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  • Benefit Of Coconut: कई वायरस से बचाता है कोकोनट का वसा, बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता

    Benefit Of Coconut: कई वायरस से बचाता है कोकोनट का वसा, बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता

    Coconut Ke Fayde: नारियल या कोकोनट में ऐसी वसा होती है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती है। कैपरीक, कैपरीलिक और यूरिक फैटी एसिड जैसे तत्व इसे हमारे लिए फायदेमंद बनाते हैं। ये एंटीवायरल, एंटीबैक्टीरियल और एंटीप्रोटोजोनल का कार्य करती हैं। यह हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। कोकोनट की वसा में मौजूद मोनो लेयूरिन, हवा में मौजूद कई वायरस से हमें बचाते हैं।

    खनिज लवण: कोकोनट में बहुत सारे खनिज लवण होते हैं, जो हमारे शरीर की कार्यप्रणाली को दुरुस्त रखते हैं। मैग्नीज, कॉपर, सिलेनियम, पोटेशियम, आयरन, फास्फोरस, मैग्नीशियम और जिंक जैसे तत्व इसे खास बनाते हैं।

    ब्लड प्रेशर रखे नियंत्रित: कच्चे नारियल में फाइबर होते हैं, जो हमारे ब्लड प्रेशर को कम करता है।

    कब्ज से राहत दिलाए: फाइबर से भरपूर नारियल कब्ज से राहत दिलाता है। इसमें मौजूद सेचुरेटेड फैट हालांकि खराब फैट होती है लेकिन एक कप कच्चे नारियल में 24 ग्राम सेचुरेटेड फैट होती है, जो लोग अपना वजन कम करना चाहते हैं, उन्हें इसकी कम मात्रा लेनी चाहिए। अपने शरीर और वजन के अनुसार 10 से 20 ग्राम की लिमिट रखें।

    कम मात्रा में लें: इसमें मौजूद सेचुरेटेड फैट वेट लॉस प्रोग्राम को फेल कर सकते हैं। अगर आप अपना वेट मेंटेन करना चाहते हैं तो कोकोनट ऑयल का इस्तेमाल करें। अगर आप वजन कम नहीं करना चाहते तो प्रति सप्ताह एक बार 30 से 35 ग्राम कच्चा नारियल खा सकते हैं। इसे सब्जी, चटनी, पेस्ट और मीठे पकवानों में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। कच्चा नारियल सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है। ताजे नारियल में सभी पोषक तत्व कुछ समय तक सुरक्षित रहते है। इसलिए इसे काटने के बाद जितना जल्दी हो सके कंज्यूम करें।

    कोकोनट मिल्क: कोकोनट मिल्क में वसा ज्यादा होती है और इसे अगर किसी व्यंजन बनाने में इस्तेमाल किया जाता है तो इसकी वसा के विषय में ध्यान रखें। कटे हुए कोकोनट, पैक किए हुए कोकोनट, पैकेज्ड कोकोनट मिल्क का इस्तेमाल उसकी ताजगी के अनुसार करें।

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  • कोरोना वायरस का संक्रमण को रोकने ब्रिटिश वैज्ञानिकों की टीम ने तैयार किया विशेष प्रकार का इनहेलर

    कोरोना वायरस का संक्रमण को रोकने ब्रिटिश वैज्ञानिकों की टीम ने तैयार किया विशेष प्रकार का इनहेलर

    Coronavirus: कोरोना वायरस का संक्रमण पूरी दुनिया में अभी भी महामारी के रूप में अपना विकराल रूप धारण किए हुए है। इसके संक्रमण को रोकने के लिए पूरी दुनिया के डॉक्टर और वैज्ञानिक लगातार इस कोशिश में जुटे हुए हैं कि जल्द से जल्द इसकी वैक्सीन को बनाया जा सके। संक्रमण और इसके खतरे से बचे रहने के लिए अब एक और राहत भरी खबर सामने आई है।

    डॉक्टरों ने इस संक्रमण के खतरे को शरीर में कई गुना तक कम करने के लिए एक विशेष प्रकार का इनहेलर तैयार किया है। यह इन्हेलर दमा के मरीजों के लिए और भी मजबूत सुरक्षा कवच की तरह कार्य करेगा। आइए अब इसके बारे में विस्तार पूर्वक जानते हैं।

    ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने किया है तैयार

    इस इन्हेलर को तैयार करने के लिए ब्रिटिश वैज्ञानिकों के एक विशेष टीम कोरोना वायरस के संक्रमण के बारे में जानने के बाद इस पर काम कर रही थी। लंबे समय तक कोशिश करने के बाद साउंथैम्पटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इन्हेलर को तैयार कर लिया है। इसका इस्तेमाल करके भी देखा गया है जिसके बाद इसे प्रभावी रूप से कोरोना वायरस के संक्रमण से होने वाले गंभीर जोखिम को कम करने में काफी मदद मिल सकती है।

    ​कैसे काम करेगा इनहेलर

    आपने दमा के मरीजों को एक विशेष प्रकार का इनहेलर का इस्तेमाल करते हुए देखा होगा। हमारे शरीर में ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा को पहुंचाने के लिए यह एक प्रकार का यंत्र होता है। ठीक उसी तरह कोरोना वायरस के संक्रमण को शरीर में अधिक नुकसान पहुंच आने से रोकने के लिए इस इनहेलर के सहारे एक खास दवा का प्रयोग किया जाएगा। इससे संक्रमण के खतरे को रोकने में मदद मिलेगी।

    ​फेफड़ों की करेगा सुरक्षा

    कोरोना वायरस का संक्रमण रेस्पिरेट्री सिस्टम से जुड़ा हुआ है। संक्रमण होने के बाद हमारे श्वसन तंत्र में म्यूकस इकट्ठा होने लगता है जिसके कारण धीरे-धीरे हमें सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। इसमें एक खास तरह की दवा का इस्तेमाल किया गया है। इसे इन्हेल करने के बाद यह फेफड़ों को बुरी तरह से प्रभावित नहीं होने देगा और फेफड़ों पर पड़ने वाले कोरोना वायरस संक्रमण कि नकारात्मक असर को भी काफी हद तक कम कर देगा।

