद और सूंघने में दिक्कत आना

    रिसर्च में पाया गया था कि कुछ कोरोना वायरस के पीड़ितों को स्वाद और सूंघने न आने जैसी समस्या भी देखने को मिली है। इसके साथ ही रिसर्च में देखा गया है कि असल में स्वाद और सूंघने न आने की दिक्कत आना इस जानलेवा बीमारी का शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।

    आवाज का चले जाना

    आवाज के जाने को WHO ने COVID-19 के सबसे गंभीर लक्षणों की लिस्ट में शामिल किया है। आपको इनमें से कोई भी लक्षण नजर आते हैं तो तुरंत डॉक्टरों के पास जाएं।

    ये भी हैं लक्षण

    - सांस लेने में तकलीफ

    - बुखार

    - सीने में दर्द या दबाव

    - नीले होंठ

    - ज़ुकाम और गले में खराश

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