    ​इस प्रोटीन का किया गया है इस्तेमाल

    इनहेलर को तैयार करने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि इसको तैयार करने के लिए एक विशेष प्रकार की प्रोटीन का इस्तेमाल किया गया है। इसे इंटरफेरान बीटा प्रोटीन कहा जाता है। वायरस शरीर में पहुंचने के बाद विकराल रूप धारण करता है जिसे रोकने के लिए यह प्रोटीन सक्रिय रूप से कार्य करेगा। इसमें इस्तेमाल होने वाली ड्रग को विशेष कोड दिया गया है जिससे SNG001 के नाम से भी जाना जाता है।

    ट्रायल के अंतिम चरण पर है यह इनहेलर

    शोधकर्ताओं के अनुसार, इस बारे में जानकारी दी गई है कि फिलहाल इस इनहेलर का ट्रायल किया जा रहा है जो अंतिम चरण में है। यह पूरी तरीके से सफलतापूर्वक खत्म होता है तो उसके बाद इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन करके लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी। हालांकि, शुरुआती आंकड़ों की मानें तो कुछ मरीजों पर इसका इस्तेमाल करने से उनके लक्षणों में भारी कमी देखी जा चुकी है।

    120 मरीज ट्रायल के लिए तैयार

    कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों पर इसका इस्तेमाल करने के लिए फिलहाल अनुमति मिल चुकी है। इसके लिए 120 मरीजों का चयन किया गया है जिन्हें इस इनहेलर का उपयोग कराया जाएगा और उनके शरीर में कोरोना वायरस के संक्रमण की स्थिति के कम होने का आंकड़ा इकट्ठा किया जाएगा। कहा जा रहा है कि इसका परिणाम जुलाई महीने तक पूरी तरह से सामने आ सकता है। वैज्ञानिकों ने इस बात की पूरी उम्मीद जताई है कि यह सकारात्मक परिणाम दिखाएगा।

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  • Women Health: हर तीसरी महिला है इस बीमारी का शिकार, जानिए क्या हैं बीमारी

    Women Health: हर तीसरी महिला है इस बीमारी का शिकार, जानिए क्या हैं बीमारी

    Women Health: अक्सर कुछ औरतों को पेट के निचले हिस्से, कुल्हों और जांघों में दर्द रहता है। जिसे महिलाएं पीरियड्स का दर्द समझकर इग्नोर कर देती हैं। ऐसा करना उनको आगे जाकर भारी पड़ सकता है। यहीं दर्द पीरियड्स के दौरान और ऑफिस में कई घंटों एक ही जगह पर बैठे रहने से बढ़ जाता है, और वहीं अगर दर्द 6 माह से ज्यादा समय तक बना रहे तो यह पेल्विक कंजेशन सिंड्रोम यानी PCS भी हो सकता है। इसमें महिलाओं को तेज दर्द होता है। वहीं खड़े होने पर ज्यादा दर्द होता है, और लेटने पर इसमें थोड़ी राहत मिलती है।

    यह महिलाओं में होने वाली ऐसी बीमारी है जिसमें पेट मे बहुत ही तेज होता है। जो खड़े होने पर और बढ़ जाता है। इसमें शिराएं सामान्य से अधिक खिंच जाती हैं।आपको यह जानकार हैरानी होगी इंडिया में हर तीसरी महिला को यह बीमारी होती है। इस बीमारी का शिकार ज्यादातर 20 से 45 साल की महिलाएं होती हैं।

    क्या है PCS का कारण

    - बॉडी स्ट्रक्चर और हार्मोंनल गड़बड़ी

    - हार्मोंनल चेंज

    - वजन बढ़ने

    -पेल्विक एरिया की अनैटमी में बदलाव

    PCS के लक्षण

    - पेट के निचले हिस्‍से में भारीपन

    - पेट के निचले हिस्से में मरोड़ और दर्द

    - यूरीन पास करते समय दर्द होना

    - ज्यादा देर खड़े और बैठने में दर्द

    क्या है इसका इलाज

    इस परेशानी से बचने के लिए नॉन सर्जिकल प्रकिया का भी सहारा लिया जा सकता है। यह PCS का एक मिनिमली इनवेसिव ट्रीटमेंट है, जिसमें खराब नसों को बंद कर दिया जाता है, ताकि उनमें रक्त जमा न हो।

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  • चीन का एक लैब बना रहा ऐसी दवा, जो कोरोना वायरस को कर सकती है काबू

    चीन का एक लैब बना रहा ऐसी दवा, जो कोरोना वायरस को कर सकती है काबू

    कोरोना वायरस पर दुनिया के कई देश तरह-तरह की रिसर्च कर रहे हैं। वहीं कई देश इसके इलाज के लिए अलग-अलग तरह के वैक्सीन बनाने में भी लगे हुए हैं। वहीं इस वायरस को लेकर कई खबरें सामने आ रही हैं। इसी बीच चीन की लैब ने दावा किया है कि वो एक ऐसी दवा बना रहे हैं, जो कोरोना वायरस को काबू में कर सकती है।

    रिसर्चर्स कहना है कि इस दवा की मदद से पीड़ित जल्दी ठीक होने के साथ-साथ उनका इम्यून सिस्टम भी स्ट्रांग हो रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साइंटिस्ट इस दवा की टेस्टिंग चीन की पेकिंग यूनिवर्सिटी में कर रहे हैं। इसके बाद इंसान पर इसका ट्रायल ऑस्ट्रेलिया या किसी और देश में किया जाएगा।

    यूनिवर्सिटी के बीजिंग एडवांस्ड इनोवेशन सेंटर फॉर जीनोमिक्स के निदेशक सन्नी झी का कहना है कि जानवरों पर इसका ट्रायल सफल रहा है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि अब उन्होंने वायरस संक्रमित चूहे के अंदर न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबॉडी इंजेक्ट किया तो 5 दिन के बाद वायरल लोड 2500 तक कम हो गया। जिससे पता लगा कि उस पर दवा का असर हुआ है।

    बताया जा रहा है कि यह मेडिसिन न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबॉडी का इस्तेमाल करती है, जिसे इंसान का प्रतिरोधी तंत्र तैयार करता है। जिससे सेल्स को इंफेक्शन से बचाया जा सके। झी की टीम ने ठीक हुए 60 मरीजों से एंटीबॉडी को निकाला।

    एक जर्नल में पब्लिश की गई टीम की रिसर्च में बताया गया कि एंटीबॉडी की मदद से इलाज किया जा सकता है और इससे पीड़ित का रिकवरी टाइम भी कम हो जाता है। झी ने बताया कि फिलहाल अभी दवा का क्लिनिकल योजना पर काम चल रहा है। उन्हें उम्मीद है कि एंटीबॉडी कोरोना वायरस के लिए अच्छी दवा बन सकती है।

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  • Coronavirus: क्या आप जानते है कोरोना वायरस के इन लक्षणों के बारे में, बचने के लिए जरुर पढ़े खबर

    Coronavirus: क्या आप जानते है कोरोना वायरस के इन लक्षणों के बारे में, बचने के लिए जरुर पढ़े खबर

    Coronavirus: दुनिया के कई देश कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए तमाम कोशिश कर रहे हैं। वहीं कई देश कोरोना को लेकर तरह-तरह की रिसर्च कर रहे हैं। जिससे नए नए खुलासे सामने आते जा रहे हैं। जहां साइंटिस्ट इसके इलाज के लिए वैक्सीन बनाने में जुटे हुए हैं। वहीं कोरोना वायरस पीड़ितो में नए नए लक्षण सामने आ रहे हैं। जिसके कारण हालत गंभीर होती जा रही है। जैसे-जैसे कोरोना पीड़ितो की संख्या बढ़ रही है। वैसे-वैसे कोरोना वायरस के भी नए नए लक्षण सामने आ रहे है। इसी बीच आज हम आपको कोरोना के नए नए लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसके बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं।

    कोरोना वायरस की शुरूआत में इसके लक्षण सूखी खांसी, बुखार, सांस में तकलीफ और थकावट नजर आ रहे थे। लेकिन बीते कुछ दिनों से हैरान कर देने वाले लक्षण सामने आ रहे हैं। जिसके बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी है। कोरोना के बढ़ते नए लक्षणों ने साइटिंस्ट और डॉक्टर की चिंता काफी बढ़ा दी है।

    उल्टी और मतली, डायरिया

    हाल ही में हुई रिसर्च से सामने आया है कि कोरोना वायरस के मरीजों में उल्टी, मतली और पेट में दर्द जैसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं। WHO की रिपोर्ट के मुताबिक उलटी और मतली जैसे लक्षण सिर्फ 5 प्रतिशत मरीज़ों में ही देखे गए हैं।

    कन्जेक्टीवाइटिस

    चीन में हुई रिसर्च से सामने आया है कि इस खतरनाक बीमारी में लक्षण कन्जेक्टीवाइटिस भी हो सकता है। कन्जेक्टीवाइटिस जैसे लक्षण में पीड़ित की आखें लाल हो जाती हैं और उससे फ्लूएड निकलता है। इतना ही नहीं आंखों में दर्द भी होता है। अध्ययन की मानें तो ये लक्षण उन पीड़ितों में दिखता है जिनकी हालत गंभीर हो चुकी है।

    चकत्ते और ब्लड क्लॉट्स

    बच्चों में कोरोना वायरस के कुछ अलग लक्षण दिखते हैं। बच्चों में बुखार के साथ स्किन पर चकत्ते, हथेली की त्वचा का निकला, ब्लड क्लॉट, होंठ फटना और आंखें जलना जैसे लक्षण देखेने को मिले।

    पैरों और हाथों की उंगलियों में सूजन और जलन

    हाथों और पैरों की उंगलियों में सूजन और दर्द भी कोरोना के नए लक्षण हैं। यह लक्षण अडल्ट और बच्चों में ज्यादा देखने को मिले हैं।

    सिर दर्द

    यह वायरस अलग-अलग लोगों को अलग-अलग तरह से प्रभावित कर रहा है। WHO के मुताबिक कोरोना वायरस से संक्रमित हुए 14 प्रतिशत लोगों मे सिर दर्द की दिक्कत होती है।

    चक्कर आना

    वुहान में हुई एक रिसर्च में पाया गया कि कोरोना वायरस के 36 प्रतिशत पीड़ितो में सिर दर्द और चक्कर आने जैसे लक्षण दिखने को मिलते हैं। इसके साथ कुछ मरीजों को सांस लेने में तकलीफ भी देखी गई है।

    स्वाद और सूंघने में दिक्कत आना

    रिसर्च में पाया गया था कि कुछ कोरोना वायरस के पीड़ितों को स्वाद और सूंघने न आने जैसी समस्या भी देखने को मिली है। इसके साथ ही रिसर्च में देखा गया है कि असल में स्वाद और सूंघने न आने की दिक्कत आना इस जानलेवा बीमारी का शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।

    आवाज का चले जाना

    आवाज के जाने को WHO ने COVID-19 के सबसे गंभीर लक्षणों की लिस्ट में शामिल किया है। आपको इनमें से कोई भी लक्षण नजर आते हैं तो तुरंत डॉक्टरों के पास जाएं।

    ये भी हैं लक्षण

    - सांस लेने में तकलीफ

    - बुखार

    - सीने में दर्द या दबाव

    - नीले होंठ

    - ज़ुकाम और गले में खराश

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  • अमेरिकी वैज्ञानिकों ने किया एक बड़ा दावा, आंखों से भी फैलता है कोरोना वायरस

    अमेरिकी वैज्ञानिकों ने किया एक बड़ा दावा, आंखों से भी फैलता है कोरोना वायरस

    Coronavirus: देश और विदेश में कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इसी बीच अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक बड़ा दावा किया है। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि कोविड-19 शरीर में आंखों से भी फैलता है। वैज्ञानिकों ने दावा करते हुए कहा कि कोरोना वायरस फेफड़ों की तरह आंखों से भी फैलता है। यह आंखों में भी एसीई-2 रिसेप्टर पैदा होता है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना वायरस आंखों से भी शरीर में फैल सकता है और आंसू के जरिए भी संक्रमण शरीर में फैल सकता है। अमेरिका की जॉन्स हापकिंस शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति के शरीर में आंखों से भी खेल सकता है। ये एसीई-2 नाम के एंजाइम रिसेप्टर की मदद से आंख से जाता है।

    अमेरिकी वैज्ञानिकों ने रिसर्च के दौरान बताया कि कोरोना वायरस सिर्फ फेफड़ों, श्वसन मार्ग और दूसरे अंगों की तरह आंखों से फैलता है। शोधकर्ताओं ने बताया कि अगर संक्रमित मरीज के ख़ासने या थूकने की ड्रॉपिंग हाथों के जरिया आंखों पर लगती है। तो उससे भी संक्रमण आंखों से शरीर में फैल सकता है। यह पहला चौकाने वाला रिसर्च सामने आया है।

    नई रिसर्च के मुताबिक वैज्ञानिकों ने कहा कि कोरोनावायरस आंखों की प्रचलित बीमारी कंजेक्टिवाइटिस की वजह भी सकता है। वैज्ञानिकों ने रिसर्च के दौरान कुछ संक्रमित मरीजों के रिसर्च किए जिसके दौरान 30% मरीजों में ऐसे लक्षण पाए गए जब उनकी आंखों में सूजन आ गई और वह लाल हो जाती हैं श्वसन मार्ग से भी आंखों तक पहुंच सकता है।

    वहीं अमेरिकी वैज्ञानिकों ने दूसरी तरफ दावा करते हुए कहा कि कोरोना वायरस से डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को भी सावधान रहना चाहिए। उनके लिए भी ज्यादा खतरा बना रहता है। इन मरीजों में एसीई-2 रिसेप्टर स्वस्थ लोगों के मुकाबले अधिक पैदा होता है। वही शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि जो लोग धूम्रपान करते हैं। उनमें भी संक्रमण बन सकता है।

    जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका में हर दिन कम से कम 500 से 1000 लोगों की मौतें हो रही है। बीते 24 घंटे में 776 लोग अपनी जान गवां चुके हैं। वहीं अमेरिका में अब तक कोरोना से मरने वालों की संख्या 80,000 हो गई है। दूसरी तरफ एक लाख 13 हजार लोग इस संक्रमण की चपेट में है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के वाइट हाउस में भी करुणा वारस ने दस्तक दे दी है।

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  • कोरोना मरीज के स्वस्थ होने के बाद फिर होना पॉजिटिव, फेफड़ो की डेड सेल्स हो सकती है इसके पीछे का कारण

    कोरोना मरीज के स्वस्थ होने के बाद फिर होना पॉजिटिव, फेफड़ो की डेड सेल्स हो सकती है इसके पीछे का कारण

    Coronavirus: चीन से शुरू हुआ कोरोना वायरस थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। इसकी चपेट में आने वालो की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। वहीं WHO भी कोरोना को लेकर तरह-तरह की जानकारी और सुझाव दे रहा है। 

    हाल ही में WHO ने कोरोना को लेकर एक बहुत बड़ी जानकारी दी है। WHO के मुताबिक कोरोना मरीज के ठीक होने के बाद फिर से कोरोना पॉजिटिव आने के पीछे का कारण फेफड़ो की डेड सेल्स हो सकती हैं।

    ठीक होने के बाद फिर आए कोरोना पॉजिटिव

    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बीते महीने नें ज्यादातर ऐसे मामले आए थे जो कोरोना से ठीक होने के बाद भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। दक्षिण कोरिया में ऐसे मामले 100 से भी ज्यादा देखने को मिले थे। इसके बाद कई देशों में ऐसे केस देखने को मिले है।

    री-इंफेक्शन नहीं बल्कि मरीजों के फेफड़ों से बाहर निकल रही डेड सेल्स

    WHO के प्रवक्ता का कहना है कि कुछ कोरोना मरीजों के ठीक होने के बाद भी उनके टेस्ट कोरोना पॉजिटिव आए हैं। इसके पीछे का कारण री-इंफेक्शन नहीं बल्कि मरीजों के फेफड़ों से बाहर निकल रही डेड सेल्स हैं, जो इंफेक्शन का शिकार हो गई थीं।

    डेड सेल्स इंफेक्शन वायरस नहीं

    इसके साथ ही बताया जा रहा है कि संक्रामक रोग महामारी विज्ञानी मारिया वान केहोव "डेड सेल्स के मामले का समझाते हुए कहती हैं कि जैसे ही फेफड़े खुद को ठीक करना शुरू करते हैं, तो डेड सेल्स बाहर आने लगती हैं। ये डेड सेल्स इंफेक्शन वायरस नहीं है, बल्कि ये फेफड़े के ही सूक्ष्म अंश होते हैं जो नाक या मुंह के जरिए बाहर निकलते हैं।

    क्या वो लोग दूसरों को भी इफेंक्टेड कर सकते हैं

    फिलहाल अभी इस पर रिसर्च चल रही है। इसके बाद ही पता लग पाएगा कि नए वायरस को कब तक दूर कर पाएंगे इसके साथ अभी इस बात को भी समझना बहुत जरूरी है कि जो लोग ठीक होने के बाद कोरोना पॉजिटिव आ रहे हैं । क्या वो लोग दूसरों को भी इफेंक्टेड कर सकते हैं।

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  • रोजाना सिर्फ 10 मिनट की धूप लेने से कोरोना वायरस से लड़ने की मिलेगी ताकत, जानिए क्या है बेहतर समय

    रोजाना सिर्फ 10 मिनट की धूप लेने से कोरोना वायरस से लड़ने की मिलेगी ताकत, जानिए क्या है बेहतर समय

    Coronavirus: कोरोना वायरस देश में दिन प्रतिदिन खतरनाक रूप लेता जा रहा है। इसकी चपेट में आने वालों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। भारत में कोरोना पीड़ितो की संख्या 50 हजार पार पहुंची गई है। इस खतरनाक वायरस को लेकर लोगों के मन में काफी डर बैठ गया है। शुरू से ही लोगों को इससे बचने के लिए इम्यून सिस्टम को स्ट्रांग करने की सलाह दी जा रही है। वहीं आएदिन स्वास्थ्य मंत्रालय भी इससे बचने के लिए नए-नए टिप्स भी देता रहता है। इसी बीच हाल ही में हुई रिसर्च से सामने आया है कि दिन में कम से कम 10 मिनट की धूप लेने से कोरोना से लड़ने में मदद मिलती है।

    इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है

    ऑस्ट्रेलिया के हेल्थ एक्सपर्ट का दावा है कि रोजाना सिर्फ 10 मिनट की धूप लेने से कोरोना से लड़ने की ताकत मिलती है। एक्सपर्ट का कहना है कि सूर्य की रोशनी के संपर्क में आने से बॉडी को विटामिन-डी मिलता है। वहीं विटामिन डी के साथ धूप में फास्फोट भी मिलता है, जो आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है।

    बेहतर समय 7 से 8 बजे के बीच

    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि धूर सेकने का बेहतर समय 7 से 8 बजे के बीच का है। इस वक्त आप धूप जरूर लें। वहीं कुछ लोग कमरे की खिड़की में से धूप सेकना पसंद करते हैं, जो शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है। शीशे से टकराकर शरीर को मिलने वाली धूप में अल्ट्रावायलेट किरणें नहीं पाई जाती है। इसके साथ ही आप दिन में खिड़की के पास बैठकर भी काम कर सकते हैं।

    विटामिन-डी की कमी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए

    हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो इस वक्त बॉडी में विटामिन-डी की कमी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। क्योंकि विटामिन डी की कमी से आपका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। जिस कारण आपको कोरोना होने का खतरा बढ़ जाता है।

    धूप के अलावा सप्लिमेंट्स के जरिए भी ले सकते हैं विटामिन डी

    वहीं आप धूप के अलावा सप्लिमेंट्स के जरिए भी विटामिन डी की कमी को पूरा कर सकते हैं। इसके लिए डाइट में फल सब्जियां, शलजम, नींबू, माल्टा, मूली, पत्ता गोभी, मछली, अंडे, रेड मीट, 1 गिलास दूध, दलिया, टमाटर, और पनीर जैसी हैल्दी चीजें शामिल कर सकते हैं।

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  • अगर नहीं आती रात को नींद तो पिए ये ड्रिंक, जानिए इस ड्रिंक को बनाने का तरीका

    अगर नहीं आती रात को नींद तो पिए ये ड्रिंक, जानिए इस ड्रिंक को बनाने का तरीका

    अक्सर देखा जाता है कि लोग रात में नींद ना आने की वजह से काफी परेशान रहते हैं। पूरी रात उनकी करवटें बदलते हुए कट जाती हैं। कई लोगों को दिन भर काम करने के बावजूद भी नींद नहीं आती है। नींद ना आने का एक कारण स्ट्रेस भी हो सकता है। वहीं कुछ लोग ऑफिस की टेंशन या घर की टेंशन की वजह स्ट्रेस का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में अगर आप भी स्ट्रेस की वजह से काफी परेशान हैं।

    साथ ही नींद ना आने के कारण से आपको काफी दिक्कतें हो रही है, तो आपकी परेशानी का समाधान निकालते हुए हम आपको एक खास ड्रिंक बताने जा रहे हैं। इसके साथ ही हम इसे बनाने का तरीका भी बताएंगे। जिसे पीने के बाद आपको काफी अच्छी नींद आएगी और आप काफी स्ट्रेस फ्री फील करेंगे।

    इसके साथ ही आपको बता दें कि हाल ही में स्टडी से सामने आया है कि नींबू का सेवन करने से रात में नींद न आने की समस्या दूर होती है। वहीं साइंटिस्ट का कहना है कि नींबू में स्लीपिंग हार्मोन को एक्टिवेट करने का गुण रखता है।

    सामग्री - 1 गिलास के लिए नींबू 

    - 1 नमक

    - 1 चुटकी

    ड्रिंक को बनाने का तरीका

    - इसे बनाने के लिए सबसे पहले नींबू को काट लें।

    - इसके बाद नींबू का रस स्क्वीजर के जरिए निकालें।

    - अब एक गिलास पानी लें और नींबू के रस को पानी में चम्मच के सहारे अच्छी तरह मिला दें।

    - अब इसके ऊपर से नमक डालें और इस ड्रिंक का सेवन सोने से आधे घंटे पहले करें। 2 से 3 दिन तक लगातार सेवन करने के बाद आपको नींद न आने की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।

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  • जानिए कोरोना के लक्षण नजर आने से कितने दिन पहले फैल सकता है ये वायरस, पढ़ें पूरी खबर

    जानिए कोरोना के लक्षण नजर आने से कितने दिन पहले फैल सकता है ये वायरस, पढ़ें पूरी खबर

    Coronavirus: कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया में निराशा छाई हुई है। लाखों लोग इस खतरनाकर वायरस का शिकार हो चुके हैं। कोरोना वायरस के चलते पूरी दुनिया में हालात बिगड़ते ही जा रहे हैं। महीनों पहले आया यह वायरस खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। वहीं अगर भारत की बात करें तो कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। 

    कोरोना वायरस को लेकर नए-नए मामले सामने आते जा रहें हैं। कुछ कोरोना मरीज ठीक होने के महीनो बाद भी कोरोना पॉजिटिव आ रहे हैं, तो कुछ मरीजों में अब तक के मामलों से बिल्कुल अलग कोरोना के लक्षण नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं कुछ मरीजों में काफी दिनों के बाद में कोरोना के लक्षण नजर आते हैं। इसी बीच लोगों के मन में सवाल आ रहा है कि कोरोना इंफेक्शन लक्षण नजर आने से कितने दिन पहले फैल सकता है।

    2-3 दिन पहले ही मरीज दूसरों को इंफेक्टेड कर सकता है

    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह वायरस इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि इसके लक्षण सामने आने से 2-3 दिन पहले ही मरीज दूसरों को इंफेक्टेड कर सकता है। अभी तक कोरोना के जितने भी मामले सामने आए हैं, उनमें 15 से 20 फीसद मरीज इसी तरह ही कोरोना का शिकार हुए थे।

    लक्षण नजर न आने का यह हो सकता है कारण

    आपको बता दें कि लक्षण नजर न आने का एक कारण इम्यून सिस्टम मजबूत होना भी हो सकता है। जिस शख्स का इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता है, तो वो उसके शरीर में इंफेक्शन अपना कम असर दिखा पाता है। जिस कारण इंसान खुद को स्वस्थ महसूस करता है और उसमें कोरोना के लक्षण नजर नहीं आते हैं। कोरोना पॉजिटिव का लक्षण नजर न आना काफी खतरनाक हो सकता है।

    पीड़ित को 72 घंटों तक बुखार नहीं होना चाहिए

    इसके साथ ही आपको बता दें कि रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्रों के मुताबिक कोरोना वायरस से ठीक माने जाने के लिए पीड़ित को 72 घंटों तक बुखार नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही श्वसन स्वास्थ्य में भी सुधार दिखना चाहिए और 24 घंटे के भीतर उसकी दो जांच रिपोर्ट नेगेटिव आनी चाहिए।

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  • Rishi Kapoor: दो साल पहले ऋषि कपूर को हुआ था ल्यूकेमिया, जानिए क्या है ल्यूकेमिया

    Rishi Kapoor: दो साल पहले ऋषि कपूर को हुआ था ल्यूकेमिया, जानिए क्या है ल्यूकेमिया

    Rishi Kapoor Death: बॉलीवुड एक्टर ऋषि कपूर ने 30 अप्रैल को दुनिया से अलविदा कह दिया है। ऋषि की मौत के से बॉलीवुड इंडस्ट्री को ही नहीं बल्कि उनके फैंस को बड़ा झटका लगा है। एक्टर इरफान खान की मौत को अभी 24 घंटे भी नहीं हुए थे, कि बॉलीवुड इंडस्ट्री को एक और बुरी खबर सुनने को मिल गई है। जिसके बाद से ही बॉलीवुड में शोक की लहर है।

    आपको बता दें की 29 अप्रैल की रात ऋषि कपूर की अचानक तबियत बिगड़ी जिसके बाद उन्हें एचएन रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था। जब उन्होंने आखिरी सांस ली तब उनके साथ उनकी पत्नी नीतू सिंह और बेटे रणबीर कपूर उनके साथ मौजूद थे। ऋषि कपूर के मौत का कारण कैंसर बताया जा रहा है। दो साल पहले ऋषि कपूर को ल्यूकेमिया हुआ था। ल्यूकेमिया एक तरह का कैंसर होता है। हम आपको ल्यूकेमिया के बारे में तमाम जानकारी देने जा रहे हैं।

    ल्यूकेमिया क्या है (What Is Leukemia)

    ल्यूकेमिया एक तरह का ब्लड कैंसर होता है। यह एक ऐसा कैंसर है जो ब्लड सेल्स की कई अलग-अलग प्रकार की कोशिकाओं में हो सकता है। वैसे तो बॉडी में रेड ब्लड सेल्स और वाइट ब्लड सेल्स होते हैं। इसके अलावा शरीर में प्लेटलेट्स भी मौजूद होते हैं जो ब्लड सेल्स को मेंटेन करने में मदद करते हैं। डॉक्टर के मुताबिक ल्यूकेमिया खास रूप से वाइट ब्लड सेल्स को ही प्रभावित करता है। यही कारण है कि इस बीमारी की चपेट में आने वाले इंसान के वाइट ब्लड सेल्स इस कैंसर का निशाना बनता है। वक्त रहते इस बीमारी का इलाज नहीं किया जाए तो इंसान की मौत हो जाती है।

    इम्यून सिस्टम को बुरी तरह कमजोर करता है

    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वाइट ब्लड सेल्स पूरी बॉडी की इम्यून सिस्टम का बहुत बड़ा हिस्सा होता है। इम्यून सिस्टम शरीर के बैक्टीरिया, वायरस, फंगी और संक्रमण से बचाने का काम करता है। ल्यूकेमिया की चपेट में आने के बाद इंसान के शरीर की वाइट ब्लड सेल्स ठीक तरह से काम नहीं करते और उसका इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। फिर यह सामान्य कोशिकाओं की तरह ही काम करने लगती हैं। जिसके कारण इंसान को कई और बीमारियां भी बड़ी आसानी से होने लगती हैं।

    ल्यूकेमिया के कारण

    - ल्यूकेमिया ज्यादातर उन लोगों को होता है जिनकी कोई फैमिली हिस्ट्री रहती है।

    - स्मोकिंग करने से भी ल्यूकेमिया का खतरा बढ़ जाता है

    - जेनेटिक डिसऑर्डर

    - ब्लड डिसऑर्डर, कीमोथेरेपी या रेडिएशन (जो किसी कैंसर की इलाज के दौरान हुई हो)

    ल्यूकेमिया के लक्षण

    - ज्यादा पसीना आना, खासतौर पर रात को

    - थकान महसूस होना

    - वेट कम होना

    -हड्डियों में दर्द होना

    -दर्द रहित सूजन (विशेषकर गर्दन और बगल में)

    - लीवर और स्प्लीन का बढ़ना

    - स्किन पर लाल धब्बे

    - बुखार या ठंड लगना

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  • सरकार ने जारी किया गाइडलाइन, ऐसे यूज़ करें AC और Cooler

    सरकार ने जारी किया गाइडलाइन, ऐसे यूज़ करें AC और Cooler

    Coronavirus: कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया में निराशा फैली हुई है। लाखों लोग इसका शिकार हो चुके हैं। यह वायरस थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। कोरोना की चपेट में आने वालों को आंकड़ा दोगुनी रफ्तार से बढ़ता ही जा रहा है। वहीं लोग इस वायरस को लेकर काफी डरे हुए हैं।

    इसी बीच सरकार ने AC और Cooler को चलाने के लिए गाइडलाइन जारी किए हैं। गाइलाइन के अनुसार घर में AC चलाते समय उसका तापमान 24 से 30 डिग्री सेंटीग्रेड तक होना चाहिए।

    AC और Cooler के यूज करने से जुड़े गाइडलाइन

    - एसी चलाते समय रूम का तापमान 24 से 30 डिग्री तक रखें।

    - उमस का स्तर 40 से 70 प्रतिशत रखें।

    - एयर कंडीशनर द्वारा कमरे में ठंडी हवा का री-र्सकुलेशन, बाहर की हवा के साथ होना जरूरी है। इस लिए थोड़ी-सी खिड़की खुली छोड़ सकते हैं।

    गाइडलाइन में बताया गया कि हवा में मौजूद कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए घर के अंदर वेंटीलेशन को अच्छा रखें। इसके लिए दरवाजे और खिड़कियों को खुला रखें।

    कूलर

    - कूलर चलाते वक्त ध्यान रखें कि कूलर में हवा बाहर से आए। इसके लिए आप कूलर को खिड़की या बाहर की तरफ रख सकते हैं।

    - कूलर को हमेशा साफ और डिइंफेक्ट करके रखें।

    - बचे हुए पानी को निकाल दें और ताज़ा पानी भरें।

    - साथ ही खिड़कियों को खुला रखें।

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  • अगर आपके मुंह से भी आती है दुर्गंध तो जरुर अपनाएं ये देसी तरीका

    अगर आपके मुंह से भी आती है दुर्गंध तो जरुर अपनाएं ये देसी तरीका

    मुंह से बदबू आना एक बड़ी समस्या है। वहीं मुंह से बदबू आने के कारण आपका पूरा इंप्रेशन खराब हो सकता है। जिस भी शख्स के मुंह से बदबू आती है, उसके पास बैठना कोई भी पसंद नहीं करता है। वहीं आपको इस समस्या के पीछे का कारण भी पता होना चाहिए। इसी बीच आपकी मदद के लिए आज हम आपको मुंह से बदबू आने के कारण और इसके साथ ही इस समस्या से निपटने के लिए कुछ घरेलू उपाय बताने जा रहे हैं। जिसकी मदद से आप इस परेशानी से छुटकारा पा सकते हैं। तो चलिए जानते हैं बदबू आने के कारण और मुंह की दुर्गंध दूर करने के उपाय।

    मुंह से बदबू आने की समस्या को मेडिकल टर्म में हेलिटोसिस कहा जाता है। मुंह में पनपनेवाले बैक्टीरिया की वजह से मुंह से बदबू आती है। वहीं इसके पीछे का कारण डाइजेशन का न ठीक होना और इसके साथ ही ओरल हेल्थ पर भी आपको ध्यान देने की जरूरत होती है।

    मुंह से बदबू आने के कारण

    -फास्ट फूड और स्पाइसी और ऑइली फूड खाना।

    -तंबाकू जैसे प्रोडक्ट्स का सेवन करना।

    -दांतों और मुंह की सही देखभाल ना करना।

    -सेहत पर ध्यान न देना।

    -मुंह का सूखापन होना।

    -दांतों में तकलीफ होना।

    - ओरल इंफेक्शन का होना।

    -किसी भी तरह का नशा करना

    मुंह की बदबू दूर करने के उपाय

    - दिन में कम से कम 3 लीटर पानी पिएं।

    - खाना खाने से पहले पानी पिएं और खाना खाने के कम से कम 20 मिनट बाद पानी पिएं।

    - खाना खाने के बाद सौंफ खाएं। ये आपका खाना पचाने में मदद करता है।

    - मुंह में लॉन्ग रखकर टॉफी की तरह चूसे। ऐसा करने से आपकी ये समस्या दूर होगी।

    - दिन में कम से कम दो बार ब्रश करें।

    - कोशिश करें कि नीम या अशोक की दातून से दिन में एक बार दांतों को साफ कर सकें।

    - पुदीना चबाने से भी मुंह की समस्या का समाधान होता है।

    और भी...

  • क्या कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों से अभी भी है खतरा? अगर आपका भी है ये सवाल तो जरूर पढ़िए ये खबर

    क्या कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों से अभी भी है खतरा? अगर आपका भी है ये सवाल तो जरूर पढ़िए ये खबर

    Coronavirus: कोरोना का प्रकोप दुनिया के कई देशों में देखने को मिल रहा है। वहीं भारत में भी कोरोना वायरस अब खतरनाक रूप लेता ही जा रहा है। इसकी चपेट में आने वालों की संख्या अब दोगुनी रफ्तार से बढ़ रही है। यह खतरनाक वायरस थमने के बजाए लगातार बढ़ता ही जा रहा है। वहीं इस खतरे को देखते हुए लोगों के मन में कोरोना को लेकर तरह तरह के सवाल उठ रहे हैं। जिनमें से लोग इस बात को लेकर भी काफी परेशान नजर आ रहे हैं, कि क्या कोरोना के ठीक हुए मरीज से भी लोगों का खतरा है।

    सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना बहुत ही जरूरी

    आपको बता दें की जो शख्स कोरोना वायरस के संक्रमण से ठीक होकर घर वापस गए है। लोगों को उस शख्स से डरने की कोई जरूरत नहीं है। उस शख्स के परिवार वाले भी उसके करीब जा सकते हैं। इसके साथ ही कोरोना से ठीक हुए उस शख्स को इस बात का ध्यान रखने की जरूरत है कि वो किसी भी बाहरी व्यक्ति से ना मिलें। ऐसे में उस शख्स को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना बहुत ही जरूरी है।

    इम्यून सिस्टम को मजबूत रखना बहुत जरूरी

    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस खतरनाक वायरस से बचने के लिए साफ सफाई का ख्याल रखते हुए इम्यून सिस्टम को मजबूत रखना बहुत जरूरी है। शुरू से ही लोगों को अपनी इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत रखने के लिए कहा जा रहा है। इसके लिए हाल ही में आयुष मंत्रालय ने इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत रखने के लिए कुछ टिप्स बताए थे। जिन्हें अपनाकर आप अपना इम्यून सिस्टम मजबूत रख सकती हैं।

    इम्यूनिटी सिस्टम (Immune System) को मजबूत रखने के टिप्स

    - दिनभर में जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके पानी पिएं। हर दिन कम से कम 9 से 10 गिलास पानी जरूर पियें। कोशिश करें कि गुनगुना पानी पिएं।

    - रोजाना कम से कम 30 मिनट योगा जरूर करें। - खाने में ज्यादा से ज्यादा जीरा, हल्दी,लस्सन, धनिया का इस्तेमाल करें।

    - च्यवनप्राश का सेवन जरूर करें। रोजाना आप 1 चम्मच खाएं। डायबिटीज के मरीज भी च्यवनप्राश खा सकते हैं।

    - दूध की चाय की जगह हर्बल टी का सेवन करें।

    - तुलसी, दालचीनी, काली मिर्च और अदरक और मुनक्का को उबालकर काढ़ा बनाकर डेली पिएं। इसे मीठा करने के लिए आप इसमें शहद और गुड़ भी डाल सकते हैं।

    - रात को सोने से पहले दूध में हल्दी मिलाकर जरूर पिएं।

    - तिल, नारियल या देसी घी को सुबह नहाने और रात को सोने से पहले नाक के अंदर जरूर डालें।

    - 1 चम्मच तिल या नारियल का तेल मुंह में लेकर अच्छे से घुमाएं। इसके बाद गुनगुने पानी से कुल्ला करें।

    - दिन में 3 से 4 बार भाप यानि स्टीम जरूर लें। इसके लिए आप इसमें तुलसी भी डालकर स्टीम ले सकते हैं।

    - अगर किसी शख्स के गले में दिक्कत है, तो इससे राहत पाने के लिए लौंग का पाउडर, शहद या चीनी को एक साथ मिलाकर दिन में 2-3 बार इसका सेवन करें।

    और भी...

  • दिल के मरीज को होता है कोरोना का ज्यादा खतरा, बॉडी के किसी भी पार्ट पर कर सकता है हमला

    दिल के मरीज को होता है कोरोना का ज्यादा खतरा, बॉडी के किसी भी पार्ट पर कर सकता है हमला

    Coronavirus: कोरोना का खतरा देश में लगातार बढ़ते ही जा रहा है। इसके चपेट में आने वालों की संख्या में कम होने के बजाए लगातार बढ़ोतरी होते ही जा रही है। वहीं कई देश कोरोना पर तरह-तरह ही रिसर्च कर रहे हैं। वहीं हाल ही में स्विटजरलैंड की ज्यूरिख यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने पता लगाया है कि कोरोना वायरस बॉडी के पार्ट में खून पहुंचाने वाली रक्तवाहिनियों पर हमला कर रहा है।

    वायरस फेफड़ो पर ही नहीं बल्कि बॉडी के किसी भी पार्ट पर हमला कर सकता है

    बता दें की रिसर्चर्स का कहना है कि रक्तवाहिनी की ऊपरी सतह को एंडोथीलियम कहते हैं। यह वायरस एंडोथीलियम पर हमला करता है। इस कारण शरीर में खून का प्रवाह घटता है और शरीर के किसी एक हिस्से में खून जमने लगता है। यह खतरनाक वायरस फेफड़ो पर ही नहीं बल्कि बॉडी के किसी भी पार्ट पर हमला कर सकता है।

    कोरोना दिल, किडनी, आंतो और फेफड़ों पर हमला करता है

    इसके साथ ही रिसर्चर्स का कहना है कि यही वजह है कि बाकी लोगों के मूकाबले हाई ब्लड प्रेशर और दिल के मरीज को कोरोना होने का खतरा ज्यादा होता है। ऐसे में इन मरीजों को एहतियात बरतने की खास जरूरत है। वहीं अभी तक देखा गया है कि कोरोना दिल, किडनी, आंतो और फेफड़ों पर हमला करता है।

    एंजाइम को जकड़ने के बाद संक्रमण फैलाता है

    वहीं रिसर्चर्स ने कोरोना के इंफेक्शन की तरीका समझने के लिए कोरोना पीड़ितों की रक्तवाहिनियों को इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से देखा तो ये क्षतिग्रस्त दिखीं। इसकी वजह ACE2 रिसेप्टर एंजाइम को बताया गया है। यह एंजाइम शरीर के कई अंगों जैसे फेफड़े, धमनी, किडनी और हृदय की कोशिकाओं में पाया जाता है। वायरस इस एंजाइम को जकड़ने के बाद संक्रमण फैलाता है।

    कॉमन प्वाइंट कोमोबिडिटीज देखने को मिला

    इसके साथ ही एक्सपर्ट का कहना है कि अभी तक पूरी दुनिया में कोरोना के कारण जितनी भी मौतें हुईं है। उससे दो बातें सामने निकल कर आई है। पहली बात कि इस वायरस की चपेट में ज्यादा उम्र वाले लोग आए हैं। दूसरी यह कि जितनी भी मौते हुईं उनमें कॉमन प्वाइंट कोमोबिडिटीज देखने को मिला। ज्यादा उम्र के लोगों में शारीरिक क्षमता कम होती है।

    ज्यादा उम्र के लोग कोरोना वायरस को ज्यादा शिकार हो रहे हैं

    वहीं एक्सपर्ट ने बताया कि ज्यादा उम्र के लोगों में शारीरिक क्षमता कम होती है। जिस वजह से इन लोगों के संक्रमित होने के ज्यादा चांस होते हैं। इस कारण ज्यादा उम्र के लोग कोरोना वायरस को ज्यादा शिकार हो रहे हैं।

    कोमोबिडिटीज क्या है?

    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोमोबिडिटीज का मतलब होता है कि जो लोग डायबिटीज, कमजोर और खराब फेफड़े, हाई ब्लड प्रेशर, टीबी और एचआईवी और कमजोर इम्यून सिस्टम जैसी बीमारियों का पहले से ही शिकार होते हैं। ऐसे लोगों के लिए स्वस्थ शख्स लोगों के मुकाबले कोरोना वायरस ज्यादा खतरनाक है। यह लोग कोरोना का शिकार आसानी से हो सकते हैं। ऐसे में इन बीमारियों से जूझ रहे इंसान को अपना खास ध्यान रखने की सख्त जरूरत होती है।

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